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सुरेंद्र हत्याकांडः 21 मार्च को होनी थी हत्या, पर नहीं मिला था मौका

Sat, 27 Mar 2021 12:08 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 27 Mar 2021 12:08 AM IST
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Murder was to be held on 21 March, but did not get a chance
सुरेंद्र का शव गांव बझेड़ा पहुंचने पर विलाप करते परिजन। - फोटो : KHAR
गांव बझेड़ा के अगवा छात्र सुरेंद्र की हत्या के खुलासे से हर कोई स्तब्ध है। हत्या की पटकथा लिखने में उसके तयेरे भाई भूपेंद्र की अहम भूमिका रही। हालांकि, सुरेंद्र की हत्या 21 मार्च को होनी थी। उसी के तहत चारों आरोपी 20 मार्च को गांव आ गए थे। मगर सुरेंद्र को घर से बुलाने का मौका नहीं मिला।
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सुरेंद्र व भूपेंद्र के घर पास-पास हैं। भूपेंद्र को सुरेंद्र को घर से बुलाकर गांव के बाहर लाने की जिम्मेदारी थी। तय यह भी था कि मोबाइल से कॉल कर नहीं बुलाना है। कोई देख न ले यह भी ध्यान रखना था। 21 मार्च को पूरे दिन कोई मौका नहीं मिला। 22 मार्च की सुबह भूपेंद्र छात्र को बुलाने उसके घर पहुंच गया। सुरेंद्र से अकेले में उसकी बात हुई, लेकिन सुरेंद्र की मां की उस पर नजर पड़ गई। उन्होंने उसे टोका कि कहां जा रहे हो तो भूपेंद्र ने यह कह दिया कि वह दवा दिलवाने जा रहा है। कुछ देर घूमने के बाद वह उसे उसके घर छोड़ गया।
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इसके बाद शाम को फिर भूपेंद्र ने घर के पास तिराहे से इशारे से सुरेंद्र को नहर पुल पर बुलाया। घटना के बाद भूपेंद्र घर लौट आया। रिंकू अपने दोस्त राहुल के साथ मध्यप्रदेश चला गया था, जबकि रिंकू का मामा अपने गांव देदना में ही रहा। भूपेंद्र परिवार के साथ ही उसकी तलाश में जुटा रहा और परिवार वालों को डराता रहा कि पुलिस के पास जाने से मामला बिगड़ सकता है। जब पुलिस की एंट्री हुई और शुरुआत में भूपेंद्र से पूछताछ हुई तो उस समय उसने पुलिस को बरगला दिया। जब उसके खिलाफ साक्ष्य मिलते चले गए तब पुलिस उसे दबोचने पहुंची। इस दौरान उसने भागने का प्रयास किया। मगर पुलिस ने पकड़ लिया और उसने सब कुछ स्पष्ट किया। भूपेंद्र ने यह भी बताया कि जब वह उसे गांव से बाहर लाया तो सुरेंद्र रिंकू को देख कर नाराज होने लगा तो उसे गिले शिकवे दूर करने की बात कह समझा कर चुप करा दिया। इधर, रिंकू व राहुल हैदराबाद में लोकेशन की खबरें अखबारों में पढ़कर बेखौफ हो गए थे।
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मानेसर में साथ काम करते थे तीनों आरोपी
पुलिस के अनुसार शिवकुमार उर्फ रिंकू, भूपेंद्र व राहुल मानेसर में शीशे का फ्रेम बनाने का काम करते थे। 20 मार्च को रिंकू ने शराब पीते समय सुरेंद्र की बहन से सात माह से बात न होने वाली बात का जिक्र किया और अगले ही दिन हत्या के इरादे से वहां से गांव आ गए।
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