फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Nizamuddin was raising funds and members for PFI

पीएफआई के लिए चंदा और सदस्य जुटा रहा था निजामुद्दीन

Wed, 28 Sep 2022 01:33 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 28 Sep 2022 01:33 AM IST
सार

अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 80 के दशक में सिटी हाईस्कूल के छात्र रहे पीएफआई समर्थित एसडीपीआई प्रदेशाध्यक्ष निजामुद्दीन ने एजेंसियों से पूछताछ में काफी अहम खुलासे किए हैं। मगर देर रात समाचार लिखे जाने तक निजामुद्दीन को थाने नहीं लाया गया था।ये भी खास बातें- 35 राज्यों में संगठन के लिए 35 लीडर खड़े करने का मिला था इसे लक्ष्य- पूर्वी यूपी वर्तमान में कार्यक्षेत्र, गुजरात व दक्षिण भारत में भी किया है काम- अपने संपर्क के सहारे अन्य राज्यों में फैला रहा था लगातार यह पूरा नेटवर्क- 27 हजार वेतन के अलावा टीए\/डीए और मीटिंग खर्च अलग से मिलता थाये भी हैं आरोप- अनुसूचित जाति, सिखों, अल्पसंख्यक युवाओं व गरीबों को सरकार, भाजपा-संघ के खिलाफ भड़काना- जो लोग बहकावे में आएं उन्हें फिर अपने संगठन से जोड़कर सरकार के खिलाफ काम करानाबसपा से शुरू है निजामुद्दीन का सियासी सफरएजेंसियों की पूछताछ के अनुसार, निजामुद्दीन सबसे पहले 1988 में बसपा से जुड़ा। उस समय पीएफआई के कुछ सदस्यों को इनपुट के आधार पर अलीगढ़ से आगरा व फिरोजाबाद में भागकर छिपने पर तलाशा था।

विज्ञापन
Nizamuddin was raising funds and members for PFI

विस्तार

अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
विज्ञापन

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 80 के दशक में सिटी हाईस्कूल के छात्र रहे पीएफआई समर्थित एसडीपीआई प्रदेशाध्यक्ष निजामुद्दीन ने एजेंसियों से पूछताछ में काफी अहम खुलासे किए हैं। पूछताछ में स्वीकारा है कि वह सरकार, राष्ट्रीय स्वयं संघ व भाजपा के खिलाफ गरीब, अनुसूचित, सिख व अल्पसंख्यक युवाओं को भड़काकर अपने संगठन से जोड़ने का काम कर रहा था। वर्तमान में मुख्य कार्यक्षेत्र पूर्वी यूपी था, जहां इसे 5 हजार सदस्य बनाने थे। साथ में चंदा एकत्रित करना भी इसका काम था।
इसके अलावा, देश के अन्य 35 राज्यों में 35 लीडर पैदा करने के संगठन के मुख्य उद्देश्य में भी यह लगा हुआ था। सबसे खास बात है कि इसने खुद को पिछले चार साल से अलीगढ़ में परिवार सहित छिपा रखा था, मगर खुद के जरिये व सोशल मीडिया के जरिये खुद को दिल्ली में रहना बताता था। एजेंसियों के निर्देश पर एसटीएफ रात डेढ़ बजे के बाद तहरीर दी है, जिसके आधार पर थाना पुलिस मुकदमा आदि की औपचारिकताओं में जुटी थी।
विज्ञापन

गुजरात और दक्षिण भारत में लंबे समय रहा
एजेंसियों की पूछताछ में उसने खुद लंबे समय तक गुजरात में रहकर नेटवर्क खड़ा करने व दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में रहकर संगठन के लिए काम करना स्वीकारा है। उसका मूल काम सदस्य जोड़ना व चंदा जोड़ना रहा है। चूंकि, बलरामपुर में उस पर व उसकी गतिविधियों पर लोगों की नजर थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसलिए यहां किराये के मकान में छिपकर रह रहा था। लोगों को अपने विषय में दिल्ली में रहना बता रखा था। घर के खर्च के लिए संगठन से वेतन मिलता था। बाकी कहीं भी आने जाने से लेकर रहने खाने व संगठन की बैठक आदि के लिए भी खर्च मिलता था। सात दिन पहले भी उसने बहराइच में संगठन के लिए कार्यकर्ता सम्मेलन किया।
हर जगह युवाओं को जोड़ना विशेष मकसद था। सरकार, संघ व भाजपा के खिलाफ उन्हें भड़काकर संगठन के लिए काम करना सिखाया जाता था। यह संगठन का बेहद महत्वपूर्ण किरदार माना गया है। इसके जरिए देश के यूपी के अलावा सभी 35 राज्यों में 35 नए युवा लीडर खड़ा करना भी संगठन की तैयारी में था। इस दिशा में अभी से निजामुद्दीन ने काम करना शुरू कर रखा था।
शाम को पत्नी-बच्चों को लगी भनक, पहुंचे थाने
सोमवार को आधी रात के बाद निजामुद्दीन को हिरासत में लिया गया। उस समय तक परिवार को यह पता था कि उसे साथ कहीं बाहर ले जाया गया है। मगर मंगलवार देर शाम यह जानकारी हो सकी कि अलीगढ़ में ही किसी गुप्त स्थान पर पूछताछ हो रही है। इस पर पत्नी व बेटियां थाने पहुंचीं। मगर देर रात समाचार लिखे जाने तक निजामुद्दीन को थाने नहीं लाया गया था।
ये भी खास बातें
- 35 राज्यों में संगठन के लिए 35 लीडर खड़े करने का मिला था इसे लक्ष्य
- पूर्वी यूपी वर्तमान में कार्यक्षेत्र, गुजरात व दक्षिण भारत में भी किया है काम
- अपने संपर्क के सहारे अन्य राज्यों में फैला रहा था लगातार यह पूरा नेटवर्क
- 27 हजार वेतन के अलावा टीए/डीए और मीटिंग खर्च अलग से मिलता था
ये भी हैं आरोप
- अनुसूचित जाति, सिखों, अल्पसंख्यक युवाओं व गरीबों को सरकार, भाजपा-संघ के खिलाफ भड़काना
- जो लोग बहकावे में आएं उन्हें फिर अपने संगठन से जोड़कर सरकार के खिलाफ काम कराना
बसपा से शुरू है निजामुद्दीन का सियासी सफर
एजेंसियों की पूछताछ के अनुसार, निजामुद्दीन सबसे पहले 1988 में बसपा से जुड़ा। फिर पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. मसूद संग 1995 से 2007 तक रहा। उनके साथ अलग पार्टी भी बनाई। फिर राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल से जुड़ा और 2013 से 2016 तक उलेमा काउंसिल के प्रदेशाध्यक्ष रहा। 2016 में पीएफआई और उससे समर्थित एसडीपीआई से जुड़ा। पहले पार्टी का राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर, फिर 2018 में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और 2021 से पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष है।
एएमयू सिटी हाईस्कूल से की थी 80 के दशक में पढ़ाई
खुद निजामुद्दीन ने अपनी फेसबुक आईडी पर यह तथ्य उल्लेखित कर रखा है, जिसमें 80 के दशक में एएमयू के सिटी हाईस्कूल से पढ़ाई करना बताया है। साथ ही, उस समय के शिक्षकों व साथी छात्रों को आज भी याद करता है। यह भी उस कंटेंट में उल्लेखित है कि स्कूल का वो क्या दौर था।

तो सीएए-एनआरसी विरोधी उपद्रव के दौरान अलीगढ़ में था निजामुद्दीन
दिसंबर 2019 में सीएए-एनआरसी विरोधी उपद्रव एएमयू, जमालपुर, जीवनगढ़, शाहजमाल आदि इलाकों में हुआ तो उस समय पीएफआई से फंडिंग और भड़काए जाने के इनपुट मिले थे। उस समय पीएफआई के कुछ सदस्यों को इनपुट के आधार पर अलीगढ़ से आगरा व फिरोजाबाद में भागकर छिपने पर तलाशा था। मगर वे मिल नहीं सके थे। अब चूंकि पूछताछ में यह उजागर हुआ है कि वह पिछले करीब 3-4 वर्ष से अलीगढ़ में है। इससे साफ है कि उस समय भी वह यहां था और उसने उन गतिविधियों में भाग लिया होगा। इन सवालों का जवाब भी एजेंसी पूछताछ के आधार पर तलाश रही है।
ये हुआ बरामद:-इस्लामिक रिसर्च से जुड़ा साहित्य, आपत्तिजनक डेटा, उर्दू का कुछ साहित्य आदि।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed