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2021 की सौगात... हरदुआगंज पावर हाउस का उत्पादन होगा दोगुना
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हरदुआगंज तापीय परियोजना की 660 मेगावॉट की नवनिर्मित इकाई।
- फोटो : CITY OFFICE
आशीष निगम, अलीगढ़।
दोगुना उत्पादन
वर्तमान में 250-250 मेगावाट की दो यूनिटें चालू हैं, जिनसे 500 मेगावाट का उत्पादन
नई 660 मेगावाट की यूनिट चालू होने के बाद कुल उत्पादन 1160 मेगावाट पहुंच जाएगा
तथ्य
1-हकीकत में 16वीं और नंबर में दसवीं है नई 660 मेगावाट की यूनिट
2-5500 करोड़ रुपये की लागत से 60 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बनी है नई यूनिट
3- सुपर क्रिटिकल ब्यालर में कोयले की खपत पांच फीसदी कम, प्रदूषण भी कम
4- बिहार झारखंड से आता है कोयला और अपर गंगा नहर से प्लांट में आता है पानी
5- यहां पानी का सदुपयोग करते हुए उसे कई बार प्रयोग में लाया जाता है, रिर्जव टैंक बनाया
6- वर्ष 2015 दिसंबर में अखिलेश यादव सरकार में शुरू हुआ था निर्माण कार्य, पांच साल हुए
7- प्रदेश में सबसे कम ऊर्जा खपत करने का इनाम हरदुआगंज तापीय परियोजना के नाम
8- ऊर्जा संरक्षण के लिए पेट स्कीम के तहत 7.40 करोड़ रुपये बचत के रूप में हासिल किए
9- प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से लगभग पांच हजार से अधिक लोग परियोजना में कार्यरत
10- जेके सुपर, बिरला उत्तम, मंगलम सीमेंट फैक्टरी कोयले की राख पर निर्भर
हरदुआगंज तापीय परियोजना कासिमपुर में नवनिर्मित 660 मेगावाट में बिजली उत्पादन की टेस्टिंग (सिंक्रोनाइजेशन) फरवरी में होगा। इस प्रक्रिया में बिजली उत्पादन कर ग्रिड में भेजे जाने का परीक्षण होगा। सब कुछ ठीक रहा तो अप्रैल से ये प्लांट उत्पादन शुरू कर देगा। वर्तमान में यहां पर सभी काम युद्धस्तर पर पूरे किए जा रहे हैं। 60 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बने इस नये प्लांट में निर्माण का कार्य 90 फीसदी पूरा हो चुका है। मशीनों जेनरेटरों की टेस्टिंग कर सेट किया जा रहा है।
नया प्लांट सुपर क्रिटिकल ब्यालर पर आधारित है, जिसमें ब्यालर ड्रम नहीं हैं। जापानी कंपनी तोशीबा इसका निर्माण कर रही है। इसकी लागत लगभग 5500 करोड़ रुपये है। ये प्लांट कोयला जला कर उससे पानी को गरम करता है। खौलते पानी से बनी भाप भारीभरकम टरबाइन को घुमाती हैं। टरबाइन हैवी ड्यूटी जनरेटर को चलाती हैं, जिससे बिजली बनती है। यहां पहले से चालू 250-250 मेगावाट की दो यूनिटों में उत्पादन जारी है। इस तरह से नये साल में परियोजना से 1160 मेगावाट का उत्पादन होने लगेगा। यहां बनने वाली बिजली नार्दन ग्रिड को भेजी जाती है।
हकीकत में 16वीं और नंबर में दसवीं है नई यूनिट
अंग्रेजों के जमाने में जब दिल्ली में बिजली की खपत बढ़ने लगी तो उस वक्त यहां बिजली उत्पादन की जरूरत महसूस हुई। वर्ष 1944 में यहां हरदुआगंज तापीय परियोजना कासिमपुर बनाई गई। शुरूआत में यहां दस दस मेगावाट की तीन इकाइयां बनीं। उसके बाद तीस-तीस मेगावाट की तीन इकाइयां स्थापित हुईं। शुरुआती दौर में इन यूनिटों का नंबर रोमन भाषा में होता था। यूनिटें अपना जीवन पूरा करने के बाद पुरानी होती गईं।
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वर्ष 1962 से 1978 के बीच यहां कई नई इकाइयां स्थापित कर बिजली उत्पादन को बढ़ाया गया क्योंकि उस वक्त तक बिजली की खपत और बढ़ चुकी थी। इसी क्रम में एक और दो नंबर की 50-50 मेगावाट की दो यूनिटें लगीं। इसके बाद 55-55 मेगावाट की दो यूनिटें तीन और चार नंबर से लगीं। इसके बाद 60-60 मेगावाट की दो यूनिटें पांच और छह नंबर से लगीं। वर्ष 1977-78 में 105 मेगावाट की सातवीं यूनिट लगाई गई। 250 मेगावाट की आठ और नौ नंबर की दो यूनिट बनी। अब 660 मेगावाट की नई यूनिट को दसवां नंबर दिया गया है।
दस दस मंजिला टॉवर में रह रहा स्टॉफ
तापीय परियोजना की नई कालोनी के बीचोंबीच ही अब गगनचुंभी इमारतें नजर आने लगी हैं। यहां दस दस मंजिला इमारतें बनी हैं। जिसमें परियोजना के कर्मी रह रहे हैं। इन टॉवरों में अलग अलग श्रेणी के फ्लैट बनाए गए हैं। कुछ टावरों का निर्माण जारी है, कुछ में रहना शुरू हो गया है।
1-टाइप 4 के दस मंजिला तीन टावर में एक फ्लोर में चार फ्लैट, कुल 120 फ्लैट
2-टाइप 5 के पांच मंजिला टावर में एक फ्लोर में दो फ्लैट, कुल दस फ्लैट
3-टाइप 3 के दो दस मंजिला और एक छह मंजिला तीन टावरों में कुल 104 फ्लैट
4-टाइप 2 के दस मंजिला दो टावरों में एक फ्लोर में छह फ्लैट, कुल 120 फ्लैट
तेजी से बढ़ रही हैं सीमेंट फैक्ट्रियां
कासिमपुर परियोजना में कोयला जलने के बाद उसकी राख बच जाती है। इस राख का प्रयोग कर अलग अलग कंपनियां नामीगिरामी सीमेंट बना रही हैं। परियोजना के पास ही जेके सुपर सीमेंट, बिरला उत्तम और मंगलम सीमेंट का उत्पादन हो रहा है। निकट भविष्य में यहां पर दो और सीमेंट कारखाने खोले जाने की तैयारी है। इस तरह से अलीगढ़ में बनने वाली सीमेंट एनसीआर तक भेजी जा रही है।
- 660 मेगावाट की नई यूनिट लगभग पूरी होने वाली है। फरवरी में यहां टेस्टिंग यानी सिंक्रोंनाइजेशन ( बिजली उत्पादन कर ग्रिड में भेजने की प्रक्रिया का प्रयोग) होगा और अप्रैल तक उत्पादन शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही स्टाफ कर्मियों के लिए कई मंजिला इमारतें भी बन रही हैं। कुछ में रहना शुरू हो चुका है। नया प्लांट उसी जगह पर है जहां पहले की 30-30 मेगावाट की यूनिट और पुरानी कालोनी बसी थी। इन सबको तोड़ कर नया प्लांट बनाया गया है। परियोजना को ऊर्जा संरक्षण में लगभग 7.40 करोड़ रुपये के इनाम मिले हैं। कोरपोरेट रेस्पांसबिलिटी के तहत कई गांवों में लगातार विकास कार्य कराए जा रहे हैं। - रविंद्र कुमार वाही, मुख्य महाप्रबंधक हरदुआगंज तापीय परियोजना कासिमपुर।
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दोगुना उत्पादन
वर्तमान में 250-250 मेगावाट की दो यूनिटें चालू हैं, जिनसे 500 मेगावाट का उत्पादन
नई 660 मेगावाट की यूनिट चालू होने के बाद कुल उत्पादन 1160 मेगावाट पहुंच जाएगा
तथ्य
1-हकीकत में 16वीं और नंबर में दसवीं है नई 660 मेगावाट की यूनिट
2-5500 करोड़ रुपये की लागत से 60 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बनी है नई यूनिट
3- सुपर क्रिटिकल ब्यालर में कोयले की खपत पांच फीसदी कम, प्रदूषण भी कम
4- बिहार झारखंड से आता है कोयला और अपर गंगा नहर से प्लांट में आता है पानी
5- यहां पानी का सदुपयोग करते हुए उसे कई बार प्रयोग में लाया जाता है, रिर्जव टैंक बनाया
6- वर्ष 2015 दिसंबर में अखिलेश यादव सरकार में शुरू हुआ था निर्माण कार्य, पांच साल हुए
7- प्रदेश में सबसे कम ऊर्जा खपत करने का इनाम हरदुआगंज तापीय परियोजना के नाम
8- ऊर्जा संरक्षण के लिए पेट स्कीम के तहत 7.40 करोड़ रुपये बचत के रूप में हासिल किए
9- प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से लगभग पांच हजार से अधिक लोग परियोजना में कार्यरत
10- जेके सुपर, बिरला उत्तम, मंगलम सीमेंट फैक्टरी कोयले की राख पर निर्भर
हरदुआगंज तापीय परियोजना कासिमपुर में नवनिर्मित 660 मेगावाट में बिजली उत्पादन की टेस्टिंग (सिंक्रोनाइजेशन) फरवरी में होगा। इस प्रक्रिया में बिजली उत्पादन कर ग्रिड में भेजे जाने का परीक्षण होगा। सब कुछ ठीक रहा तो अप्रैल से ये प्लांट उत्पादन शुरू कर देगा। वर्तमान में यहां पर सभी काम युद्धस्तर पर पूरे किए जा रहे हैं। 60 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बने इस नये प्लांट में निर्माण का कार्य 90 फीसदी पूरा हो चुका है। मशीनों जेनरेटरों की टेस्टिंग कर सेट किया जा रहा है।
नया प्लांट सुपर क्रिटिकल ब्यालर पर आधारित है, जिसमें ब्यालर ड्रम नहीं हैं। जापानी कंपनी तोशीबा इसका निर्माण कर रही है। इसकी लागत लगभग 5500 करोड़ रुपये है। ये प्लांट कोयला जला कर उससे पानी को गरम करता है। खौलते पानी से बनी भाप भारीभरकम टरबाइन को घुमाती हैं। टरबाइन हैवी ड्यूटी जनरेटर को चलाती हैं, जिससे बिजली बनती है। यहां पहले से चालू 250-250 मेगावाट की दो यूनिटों में उत्पादन जारी है। इस तरह से नये साल में परियोजना से 1160 मेगावाट का उत्पादन होने लगेगा। यहां बनने वाली बिजली नार्दन ग्रिड को भेजी जाती है।
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हकीकत में 16वीं और नंबर में दसवीं है नई यूनिट
अंग्रेजों के जमाने में जब दिल्ली में बिजली की खपत बढ़ने लगी तो उस वक्त यहां बिजली उत्पादन की जरूरत महसूस हुई। वर्ष 1944 में यहां हरदुआगंज तापीय परियोजना कासिमपुर बनाई गई। शुरूआत में यहां दस दस मेगावाट की तीन इकाइयां बनीं। उसके बाद तीस-तीस मेगावाट की तीन इकाइयां स्थापित हुईं। शुरुआती दौर में इन यूनिटों का नंबर रोमन भाषा में होता था। यूनिटें अपना जीवन पूरा करने के बाद पुरानी होती गईं।
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वर्ष 1962 से 1978 के बीच यहां कई नई इकाइयां स्थापित कर बिजली उत्पादन को बढ़ाया गया क्योंकि उस वक्त तक बिजली की खपत और बढ़ चुकी थी। इसी क्रम में एक और दो नंबर की 50-50 मेगावाट की दो यूनिटें लगीं। इसके बाद 55-55 मेगावाट की दो यूनिटें तीन और चार नंबर से लगीं। इसके बाद 60-60 मेगावाट की दो यूनिटें पांच और छह नंबर से लगीं। वर्ष 1977-78 में 105 मेगावाट की सातवीं यूनिट लगाई गई। 250 मेगावाट की आठ और नौ नंबर की दो यूनिट बनी। अब 660 मेगावाट की नई यूनिट को दसवां नंबर दिया गया है।
दस दस मंजिला टॉवर में रह रहा स्टॉफ
तापीय परियोजना की नई कालोनी के बीचोंबीच ही अब गगनचुंभी इमारतें नजर आने लगी हैं। यहां दस दस मंजिला इमारतें बनी हैं। जिसमें परियोजना के कर्मी रह रहे हैं। इन टॉवरों में अलग अलग श्रेणी के फ्लैट बनाए गए हैं। कुछ टावरों का निर्माण जारी है, कुछ में रहना शुरू हो गया है।
1-टाइप 4 के दस मंजिला तीन टावर में एक फ्लोर में चार फ्लैट, कुल 120 फ्लैट
2-टाइप 5 के पांच मंजिला टावर में एक फ्लोर में दो फ्लैट, कुल दस फ्लैट
3-टाइप 3 के दो दस मंजिला और एक छह मंजिला तीन टावरों में कुल 104 फ्लैट
4-टाइप 2 के दस मंजिला दो टावरों में एक फ्लोर में छह फ्लैट, कुल 120 फ्लैट
तेजी से बढ़ रही हैं सीमेंट फैक्ट्रियां
कासिमपुर परियोजना में कोयला जलने के बाद उसकी राख बच जाती है। इस राख का प्रयोग कर अलग अलग कंपनियां नामीगिरामी सीमेंट बना रही हैं। परियोजना के पास ही जेके सुपर सीमेंट, बिरला उत्तम और मंगलम सीमेंट का उत्पादन हो रहा है। निकट भविष्य में यहां पर दो और सीमेंट कारखाने खोले जाने की तैयारी है। इस तरह से अलीगढ़ में बनने वाली सीमेंट एनसीआर तक भेजी जा रही है।
- 660 मेगावाट की नई यूनिट लगभग पूरी होने वाली है। फरवरी में यहां टेस्टिंग यानी सिंक्रोंनाइजेशन ( बिजली उत्पादन कर ग्रिड में भेजने की प्रक्रिया का प्रयोग) होगा और अप्रैल तक उत्पादन शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही स्टाफ कर्मियों के लिए कई मंजिला इमारतें भी बन रही हैं। कुछ में रहना शुरू हो चुका है। नया प्लांट उसी जगह पर है जहां पहले की 30-30 मेगावाट की यूनिट और पुरानी कालोनी बसी थी। इन सबको तोड़ कर नया प्लांट बनाया गया है। परियोजना को ऊर्जा संरक्षण में लगभग 7.40 करोड़ रुपये के इनाम मिले हैं। कोरपोरेट रेस्पांसबिलिटी के तहत कई गांवों में लगातार विकास कार्य कराए जा रहे हैं। - रविंद्र कुमार वाही, मुख्य महाप्रबंधक हरदुआगंज तापीय परियोजना कासिमपुर।