{"_id":"5ed901f08ebc3e90393c19fd","slug":"murder-of-five-year-old-child-revealed-after-22-years-three-arest-city-office-news-ali2352820117","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़ : 22 साल बाद पता चला सौतेले भाई ने मार दिया था बेटा, तीन गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़ : 22 साल बाद पता चला सौतेले भाई ने मार दिया था बेटा, तीन गिरफ्तार
विज्ञापन
पांच वर्षीय मासूम के अपहरण व हत्या के आरोपी।
- फोटो : CITY OFFICE
यह सच है, मगर हर किसी को हैरान कर देने वाला भी है। टप्पल के गांव मानपुर से 22 साल पहले अगवा हुए पांच साल के बच्चे अशोक की उसी दिन गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी और लाश को जंगल में झाड़ियों के बीच सूखे कुएं में फेंक दिया था। यह बात तभी से पूरे परिवार को पता थी कि बच्चे को किसने अगवा किया है, मगर आज तक न तो अगवा करने वालों का कोई सुराग लगा और न हत्या किए जाने का कोई साक्ष्य मिला। अब 22 साल बाद पुलिस ने बालक की अपहरण के बाद हत्या के आरोपी सौतेले ताऊ-ताई और उनके बेटे को गिरफ्तार कर कुएं से शव की हड्डियों का चूरा बरामद किया है। खास बात है कि बीते 22 साल तक आरोपी परिवार बल्लभगढ़ में अज्ञातवास काटता रहा, मगर किसी रिश्तेदार या परिवार से रिश्ते न रखने के कारण कोई सुराग नहीं लग सका।
एसपी देहात अतुल शर्मा ने बताया कि इनामी अपराधियों की धरपकड़ को चले अभियान के दौरान इंस्पेक्टर टप्पल आशीष कुमार सिंह ने थाने के दस-दस हजार रुपये के इनामी अपराधी राजपाल पुत्र दीपचंद्र, उनका बेटा मलुआ उर्फ तेजवीर, उनकी पत्नी हरद्वारी देवी मूल निवासी मानपुर टप्पल, हाल निवासी सावित्री देवी का मकान आदर्श नगर हरीविहार कालोनी बल्लभगढ़ फरीदाबाद, हरियाणा को गिरफ्तार किया है। इनके खिलाफ थाना टप्पल में वर्ष 1998 में राजपाल के सौतेले भाई रवि कुमार के 5 साल के बेटे अशोक के अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ था। घटना वाले दिन से ही बच्चे के साथ ये तीनों गायब थे। इनका कहीं कोई सुराग नहीं लगा। इस मुकदमे में राजपाल के दूसरे भाई चंद्रपाल व उसकी पत्नी कृपाली देवी भी नामजद थे। चंद्रपाल की मौत हो गई, जबकि पुलिस ने कृपाली देवी को वर्ष 1999 में अपहरण के आरोप में ही जेल भेजकर बाकी नामजदों के खिलाफ मफरूरी (आरोपी फरार) में चार्जशीट कोर्ट में दायर कर दी। इन फरार आरोपियों के खिलाफ कुर्की, भगोड़ा व इनाम तक की कार्रवाई हुई। मगर, कोई सुराग नहीं लगा।
जब इंस्पेक्टर आशीष कुमार सिंह ने इनामी अपराधियों पर काम शुरू किया तो 20 दिन के प्रयास में तीनों को गिरफ्तार कर लिया। साथ में तीनों ने पूछताछ में संपत्ति विवाद में स्वीकारा कि उन्होंने अशोक की अपहरण के बाद गला दबाकर हत्या कर दी थी। उसकी लाश को गांव बाजौता के जंगलों में झाड़ियों के बीच सूखे कुएं में फेंक दी थी। उसके बाद से वह लोग बल्लभगढ़ में भैंस पालकर रह रहे थे। पुलिस ने उनकी निशानदेही से कुएं में मजदूर लगाकर व फॉरेंसिक टीम बुलाकर साक्ष्य संकलित किए तो वहां मिट्टी में दबा हड्डियों का चूरा बरामद हुआ है।
विज्ञापन
एसपी देहात ने बताया कि अब तीनों आरोपियों को हत्या के आरोप में जेल भेजा गया है। साथ ही कुएं से मिले साक्ष्यों को उसके माता-पिता से डीएनए मिलान के लिए भेजे जाने की तैयारी चल रही है।
- यह वाकई बेहद चौंकाने वाला और हैरान करने वाला तथ्य है कि ये लोग 22 साल तक छिपे रहे और किसी से संपर्क तक नहीं किया। मगर मौजूदा इंस्पेक्टर ने इस प्रकरण में गंभीरता से काम कर तीनों को गिरफ्तार कर हत्या का खुलासा करते हुए लाश के अवशेष बरामद किए हैं।
मुनिराज जी एसएसपी
विज्ञापन
एसपी देहात अतुल शर्मा ने बताया कि इनामी अपराधियों की धरपकड़ को चले अभियान के दौरान इंस्पेक्टर टप्पल आशीष कुमार सिंह ने थाने के दस-दस हजार रुपये के इनामी अपराधी राजपाल पुत्र दीपचंद्र, उनका बेटा मलुआ उर्फ तेजवीर, उनकी पत्नी हरद्वारी देवी मूल निवासी मानपुर टप्पल, हाल निवासी सावित्री देवी का मकान आदर्श नगर हरीविहार कालोनी बल्लभगढ़ फरीदाबाद, हरियाणा को गिरफ्तार किया है। इनके खिलाफ थाना टप्पल में वर्ष 1998 में राजपाल के सौतेले भाई रवि कुमार के 5 साल के बेटे अशोक के अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ था। घटना वाले दिन से ही बच्चे के साथ ये तीनों गायब थे। इनका कहीं कोई सुराग नहीं लगा। इस मुकदमे में राजपाल के दूसरे भाई चंद्रपाल व उसकी पत्नी कृपाली देवी भी नामजद थे। चंद्रपाल की मौत हो गई, जबकि पुलिस ने कृपाली देवी को वर्ष 1999 में अपहरण के आरोप में ही जेल भेजकर बाकी नामजदों के खिलाफ मफरूरी (आरोपी फरार) में चार्जशीट कोर्ट में दायर कर दी। इन फरार आरोपियों के खिलाफ कुर्की, भगोड़ा व इनाम तक की कार्रवाई हुई। मगर, कोई सुराग नहीं लगा।
विज्ञापन
जब इंस्पेक्टर आशीष कुमार सिंह ने इनामी अपराधियों पर काम शुरू किया तो 20 दिन के प्रयास में तीनों को गिरफ्तार कर लिया। साथ में तीनों ने पूछताछ में संपत्ति विवाद में स्वीकारा कि उन्होंने अशोक की अपहरण के बाद गला दबाकर हत्या कर दी थी। उसकी लाश को गांव बाजौता के जंगलों में झाड़ियों के बीच सूखे कुएं में फेंक दी थी। उसके बाद से वह लोग बल्लभगढ़ में भैंस पालकर रह रहे थे। पुलिस ने उनकी निशानदेही से कुएं में मजदूर लगाकर व फॉरेंसिक टीम बुलाकर साक्ष्य संकलित किए तो वहां मिट्टी में दबा हड्डियों का चूरा बरामद हुआ है।
विज्ञापन
एसपी देहात ने बताया कि अब तीनों आरोपियों को हत्या के आरोप में जेल भेजा गया है। साथ ही कुएं से मिले साक्ष्यों को उसके माता-पिता से डीएनए मिलान के लिए भेजे जाने की तैयारी चल रही है।
- यह वाकई बेहद चौंकाने वाला और हैरान करने वाला तथ्य है कि ये लोग 22 साल तक छिपे रहे और किसी से संपर्क तक नहीं किया। मगर मौजूदा इंस्पेक्टर ने इस प्रकरण में गंभीरता से काम कर तीनों को गिरफ्तार कर हत्या का खुलासा करते हुए लाश के अवशेष बरामद किए हैं।
मुनिराज जी एसएसपी