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नाइजीरियाई गैंग ने गभाना के शिक्षक से ठगे 9.68 लाख, एक गिरफ्तार, 2018 से टूरिस्ट वीजा पर रह रहा था दिल्ली में
Sat, 06 Feb 2021 12:21 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Feb 2021 12:21 AM IST
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नाइजीरियन युवक पुलिस की गिरफ्तर में।
- फोटो : अमर उजाला
गभाना थाना क्षेत्र के ख्यामई गांव के एक निजी शिक्षक के साथ हुई 9.68 लाख की ठगी का पुलिस ने खुलासा करते हुए एक शातिर नाइजीरियन को गिरफ्तार किया है। वह 2018 से दिल्ली में टूरिस्ट वीजा पर रह रहा था। वहीं से ठगी का गैंग आपरेट करता है। उसके पास से वीजा-पासपोर्ट सहित तीन मोबाइल फोन व कुछ कागजात मिले है। जिन बैंक खातों में निजी शिक्षक से पैसा डलवाया गया था वह गाजियाबाद, जौनपुर, प्रयागराज व कोलकाता में खुलवाए गए थे। पुलिस ने इन सभी खातों की डिटेल संबंधित बैंकों से मांगी है।
एसपी देहात शुभम पटेल ने बताया कि गभाना थाना क्षेत्र के गांव ख्यामई के एक निजी शिक्षक ने पांच दिसंबर को मुकदमा दर्ज कराया था। उसने बताया था कि उसकी दोस्ती फरवरी 2020 में एमिलिया एमशा नाम की महिला से फेसबुक पर हुई। महिला ने खुद को अमेरिकी बताया। इसके बाद दोनों के व्हाट्सएप नंबर का आदान-प्रदान हुआ।
बातचीत में महिला को घर की स्थिति के बारे में बताया। इस पर उसने आश्वासन दिया कि वह उसकी मदद के लिए अमेरिका से डॉलर और सोना भेज रही है। एक दिन एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली एयरपोर्ट पर तैनात कस्टम अधिकारी बताया और अमेरिका से सोना, डॉलर, मंहगे फोन का पार्सल आने की बात कही। उसने पार्सल की फीस स्वरूप पहले 35500 फिर 62 हजार और फिर 1.46 लाख रुपये खाते में डलवा लिए।
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अगले दिन फिर से फोन करके सात लाख रुपये की मांग की और बताया कि इसमें से 50 प्रतिशत राशि वापस हो जाएगी। इतने पैसे का इंतजाम जैसे-तैसे लोगों से उधार लेकर किया और उसके खाते में रकम भेज दी। इस प्रक्रिया के दौरान रोहित नाम का एक अन्य युवक फोन पर संपर्क में रहा और खुद को अमेरिका में तैनात भारतीय कस्टम अधिकारी बताकर पैसा भेजकर पार्सल लेने की बात कहता रहा व एक अन्य व्यक्ति खुद का रतनदास नाम बताते हुए फोन पर डिलीवरी बॉय बनकर संपर्क करता रहा। करीब 9.68 लाख रुपये भेजने के बाद भी इन लोगों ने 5 लाख रुपये अतिरिक्त मांगे तब जाकर इन पर शक हुआ। विरोध करने पर पुलिस केस लिखाने की धमकी दी गई।
इस मामले में निजी शिक्षक द्वारा गभाना थाने में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने दिए गए बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के आधार पर ठगों की तलाश शुरू की। शुक्रवार को उनमें से एक नंबर की लोकेशन सर्विलांस सेल की टीम ने गभाना के मेहरावल थाने के पास पाई। इसके आधार पर थाने की टीम ने आरोपी को दबोचा। उसकी पहचान जैकब पुत्र ओक्यूजी निवासी ओलीगी, ईगबैंक के तौर पर हुई है। उसे सुसंगत धाराओं में पाबंद करते हुए जेल भेज दिया है। इस खेल में उन्होंने कई दर्जन लोगों को फंसाकर करोड़ों रुपये की अब तक ठगी की है। पुलिस अब नाइजीरियन आरोपी जैकब पुत्र ओक्यूजी निवासी ओलीगी, ईगबैंक की साथी महिला व गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश में लगी है।
दिल्ली से पूरे भारत में आपरेट होता है गैंग
पुलिस ने बताया कि पूछताछ में आरोपी जैकब पुत्र ओक्यूजी निवासी ओलीगी, ईगबैंक, नाइजीरिया ने बताया कि वह 2018 में भारत में टूरिस्ट वीजा पर आया था। यहां आने के बाद लगातार वीजा को बढ़वाता रहा। उसके साथ गैंग में एक महिला है। फिलहाल उसने अन्य सदस्यों के विषय में कोई ठोस जानकारी नहीं दी है। आरोपी का पोसपोर्ट-वीजा जब्त कर लिया है। मामला दो देशों का होने के चलते उसकी वीजा रिपोर्ट गृह मंत्रालय भेजी जा रही है। विदेश मंत्रालय को भी अवगत कराया जा रहा है। इसके साथ नाइजीरिया दूतावास को भी जानकारी भेजी जा रही है।
अगले माह होने वाला था फरार, हाथ मलती रह जाती पुलिस
आरोपी जैकब का वीजा 9 मार्च 2021 तक वैध है। पुलिस ने बताया कि वह इसके बाद नाइजीरिया चला जाता। अगर, ऐसा होता तो पुलिस इस ठगी के सरगना को कभी न पकड़ पाती।
गिरफ्तारी करने वाली टीम
इंस्पेक्टर सुबोध कुमार, एसआई मोनवीर, अनुज कुमार, कांस्टेबल प्रवीण कुमार, पुष्पेंद्र सिंह, तरुण गौड़, धमेंद्र सिंह गिरफ्तारी टीम में शामिल रहे।
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एसपी देहात शुभम पटेल ने बताया कि गभाना थाना क्षेत्र के गांव ख्यामई के एक निजी शिक्षक ने पांच दिसंबर को मुकदमा दर्ज कराया था। उसने बताया था कि उसकी दोस्ती फरवरी 2020 में एमिलिया एमशा नाम की महिला से फेसबुक पर हुई। महिला ने खुद को अमेरिकी बताया। इसके बाद दोनों के व्हाट्सएप नंबर का आदान-प्रदान हुआ।
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बातचीत में महिला को घर की स्थिति के बारे में बताया। इस पर उसने आश्वासन दिया कि वह उसकी मदद के लिए अमेरिका से डॉलर और सोना भेज रही है। एक दिन एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली एयरपोर्ट पर तैनात कस्टम अधिकारी बताया और अमेरिका से सोना, डॉलर, मंहगे फोन का पार्सल आने की बात कही। उसने पार्सल की फीस स्वरूप पहले 35500 फिर 62 हजार और फिर 1.46 लाख रुपये खाते में डलवा लिए।
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अगले दिन फिर से फोन करके सात लाख रुपये की मांग की और बताया कि इसमें से 50 प्रतिशत राशि वापस हो जाएगी। इतने पैसे का इंतजाम जैसे-तैसे लोगों से उधार लेकर किया और उसके खाते में रकम भेज दी। इस प्रक्रिया के दौरान रोहित नाम का एक अन्य युवक फोन पर संपर्क में रहा और खुद को अमेरिका में तैनात भारतीय कस्टम अधिकारी बताकर पैसा भेजकर पार्सल लेने की बात कहता रहा व एक अन्य व्यक्ति खुद का रतनदास नाम बताते हुए फोन पर डिलीवरी बॉय बनकर संपर्क करता रहा। करीब 9.68 लाख रुपये भेजने के बाद भी इन लोगों ने 5 लाख रुपये अतिरिक्त मांगे तब जाकर इन पर शक हुआ। विरोध करने पर पुलिस केस लिखाने की धमकी दी गई।
इस मामले में निजी शिक्षक द्वारा गभाना थाने में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने दिए गए बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के आधार पर ठगों की तलाश शुरू की। शुक्रवार को उनमें से एक नंबर की लोकेशन सर्विलांस सेल की टीम ने गभाना के मेहरावल थाने के पास पाई। इसके आधार पर थाने की टीम ने आरोपी को दबोचा। उसकी पहचान जैकब पुत्र ओक्यूजी निवासी ओलीगी, ईगबैंक के तौर पर हुई है। उसे सुसंगत धाराओं में पाबंद करते हुए जेल भेज दिया है। इस खेल में उन्होंने कई दर्जन लोगों को फंसाकर करोड़ों रुपये की अब तक ठगी की है। पुलिस अब नाइजीरियन आरोपी जैकब पुत्र ओक्यूजी निवासी ओलीगी, ईगबैंक की साथी महिला व गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश में लगी है।
दिल्ली से पूरे भारत में आपरेट होता है गैंग
पुलिस ने बताया कि पूछताछ में आरोपी जैकब पुत्र ओक्यूजी निवासी ओलीगी, ईगबैंक, नाइजीरिया ने बताया कि वह 2018 में भारत में टूरिस्ट वीजा पर आया था। यहां आने के बाद लगातार वीजा को बढ़वाता रहा। उसके साथ गैंग में एक महिला है। फिलहाल उसने अन्य सदस्यों के विषय में कोई ठोस जानकारी नहीं दी है। आरोपी का पोसपोर्ट-वीजा जब्त कर लिया है। मामला दो देशों का होने के चलते उसकी वीजा रिपोर्ट गृह मंत्रालय भेजी जा रही है। विदेश मंत्रालय को भी अवगत कराया जा रहा है। इसके साथ नाइजीरिया दूतावास को भी जानकारी भेजी जा रही है।
अगले माह होने वाला था फरार, हाथ मलती रह जाती पुलिस
आरोपी जैकब का वीजा 9 मार्च 2021 तक वैध है। पुलिस ने बताया कि वह इसके बाद नाइजीरिया चला जाता। अगर, ऐसा होता तो पुलिस इस ठगी के सरगना को कभी न पकड़ पाती।
गिरफ्तारी करने वाली टीम
इंस्पेक्टर सुबोध कुमार, एसआई मोनवीर, अनुज कुमार, कांस्टेबल प्रवीण कुमार, पुष्पेंद्र सिंह, तरुण गौड़, धमेंद्र सिंह गिरफ्तारी टीम में शामिल रहे।