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कोरोना योद्धा : इनकी सेवा एवं त्याग को लोग जमाने तक रखेंगे याद

Wed, 13 May 2020 11:57 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 13 May 2020 11:57 PM IST
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Nurses are corona worriors will be remebered.
कौशल कुमार ओझा
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सफेद एप्रन वाली सिस्टर्स के त्याग एवं सेवा को लोग जमाने तक याद रखेंगे। कलेजे के टुकड़े को परिजनों के हवाले कर कोरोना जंग में यह अग्रिम पंक्ति की योद्धा की भूमिका निभा रही है। कोरोना वायरस से संक्रमित लोग जब घबराए हुए कोविड-19 हॉस्पिटल में पहुंचते हैं तो यही सिस्टर्स उनका हौैसला बनती हैं। इनकी भूमिका तो हमेशा से महत्वपूर्ण रही है, लेकिन महामारी में वह निखर कर सामने आई है। इनकी सेवा एवं त्याग इतिहास के पन्नों में दर्ज होंगे, जिसे लोग सदियों तक याद रखेंगे। हजार वर्ष बाद भी जब लोग कोरोना को याद करेंगे तो सिस्टर्स की भूमिका को याद कर ताली बजाएंगे।
अतरौली के 100 बेड कोविड-19 हॉस्पिटल में तैनात स्टाफ नर्स ज्योति सोलंकी आठ वर्ष की बेटी एवं छह वर्ष के बेटेे को उसके पापा एवं दादी के पास छोड़कर कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की सेवा कर रही हैं। वह मूलरूप से बुलंदशहर जिले की डिबाई की रहने वाली हैं। वह नर्सिंग को भगवान का वरदान समझती हैं। उनका कहना है कि मानवता की सेवा वह कर सकती हैं, इसलिए भगवान ने इस पेशे को चुनने को लिए प्रेरित किया। भगवान की बार-बार शुक्रिया करती हैं कि उन्हें इस पेशे के लायक समझा। वह कहती है कि मरीजों की सेवा से जो सुख मिलता है, उसको शब्दों में बयां नहीं कर सकती।
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अतरौली के कोविड-19 हॉस्पिटल में तैनात स्टाफ नर्स हेमा पीटर सिंह कहती हैं कि मरीजों के चेहरे पर मुस्कुराहट देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है। ऐसा लगता है जैसे जीवन सार्थक हो गया। कोरोना से संक्रमित मरीजों की
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सेवा में जुटी हेमा का नौैै एवं 12 वर्ष के दो बेटे हैं, जो लखनऊ में अपनी बुआ के पास रह रहे हैं। वह अपने पुत्रों से वीडियो कॉल के माध्यम से बात कर लेती हैं। वह मूलरूप से आगरा की हैं। उनकी मम्मी और पापा दोनों नर्सिंग में थे। हेमा कहती है कि उन्हें गर्व होता है कि वह नर्सिंग के पेशे से हैं। पीड़ित मानवता की सेवा से बेहतर इस पृथ्वी पर कुछ भी नहीं है। आज मेरी जैसी अनगिनत बहनें दुनिया भर में कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों की सेवा में दिन रात जुटी हैं।
जेएन मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स सिस्टर शबा का कहना है कि इस वर्ष का नर्सिंग डे कोरोना से जंग जीतने के बाद मनाएंगे। उनका कहना है कि एक नर्स के लिए हर मिनट और सेकेंड इम्तिहान भरा होता है। आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर एवं सीसीयू का एक-एक पल महत्वपूर्ण है। कोरोना वायरस का मौजूदा दौर भी किसी इम्तिहान की घड़ी से कम नहीं है। यह हमलोगों के लिए अग्नि परीक्षा की तरह है। पूरा विश्वास है कि हमलोग कोरोना जंग जीतकर इस इम्तिहान में भी पास होंगे। सिस्टर शबा का कहना है कि मुझे एक नर्स होने पर गर्व होता है। देश एवं मानवती की सेवा कर खुशी मिलती है।

अतरौली के कोविड-19 में तैनात स्टाफ नर्स केएम प्रिया अपने डेढ़ साल के बेटे को घर छोड़कर कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की सेवा कर रही है। वह मूलरूप से मैनपुरी की रहने वाली हैं। लॉकडाउन के समय से अपने बेटे एवं परिजनों से नहीं मिल पाई है। वह कहती है कि यह समय मानवता एवं देश की सेवा करने का है। बेटा एवं परिजनों से न मिल पाने का दुख तो है, लेकिन खुशी इस बात की है कि संकट के समय में देश एवं पीड़ितों की सेवा कर रही हूं। वह कहती है कि दर्द से कराहते मरीजों के बीच रहना आसान काम नहीं है। कई बार तो मरीजों का दर्द देखकर मन दुखी हो जाता है, लेकिन उपचार के बाद जब मरीज मुस्कुराता है तो इतनी खुशी होती है, जिसको बयां नहीं कर सकतीं।
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