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जीएसटी में अब व्यापारियों की राह हुई आसान
आशीष निगम
Updated Thu, 20 Jul 2017 01:53 AM IST
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एके जैन
- फोटो : Amar Ujala
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एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद से एक्सपोर्टरों के लिए राहत की खबर है। अब उनको माल का निर्यात करने के लिए सेंट्रल एक्साइज विभाग से लेटर ऑफ यूटिलिटी लेने के लिए पसीना नहीं बहाना पड़ेगा। उनको ये पत्र यूपी स्टेट टैक्स विभाग (वाणिज्य कर विभाग) से भी मिल सकेगा। इलाके के खंड के डिप्टी कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर की ओर से जारी किया जाएगा।
एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन एके जैन ने बताया कि 14 जुलाई को जीएसटी के प्रावधान 96 में उक्त नई व्यवस्था दी गई है। अभी तक ये सर्टिफिकेट केवल सेंट्रल एक्साइज विभाग ही देता था। जिससे अलीगढ़ और हाथरस के सैकड़ों एक्सपोर्टर बेहद परेशान होते थे।
लेटर ऑफ अंडर टेकिंग : ये एक्सपोर्टर की ओर से दिया जाने वाला प्रार्थना पत्र है। जिसमें ये लिखा होता है कि ये माल एक्सपोर्ट के लिए भेजा जा रहा है। जिसका एक्सपोर्ट प्रमाण पत्र वह तीन महीने के अंदर जमा कर देगा। इसलिए इस माल में कर न जोड़ा जाए, क्योंकि एक्सपोर्ट पर कोई कर देय नहीं है।
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एक्सपोर्टर की ओर से लेटर ऑफ अंडर टेकिंग मिलने के बाद लेटर ऑफ यूटिलिटी सेंट्रल एक्साइज विभाग या यूपी स्टेट टैक्स विभाग जारी करेगा। जिसके बाद माल को शिपयार्ड या कहीं और ले जाने में दिक्कत नहीं होगी।
- सालाना डेढ़ करोड़ रुपये तक का एक्सपोर्ट करने वाले एक्सपोर्टरों को लेटर ऑफ यूटिलिटी की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनको एक साधारण बैंक गारंटी प्रोफार्मा भर कर देना होगा। इसके बाद वह आसानी से एक्सपोर्ट कर पाएंगे।
- सालाना डेढ़ करोड़ रुपये से ऊपर की धनराशि का एक्सपोर्ट करने वालों को लेटर ऑफ यूटिलिटी देना होगा। इसके बाद उनको सेंट्रल एक्साइज विभाग या यूपी स्टेट टैक्स विभाग से लेटर ऑफ अंडर टेकिंग मिल जाएगा।
- अगर एक्सपोर्ट किया गया माल तीन महीने में भारत की सीमा से बाहर नहीं गया तो उसे एक्सपोर्ट नहीं माना जाएगा। अगर माल चला गया तो कस्टम से एक्सपोर्ट का प्रमाण पत्र मिल जाएगा।
- तीन महीने में जो माल एक्सपोर्ट नहीं हो पाएगा, उस पर एक्सपोर्टर को नियमानुसार आईजीएसटी और उस पर तीन महीने का निर्धारित ब्याज भी देना होगा। क्योंकि अंडर टेकिंग सर्टिफिकेट की मान्य अवधि तीन महीने ही है, इसके बाद ये अमान्य होगा।
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एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन एके जैन ने बताया कि 14 जुलाई को जीएसटी के प्रावधान 96 में उक्त नई व्यवस्था दी गई है। अभी तक ये सर्टिफिकेट केवल सेंट्रल एक्साइज विभाग ही देता था। जिससे अलीगढ़ और हाथरस के सैकड़ों एक्सपोर्टर बेहद परेशान होते थे।
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लेटर ऑफ अंडर टेकिंग : ये एक्सपोर्टर की ओर से दिया जाने वाला प्रार्थना पत्र है। जिसमें ये लिखा होता है कि ये माल एक्सपोर्ट के लिए भेजा जा रहा है। जिसका एक्सपोर्ट प्रमाण पत्र वह तीन महीने के अंदर जमा कर देगा। इसलिए इस माल में कर न जोड़ा जाए, क्योंकि एक्सपोर्ट पर कोई कर देय नहीं है।
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एक्सपोर्टर की ओर से लेटर ऑफ अंडर टेकिंग मिलने के बाद लेटर ऑफ यूटिलिटी सेंट्रल एक्साइज विभाग या यूपी स्टेट टैक्स विभाग जारी करेगा। जिसके बाद माल को शिपयार्ड या कहीं और ले जाने में दिक्कत नहीं होगी।
- सालाना डेढ़ करोड़ रुपये तक का एक्सपोर्ट करने वाले एक्सपोर्टरों को लेटर ऑफ यूटिलिटी की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनको एक साधारण बैंक गारंटी प्रोफार्मा भर कर देना होगा। इसके बाद वह आसानी से एक्सपोर्ट कर पाएंगे।
- सालाना डेढ़ करोड़ रुपये से ऊपर की धनराशि का एक्सपोर्ट करने वालों को लेटर ऑफ यूटिलिटी देना होगा। इसके बाद उनको सेंट्रल एक्साइज विभाग या यूपी स्टेट टैक्स विभाग से लेटर ऑफ अंडर टेकिंग मिल जाएगा।
- अगर एक्सपोर्ट किया गया माल तीन महीने में भारत की सीमा से बाहर नहीं गया तो उसे एक्सपोर्ट नहीं माना जाएगा। अगर माल चला गया तो कस्टम से एक्सपोर्ट का प्रमाण पत्र मिल जाएगा।
- तीन महीने में जो माल एक्सपोर्ट नहीं हो पाएगा, उस पर एक्सपोर्टर को नियमानुसार आईजीएसटी और उस पर तीन महीने का निर्धारित ब्याज भी देना होगा। क्योंकि अंडर टेकिंग सर्टिफिकेट की मान्य अवधि तीन महीने ही है, इसके बाद ये अमान्य होगा।