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निगरानी समितियों की हुई निगरानी तो खुली लापरवाही की कहानी
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घर-घर सर्वे कर कोरोना के लक्षण वाले मरीजों, 50 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों और अस्थमा, बीपी या शुगर जैसी बीमारियों से ग्रस्त लोगों की निगरानी और उनका डाटा एकत्रित करने में लगाई गईं टीमें अपनी ही निगरानी में फेल हो गईं। डीएम के निर्देश पर जिला कोरोना कंट्रोल रूम की टीम ने इनसे फोन पर फॉलोअप लिया तो किसी आंगनबाड़ी को अपनी टीम के बारे में नहीं पता था तो किसी आशा को उनकी ड्यूटी के बारे में। कंट्रोल रूम प्रभारी स्मृति गौतम ने समीक्षा बैठक में जब यह बात रखी तो डीएम का पारा चढ् गया। उन्होंने सभी एसडीएम और सीएमओ सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारियों की क्लास ले ली।
जिले में तीन हजार टीमें हैं। इसमें गांव में आशा-आंगनबाड़ी, ग्राम चौकीदार, ग्राम प्रधान, राशन डीलर हैं। शहर में प्रधान के स्थान पर वार्ड मेंबर और ग्राम चौकीदार के स्थान पर नगर निगम के सफाई कर्मचारी हैं। जिला कोरोना कंट्रोल रूम द्वारा इनका फोन पर फॉलोअप लिया जा रहा है। स्मृित गौतम ने बताया कि खैर के गांव ऊटवारा की आंगनबाड़ी का नंबर बंद था। आशा का नंबर गलत था। तेहरा गांव में प्रधान, आशा आंगनबाड़ी के मोबाइल बंद थे। बिरौला की आशा ने बताया कि उसको नहीं पता की उसकी निगरानी समिति में ड्यूटी है। हालांकि बामनी, बलीपुर, मंगौला, नएला की निगरानी समितियों का काम अच्छा पाया गया है। लापरवाही पर डीएम ने नाराजगी जताई तथा निर्देश दिए कि घर-घर सर्वे का कार्य सही प्रकार से कराया जाए। दैनिक रिपोर्ट कंट्रोल रूम में उपलब्ध कराई जाए। कोविड-19 के समरूप लक्षण वाले जो लोग मिल रहे हैं, उनकी शासन द्वारा निर्धारित गाइड लाइन के अनुसार सैंपलिंग कराई जाए।
इधर, सीडीओ ने निर्देश दिए कि सोमवार को कोविड-19 से पॉजिटिव आए लोगों के संपर्क वालों की तलाश कर उनकी भी सैंपलिंग कराई जाए। साथ ही दीनदयाल चिकित्सालय में केवल हाई रिस्क मरीज ही भर्ती किए जाएं। अन्य को एल-1 अस्पताल जीवन ज्योति अस्पताल अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अतरौली में भर्ती किया जाए। डीएम चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही सहन नहीं की जाएगी।
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महाजन होटल क्वारंटीन सेंटर में तब्दील
कोरोना के हल्के लक्षण वाले मरीजों को अब स्वास्थ्य विभाग के कोविड एल-1 के साथ ही क्वारंटीन सेंटर में तब्दील किए गए होटल में रहने का विकल्प भी मिलेगा। अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय रंजीत सिंह ने बताया कि महाजन होटल मालिक ने कोविड-19 के हल्के लक्षण वाले मरीजों को भर्ती करने की अनुमति दे दी है। यहां 24 कमरे हैं। होटल में भर्ती मरीजों के लिए सरकारी डॉक्टर्स को केवल विजिट करना होगा। डाक्टर्स की स्थाई तैनाती नहीं की जाएगी। होटल में खुद को क्वारंटीन करने वाले मरीज को अपनी जेब से रहने और खाने का खर्च उठाना होगा। जिला प्रशासन स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से सिर्फ उनको चिकित्सकीय सेवा निशुल्क देगा।
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जिले में तीन हजार टीमें हैं। इसमें गांव में आशा-आंगनबाड़ी, ग्राम चौकीदार, ग्राम प्रधान, राशन डीलर हैं। शहर में प्रधान के स्थान पर वार्ड मेंबर और ग्राम चौकीदार के स्थान पर नगर निगम के सफाई कर्मचारी हैं। जिला कोरोना कंट्रोल रूम द्वारा इनका फोन पर फॉलोअप लिया जा रहा है। स्मृित गौतम ने बताया कि खैर के गांव ऊटवारा की आंगनबाड़ी का नंबर बंद था। आशा का नंबर गलत था। तेहरा गांव में प्रधान, आशा आंगनबाड़ी के मोबाइल बंद थे। बिरौला की आशा ने बताया कि उसको नहीं पता की उसकी निगरानी समिति में ड्यूटी है। हालांकि बामनी, बलीपुर, मंगौला, नएला की निगरानी समितियों का काम अच्छा पाया गया है। लापरवाही पर डीएम ने नाराजगी जताई तथा निर्देश दिए कि घर-घर सर्वे का कार्य सही प्रकार से कराया जाए। दैनिक रिपोर्ट कंट्रोल रूम में उपलब्ध कराई जाए। कोविड-19 के समरूप लक्षण वाले जो लोग मिल रहे हैं, उनकी शासन द्वारा निर्धारित गाइड लाइन के अनुसार सैंपलिंग कराई जाए।
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इधर, सीडीओ ने निर्देश दिए कि सोमवार को कोविड-19 से पॉजिटिव आए लोगों के संपर्क वालों की तलाश कर उनकी भी सैंपलिंग कराई जाए। साथ ही दीनदयाल चिकित्सालय में केवल हाई रिस्क मरीज ही भर्ती किए जाएं। अन्य को एल-1 अस्पताल जीवन ज्योति अस्पताल अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अतरौली में भर्ती किया जाए। डीएम चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही सहन नहीं की जाएगी।
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महाजन होटल क्वारंटीन सेंटर में तब्दील
कोरोना के हल्के लक्षण वाले मरीजों को अब स्वास्थ्य विभाग के कोविड एल-1 के साथ ही क्वारंटीन सेंटर में तब्दील किए गए होटल में रहने का विकल्प भी मिलेगा। अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय रंजीत सिंह ने बताया कि महाजन होटल मालिक ने कोविड-19 के हल्के लक्षण वाले मरीजों को भर्ती करने की अनुमति दे दी है। यहां 24 कमरे हैं। होटल में भर्ती मरीजों के लिए सरकारी डॉक्टर्स को केवल विजिट करना होगा। डाक्टर्स की स्थाई तैनाती नहीं की जाएगी। होटल में खुद को क्वारंटीन करने वाले मरीज को अपनी जेब से रहने और खाने का खर्च उठाना होगा। जिला प्रशासन स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से सिर्फ उनको चिकित्सकीय सेवा निशुल्क देगा।