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Aligarh News: पौधों के अर्क से बने नैनोकण पकड़ेंगे जानलेवा कार्बन मोनोऑक्साइड गैस

Mon, 15 Jun 2026 02:38 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jun 2026 02:38 AM IST
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Nanoparticles made from plant extracts will capture deadly carbon monoxide gas
एएमयू। - फोटो : Archive
सोचिए, एक ऐसी जहरीली गैस जो न दिखाई देती है, न उसकी कोई गंध होती है, लेकिन कुछ ही पलों में जान के लिए खतरा बन सकती है। अब इसी अदृश्य दुश्मन (कार्बन मोनोऑक्साइड गैस) से बचाने के लिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने प्रकृति की गोद से एक अनोखा समाधान खोज निकाला है। पौधों के अर्क से निकल ऑक्साइड के सूक्ष्म नैनोकण तैयार किए हैं, जो जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का बेहद तेज और सटीक पता लगाने में सक्षम है।
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यह अध्ययन रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल स्प्रिंग नेचर में छपी है। इससे वैज्ञानिक काफी उत्साहित हैं। इंटर्डिसिप्लिनरी नैनोटेक्नोलॉजी सेंटर एएमयू के प्रो. अबसार अहमद के निर्देशन में मोहम्मद माज और आजम रजा ने शोध किया। शोधकर्ताओं ने रासायनिक पदार्थों की बजाय ग्रीन तकनीक अपनाते हुए पौधों के अर्क की मदद से इन नैनोकणों का निर्माण किया।
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जांच में पाया गया कि ये कण आकार में बेहद छोटे, लगभग 26 नैनोमीटर के हैं और समान रूप से फैले हुए हैं। इनके भीतर मौजूद बारीक छेद और विशेष संरचना गैस के अणुओं के साथ तेजी से प्रतिक्रिया करने में मदद करती है।
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अध्ययन के दौरान यह भी सामने आया कि इन नैनोकणों में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन रिक्त स्थान मौजूद हैं, जो गैस की पहचान करने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं। यही कारण है कि यह सेंसर कार्बन मोनोऑक्साइड के प्रति अत्यधिक संवेदनशील साबित हुआ।
प्रो. अबसार अहमद के अनुसार, पौधों से प्राप्त इस ग्रीन नैनो टेक्नोलॉजी के जरिये विकसित निकल ऑक्साइड नैनोकण भविष्य में पर्यावरण निगरानी, औद्योगिक सुरक्षा और स्मार्ट गैस डिटेक्शन सिस्टम के लिए एक टिकाऊ और प्रभावी विकल्प बन सकते हैं। इसे बाजार में लाने की कोशिश होगी।


परीक्षण में मिली सफलता
परीक्षण में निकल ऑक्साइड आधारित इस सेंसर ने 250 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 100 पीपीएम कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के लिए 445 का प्रभावशाली असर दर्ज किया। खास बात यह रही कि सेंसर ने गैस की मौजूदगी को महज 42 सेकंड में पहचान लिया, जबकि गैस हटने के बाद 28 सेकंड में सामान्य स्थिति में लौट आया। यह प्रदर्शन पहले विकसित कई समान सेंसरों की तुलना में लगभग दोगुना तेज पाया गया।




क्या होता है कार्बन मोनोऑक्साइड
कार्बन मोनोऑक्साइड एक रंगहीन, गंधहीन और बेहद जहरीली गैस है, जिसकी समय रहते पहचान न हो पाने के कारण हर वर्ष अनेक दुर्घटनाएं होती हैं। ऐसे में कम लागत, पर्यावरण के अनुकूल और उच्च दक्षता वाले ये नए सेंसर लोगों की सुरक्षा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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