सावन मास में गंगा घाट से पवित्र गंगाजल लेकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ लेकर आने वाले कांवड़ियों को रास्ते में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पूरे रास्ते में न तो सेवार्थ शिविर लगाए गए हैं और न ही प्रशासनिक स्तर से कोई व्यवस्था की गई है। यात्रा के दौरान सड़कों के गड्ढे और अंधेरा उन्हें परेशान कर रहा है। इसके बाद भी शिव भक्त घुंघरुओं की छम-छम करते और बोल बम के जयकारे लगाते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं।
सोमवार को रामघाट रोड के रास्ते हाथरस के सासनी निवासी भीकम सिंह एवं सोनपाल सिंह राजघाट, बुलंदशहर स्थित गंगा घाट से टोली के साथ कांवड़ लेकर आ रहे थे। यात्रा के बारे में पूछा तो उनका दर्द उभर आया। बोले, महाशिवरात्रि पर्व को लेकर कांवड़ियों की सेवार्थ दानवीरों और भक्तों द्वारा जगह-जगह शिविर आयोजित किए जाते हैं। जहां फलाहार, भोजन, विश्राम से लेकर चिकित्सा आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। प्रशासन के स्तर से भी सुरक्षा आदि के इंतजाम कराए जाते हैं। मगर, सावन मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को लेकर किसी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। गंगा घाट से लेकर पूरे रास्ते भर कहीं भी न तो शिविर मिले जहां कुछ देर रुककर विश्राम कर सकें या भोजन आदि ग्रहण कर सकें। बारिश से बचने के लिए इधर-उधर या पेड़ों की नीचे रुकना पड़ रहा है। राजघाट से लेकर रास्ते में डिबाई, अतरौली, तालानगरी, क्वार्सी चौराहे तक कहीं भी रोड पर रोशनी की व्यवस्था नहीं मिली। पूरे रास्ते अंधेरे में ही कांवड़ यात्रा पूरी करनी पड़ रही है। कई बार वाहनों के अचानक सामने आ जाने से उनकी रोशनी से आंखे चौधियां जाती हैं। प्रशासन की ओर से भी कांवड़ियों की सुरक्षा एवं उन्हें सुविधाएं देने में रुचि नहीं दिखाई है।

सोनपाल सिंह कांवड़िया - फोटो : CITY OFFICE