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अलीगढ़ : धूमधाम से निकली निताई-गौर रथयात्रा, संकीर्तन में झूमे श्रद्धालु
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एसएमबी इंटर कॉलेज से श्री श्री गौर निताई रथयात्रा में मुख्य डोले के आगे झूमते श्रद्धालु।
- फोटो : CITY OFFICE
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हरदुआगंज स्थित इस्कॉन मंदिर की ओर से रविवार को वृंदावन से आए क्रतु दास अधिकारी के सानिध्य में धूमधाम से निताई-गौर रथयात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने नाचते गाते रथयात्रा में प्रतिभाग किया। रथ को खींचने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ रही। महाजन होटल से रथयात्रा का शुभारंभ कोल विधायक अनिल पाराशर, पूर्व विधायक संजीव राजा, एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह, मानव महाजन, उमेश उप्पल, संजय शर्मा, मनोज शैली आदि ने पूजा अर्चना कर किया।
रविवार शाम चार बजे सैकड़ों श्रद्धालु हरि नाम संकीर्तन करते हुए रथयात्रा के साथ चल रहे थे। महिलाओं की विभिन्न टोलियां मृदंग की थाप और झांझ मंजीरे की झनकार पर नृत्य कर रही थीं। रथयात्रा को देखने के लिए शहरवासियों ने टकटकी लगाए रखी। पुरुषों की टोलियां भी भजन संकीर्तन करते हुए आगे बढ़ रही थीं। जगह जगह लोगों ने स्वागत सम्मान किया। लोगों ने फूलों की बारिश भी की। देर रात लगभग दस बजे तक यह रथयात्रा बृज वाटिका में पहुंचकर संपन्न हुई। जहां सभी श्रद्धालुओं को प्रसादी ग्रहण कराई गई। डोले के साथ प्रमुख रूप से इस्कॉन प्रेसीडेंट रसराज दास प्रभुजी और पीआरओ अच्युत केशव दास चल रहे थे। इस मौके पर वीरेंद्र सिंह चौहान, पंकज महलवार, गगन पब्लिक स्कूल के एमएल शर्मा, राजेश यादव ने भी प्रमुख रूप से प्रतिभाग किया।
निताई-गौर यात्रा की परंपरा एक दशक पुरानी
अलीगढ़। हरदुआगंज इस्कॉन मंदिर द्वारा रविवार को निकाई गई निताई-गौर यात्रा की परंपरा एक दशक पुरानी है। 2011 में जगन्नाथ रथयात्रा की नींव डाली गई थी, जो विभिन्न कारणों के चलते 2022 में आकर निताई-गौर यात्रा में तब्दील हो गई है। कोरोना काल के चलते दो साल से इसका आयोजन नहीं हो पा रहा था। इस्कॉन पीआरओ अच्युत केशव दास ने बताया कि 2011 में जगन्नाथ रथयात्रा के रूप में इस आयोजन की नींव पड़ी थी। हर साल अप्रैल के पहले सप्ताह में इसका आयोजन होता था। 2020 में कोरोना आने के चलते लगातार दो साल तक इसका आयोजन नहीं किया गया। चूंकि पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर की रथयात्रा जुलाई में तिथियों के हिसाब से निकाली जाती है। आयोजकों ने देश में विभिन्न तिथियों में निकलने वाली जगन्नाथ रथयात्रायों का संज्ञान लिया। इसके बाद इस्कॉन से एक ही दिन जगन्नाथ रथयात्रा निकालने का अनुरोध किया। अनुरोध स्वीकार कर जगन्नाथ रथ यात्रा की बजाय निताई-गौर रथयात्रा निकाली गई है। आने वाले समय में जगन्नाथ रथ यात्रा अप्रैल में नहीं निकलेगी।
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रविवार शाम चार बजे सैकड़ों श्रद्धालु हरि नाम संकीर्तन करते हुए रथयात्रा के साथ चल रहे थे। महिलाओं की विभिन्न टोलियां मृदंग की थाप और झांझ मंजीरे की झनकार पर नृत्य कर रही थीं। रथयात्रा को देखने के लिए शहरवासियों ने टकटकी लगाए रखी। पुरुषों की टोलियां भी भजन संकीर्तन करते हुए आगे बढ़ रही थीं। जगह जगह लोगों ने स्वागत सम्मान किया। लोगों ने फूलों की बारिश भी की। देर रात लगभग दस बजे तक यह रथयात्रा बृज वाटिका में पहुंचकर संपन्न हुई। जहां सभी श्रद्धालुओं को प्रसादी ग्रहण कराई गई। डोले के साथ प्रमुख रूप से इस्कॉन प्रेसीडेंट रसराज दास प्रभुजी और पीआरओ अच्युत केशव दास चल रहे थे। इस मौके पर वीरेंद्र सिंह चौहान, पंकज महलवार, गगन पब्लिक स्कूल के एमएल शर्मा, राजेश यादव ने भी प्रमुख रूप से प्रतिभाग किया।
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निताई-गौर यात्रा की परंपरा एक दशक पुरानी
अलीगढ़। हरदुआगंज इस्कॉन मंदिर द्वारा रविवार को निकाई गई निताई-गौर यात्रा की परंपरा एक दशक पुरानी है। 2011 में जगन्नाथ रथयात्रा की नींव डाली गई थी, जो विभिन्न कारणों के चलते 2022 में आकर निताई-गौर यात्रा में तब्दील हो गई है। कोरोना काल के चलते दो साल से इसका आयोजन नहीं हो पा रहा था। इस्कॉन पीआरओ अच्युत केशव दास ने बताया कि 2011 में जगन्नाथ रथयात्रा के रूप में इस आयोजन की नींव पड़ी थी। हर साल अप्रैल के पहले सप्ताह में इसका आयोजन होता था। 2020 में कोरोना आने के चलते लगातार दो साल तक इसका आयोजन नहीं किया गया। चूंकि पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर की रथयात्रा जुलाई में तिथियों के हिसाब से निकाली जाती है। आयोजकों ने देश में विभिन्न तिथियों में निकलने वाली जगन्नाथ रथयात्रायों का संज्ञान लिया। इसके बाद इस्कॉन से एक ही दिन जगन्नाथ रथयात्रा निकालने का अनुरोध किया। अनुरोध स्वीकार कर जगन्नाथ रथ यात्रा की बजाय निताई-गौर रथयात्रा निकाली गई है। आने वाले समय में जगन्नाथ रथ यात्रा अप्रैल में नहीं निकलेगी।
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