{"_id":"6ac2c42075028befcb055dc8","slug":"naradas-pride-is-shattered-enactment-of-the-divine-play-depicting-the-birth-of-ravana-and-kumbhakarna-aligarh-news-c-2-gur1004-1082478-2026-10-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Aligarh News: नारद का अभिमान टूटा, रावण-कुंभकरण के जन्म की लीला का मंचन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Aligarh News: नारद का अभिमान टूटा, रावण-कुंभकरण के जन्म की लीला का मंचन
विज्ञापन
रामलीला में मंचन करते कलाकार।
- फोटो : samvad
जीटी रोड स्थित रामलीला भवन में श्री रामलीला महोत्सव में रविवार को नारद मोह, भगवान विष्णु द्वारा नारद का अभिमान नष्ट करने और रावण-कुंभकरण जन्म व दिग्विजय लीला का मंचन हुआ। श्री रामलीला गोशाला कमेटी के तत्वावधान में सर्वोदय गणेश रामलीला मंडल, मथुरा के कलाकारों ने प्रसंगों को जीवंत किया।
लीला की शुरुआत नारद मुनि की हिमालय में तपस्या से हुई। इंद्र ने तप भंग कराने के लिए कामदेव को भेजा, लेकिन वह सफल नहीं हुए। इससे नारद को अभिमान हो गया। भगवान विष्णु ने योगमाया से नगर रचकर नारद का अभिमान दूर किया। स्वयंवर में नारद को वानर रूप मिलने पर उनका क्रोध भड़क उठा। उन्होंने भगवान विष्णु को पत्नी वियोग में वन-वन भटकने का श्राप दिया। इसके बाद रावण, कुंभकरण और विभीषण की कठोर तपस्या का मंचन हुआ।
ब्रह्मा से वरदान मिलने के बाद रावण ने मंदोदरी से विवाह किया और लंका पर विजय प्राप्त की। मेघनाद को देवताओं पर विजय के लिए भेजा। राक्षसों के अत्याचार से व्याकुल धरती का दृश्य भी प्रभावी रहा। इससे पहले डॉ. अंजुला भार्गव, डॉ. राकेश भार्गव और महोत्सव अध्यक्ष विमल अग्रवाल ने भगवान राम का पूजन किया। इस दौरान समिति सचिव अरविंद अग्रवाल, कोषाध्यक्ष टीएन मित्तल, संयोजक अन्नू बीड़ी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
लीला की शुरुआत नारद मुनि की हिमालय में तपस्या से हुई। इंद्र ने तप भंग कराने के लिए कामदेव को भेजा, लेकिन वह सफल नहीं हुए। इससे नारद को अभिमान हो गया। भगवान विष्णु ने योगमाया से नगर रचकर नारद का अभिमान दूर किया। स्वयंवर में नारद को वानर रूप मिलने पर उनका क्रोध भड़क उठा। उन्होंने भगवान विष्णु को पत्नी वियोग में वन-वन भटकने का श्राप दिया। इसके बाद रावण, कुंभकरण और विभीषण की कठोर तपस्या का मंचन हुआ।
विज्ञापन
ब्रह्मा से वरदान मिलने के बाद रावण ने मंदोदरी से विवाह किया और लंका पर विजय प्राप्त की। मेघनाद को देवताओं पर विजय के लिए भेजा। राक्षसों के अत्याचार से व्याकुल धरती का दृश्य भी प्रभावी रहा। इससे पहले डॉ. अंजुला भार्गव, डॉ. राकेश भार्गव और महोत्सव अध्यक्ष विमल अग्रवाल ने भगवान राम का पूजन किया। इस दौरान समिति सचिव अरविंद अग्रवाल, कोषाध्यक्ष टीएन मित्तल, संयोजक अन्नू बीड़ी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन