{"_id":"5aa049bf4f1c1b387b8ba3cb","slug":"no-need-to-see-institutions-like-amu-linking-to-any-community","type":"story","status":"publish","title_hn":"एएमयू जैसे संस्थानों को किसी समुदाय से जोड़कर देखने की जरूरत नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एएमयू जैसे संस्थानों को किसी समुदाय से जोड़कर देखने की जरूरत नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
Updated Thu, 08 Mar 2018 02:08 AM IST
विज्ञापन
एएमयू के 65वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को किसी समुदाय से जोड़कर देखने की आवश्यकता नहीं है। इस विश्वविद्यालय की शोहरत पूरी दुनिया में है। वे बुधवार को यहां आयोजित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के 65 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। सर्वाधिक मेडल हासिल करने वाले हर्ष गुप्ता एवं सना को राष्ट्रपति ने अपने हाथों से मेडल पहनाए। अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच परिसर के एथलेटिक्स ग्राउंड में यह समारोह संपन्न हुआ।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि एएमयू देश के विकास में अपनी खास भूमिका निभाती रही है और सन 2020 में अपने सौ साल पूरे करने जा रही है। 20 वीं सदी के शरुआती दौर में हमारी आजादी की लड़ाई जोरों पर थी। उस दौर में इंसान की बेहतरी और तरक्की के लिए तालीम की बुनियादी अहमियत पर जोर देने वाले महापुरुषों ने भारतीय मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा के प्रसार के लिए अनेक शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की। उसी दौर में बीएचयू, एएमयू, जामिया मिलिया इस्लामिया और दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे शिक्षण संस्थानों की स्थापना हुई।
आधुनिक नजरिए के साथ ज्ञान-विज्ञान की नई संभावनाओं की तलाश करने वाली पीढ़ियों का निर्माण करना इन संस्थाओं का उद्देश्य था। साथ ही इसकी स्थापना ऐसी पीढ़ियों को तैयार करने के लिए की गयी थी जो अपने देश की साझा संस्कृति तथा नैतिक और आध्यात्मिक परंपराओं पर गर्व का अनुभव करें। यह गौर तलब है कि एएमयू के लिए आर्थिक सहायता देने वालों में बनारस के महाराजा भी शामिल थे। इस यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनियां में अपनी पहचान बनाई है।
विज्ञापन
वे एशिया और अफ्रीका के विभिन्न देशों की सरकारों में प्रमुख पदों पर रहे हैं। मैं पिछले साल इथियोपिया के दौरे पर गया था। वहां के प्रधानमंत्री की पत्नी रोमन टेसफाये ने अपना परिचय देते हुए बताया कि वे एएमयू की छात्रा रही हैं। मेरे पूर्ववर्ती डॉ. जाकिर हुसैन ने यहां शिक्षा प्राप्त की, स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया और यहां वाइस चांसलर भी रहे।
उन्होंने छात्रों से कहा कि आपकी यूनिवर्सिटी की पूरी दुनिया में इतनी शोहरत रही है कि महान वैज्ञानिक आइन्स्टाइन ने अपने शिष्य डॉ. रूडोल्फ सैम्यूएल की प्रशंसा करते हुए उन्हें यहां बतौर अध्यापक नियुक्त करने के लिए सुझाव दिया था। उनके सुझाव पर वे फिजिक्स डिपार्टमेंट में नियुक्त किए गए। इस यूनिवर्सिटी की विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी आप सब की है। उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का उल्लेख करते हुए वंचित तबकों की बेहतरी के लिए कार्य करने का आह्वान किया।
विज्ञापन
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि एएमयू देश के विकास में अपनी खास भूमिका निभाती रही है और सन 2020 में अपने सौ साल पूरे करने जा रही है। 20 वीं सदी के शरुआती दौर में हमारी आजादी की लड़ाई जोरों पर थी। उस दौर में इंसान की बेहतरी और तरक्की के लिए तालीम की बुनियादी अहमियत पर जोर देने वाले महापुरुषों ने भारतीय मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा के प्रसार के लिए अनेक शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की। उसी दौर में बीएचयू, एएमयू, जामिया मिलिया इस्लामिया और दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे शिक्षण संस्थानों की स्थापना हुई।
विज्ञापन
आधुनिक नजरिए के साथ ज्ञान-विज्ञान की नई संभावनाओं की तलाश करने वाली पीढ़ियों का निर्माण करना इन संस्थाओं का उद्देश्य था। साथ ही इसकी स्थापना ऐसी पीढ़ियों को तैयार करने के लिए की गयी थी जो अपने देश की साझा संस्कृति तथा नैतिक और आध्यात्मिक परंपराओं पर गर्व का अनुभव करें। यह गौर तलब है कि एएमयू के लिए आर्थिक सहायता देने वालों में बनारस के महाराजा भी शामिल थे। इस यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनियां में अपनी पहचान बनाई है।
विज्ञापन
वे एशिया और अफ्रीका के विभिन्न देशों की सरकारों में प्रमुख पदों पर रहे हैं। मैं पिछले साल इथियोपिया के दौरे पर गया था। वहां के प्रधानमंत्री की पत्नी रोमन टेसफाये ने अपना परिचय देते हुए बताया कि वे एएमयू की छात्रा रही हैं। मेरे पूर्ववर्ती डॉ. जाकिर हुसैन ने यहां शिक्षा प्राप्त की, स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया और यहां वाइस चांसलर भी रहे।
उन्होंने छात्रों से कहा कि आपकी यूनिवर्सिटी की पूरी दुनिया में इतनी शोहरत रही है कि महान वैज्ञानिक आइन्स्टाइन ने अपने शिष्य डॉ. रूडोल्फ सैम्यूएल की प्रशंसा करते हुए उन्हें यहां बतौर अध्यापक नियुक्त करने के लिए सुझाव दिया था। उनके सुझाव पर वे फिजिक्स डिपार्टमेंट में नियुक्त किए गए। इस यूनिवर्सिटी की विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी आप सब की है। उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का उल्लेख करते हुए वंचित तबकों की बेहतरी के लिए कार्य करने का आह्वान किया।