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Aligarh News: 15 साल पहले हुई एएमयू छात्र की हत्या में एक दोषी, दो आरोपी बरी
Fri, 17 Feb 2023 01:55 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Feb 2023 01:55 AM IST
सार
एएमयू के एक छात्र की 15 साल पहले 16 सितंबर 2007 में हत्या कर दी गयी थी। हत्याकांड के बाद एएमयू में जमकर उपद्रव व साइनडाई (अनिश्चितकाल के लिए बंदी) तक घोषित हुआ था।
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एएमयू
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के बागपत निवासी बीएससी छात्र मजहर नईम की 15 वर्ष पूर्व हुई हत्या के मामले में एक आरोपी दोषी करार दिया गया है। साथ ही दो आरोपी बरी किए गए हैं। यह फैसला एडीजे-17 मनोज कुमार सिद्धू की अदालत से सुनाया गया है। बता दें कि यह हत्या लूट के इरादे से हुई थी और हत्याकांड के बाद एएमयू में जमकर उपद्रव व साइनडाई (अनिश्चितकाल के लिए बंदी) तक घोषित हुआ था।
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अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी सुधांशु अग्रवाल ने बताया कि यह घटना 16 सितंबर 2007 की है। मुकदमा एएमयू प्रॉक्टर कार्यालय की ओर से दर्ज कराया गया। बाद में बागपत निवासी मृत छात्र के पिता नईम अली की ओर से पैरोकारी की गई। मुकदमे के अनुसार बीएससी का आफताब हॉल निवासी छात्र मजहर नईम तीसरे रमजान के दिन तराबी पढ़कर अपने हॉल लौट रहा था। तभी रात करीब सवा दस बजे उसे पीछे से आए बाइक सवार तीन अज्ञात हमलावरों ने लूट के इरादे से रोका और तमंचे की बट सिर में मारी। जिससे वह बेहोश होकर वहीं गिर गया। सूचना पर प्रॉक्टर टीम उसे मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंची। जहां उसकी मौत हो गई।
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दौरान-ए-विवेचना पुलिस ने फ्रेंडस कॉलोनी क्वार्सी के मो.असरफ व तारिक और शारिक के नाम उजागर किए। उन्हें गिरफ्तार कर लूट में प्रयुक्त तमंचा व मृत छात्र से लूटे गए मोबाइल को बरामद किया गया। मामले में चार्जशीट दायर की गई। दौरान-ए-सत्र परीक्षण साक्ष्यों व गवाही के आधार पर न्यालालय ने तारिक व शारिक को बरी किया है, जबकि मुख्य आरोपी मो.असरफ को तमंचा व मोबाइल बरामद होने के आधार पर दोषी करार दिया है। अब सजा सुनाए जाने के लिए 21 तारीख नियत की गई है। न्यायालय ने दोषी करार अपराधी को अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया है।
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सीबीआई शहर में थी, एक वर्ष में तीसरे एएमयू छात्र की हत्या हुई थी
इस घटना का जिक्र करते हुए उस समय की एएमयू छात्र यूनियन के उपाध्यक्ष माजिन हुसैन बताते हैं कि यह एक वर्ष में तीसरे एएमयू छात्र की हत्या थी। इससे पहले फरवरी में पूर्वी यूपी के साबित अली नाम के छात्र की हत्या हुई थी। इसके बाद मार्च में इंजीनियरिंग के कौशर अली नाम के छात्र की हत्या हुई थी। साबित अली की हत्या में कुछ आरोपी नामजद किए गए थे। वहीं कौशर अली की हत्या में अज्ञात आरोपी थे। लगातार दो हत्याओं से छात्र आंदोलित थे।
हमारी यूनियन ने उस समय के गृह मंत्री शिवराज पाटिल से मुलाकात कर कौशर की हत्या की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। उनके आदेश पर कौशर अली की हत्या की जांच सीबीआई द्वारा की गई। बाद में वह हत्या भी लूट के इरादे से होना उजागर हुआ था। जब मजहर नईम की हत्या हुई, तब सीबीआई शहर में कौशर अली की हत्या की जांच के लिए रुकी हुई थी। लगातार तीसरी हत्या को लेकर सीबीआई ने भी इस घटना में जांच को केंद्रित किया था। संकेत थे कि कहीं लगातार दोनों हत्याएं एक ही ग्रुप ने तो नहीं कीं। मगर बाद में सीबीआई कौशर की हत्या की जांच पर केंद्रित होकर जांच पूरी कर चली गई थी।
हुआ था उपद्रव, फूंक दिया गया था वीसी लॉज
जिस वक्त मजहर नईम की हत्या हुई तो लगातार तीसरी हत्या के बाद छात्र उबल पड़े थे। कैंपस में जमकर उपद्रव हुआ और एएमयू के तत्कालीन कुलपति पीके अब्दुल अजीज का लॉज, प्रॉक्टर कार्यालय, एएमयू स्टाफ क्लब में जमकर तोडफ़ोड़ व आगजनी की गई थी। फायरिंग तक हुई थी। उस घटना के बाद वीसी द्वारा एएमयू में साइनडाई घोषित की गई थी और पूरा कैंपस खाली कराया गया था। इसके बाद हॉस्टल व हॉलों को खाली कराकर उनकी तलाशी कराई गई थी और ढाई माह तक एएमयू पूरी तरह बंद रहा। इसके बाद दिसंबर में नए सिरे से एएमयू खुला और पहली बार वहां हॉल व हॉस्टल छात्रों को नए सिरे से आवंटित किए गए थे। कुल मिलाकर इस घटना के बाद काफी उपद्रव हुआ था।