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मुनीर ने 2 साल में 9 बड़ी घटनाएं कर दहलाया था अलीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jun 2016 01:53 AM IST
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मुनीर मेहताब
- फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
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एनआईए अफसर तंजील अहमद हत्याकांड में दो लाख के इनामी मुनीर मेहताब ने वर्ष 2009 के एएमयू छात्रसंघ चुनाव में अपनी आपराधिक पारी की शुरुआत करते हुए अलीगढ़ में जो कारनामे किए वह चौंकाने वाले हैं। उसने गिरफ्तारी के बाद जिले की 9 बड़े हत्या व लूटकांडों का खुलासा किया है। इनमें रेडियेंट स्टार कैश केरी कंपनी की 32 व 35 लाख की लूट, रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर की हत्याकर पिस्टल लूट सहित दो अन्य रिवाल्वर लूट शामिल हैं। दोनों रिवाल्वर बरामद भी हुई हैं। साथ में सरकारी पिस्टल के लिए अपने साथी की हत्या और अपने सबसे करीबी दोस्त आशुतोष मिश्रा के कहने पर एएमयू छात्र आलमगीर की हत्या करना स्वीकारा है। इस आधार पर अलीगढ़ पुलिस अब मुनीर को रिमांड पर लेने का प्रयास करेगी। फिलहाल एक टीम उससे पूछताछ के लिए नोएडा गई हुई है।
सऊद जेल से लाया आलमगीर की हत्या का प्लान
फहद हत्याकांड में आशुतोष मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद सितंबर 2015 में वह फरारी काटते हुए अपने दोस्त सऊद के साथ अलीगढ़ आया। इस दौरान सऊद को उसने आशुतोष से मिलने जेल भेजा। जब वह लौटकर आया तो अंदर से आशुतोष की खबर आई कि आलमगीर को मारकर सिर फाड़ने का बदला लेना है। बस सबसे करीबी दोस्त की खबर सुनकर उसने कैंपस में ही सऊद के साथ मिलकर आलमगीर को 12 राउंड गोली मारीं और मौत के घाट उतार दिया। इस हत्याकांड में वह 50 हजार का इनामी घोषित हुआ।
आशुतोष-मुनीर से भी दोस्त ने लूट लिए 32-35 लाख
जब महत्वाकांक्षाएं और खर्चे बढ़े तो आशुतोष-मुनीर ने कुछ बड़ा करने की प्लानिंग की। इसी प्लानिंग के तहत रामघाट रोड पर स्थित इंडस इंड बैंक के कर्मचारी वरुण पंडित निवासी प्रतिभा कॉलोनी की मुखबिरी से मीनाक्षी पुल के पास 23 जून 2014 को लूटे और ठीक एक माह बाद 22 जुलाई 2014 को रेलवे रोड पर 35 लाख रुपये लूटे। इस रकम में से वरुण को 15 लाख रुपया दिया। शेष रकम हरेंद्र-वीरेश कैंप से दोस्त बने हाथरस जनपद के सासनी क्षेत्र के गांव कौमरी निवासी अपराधी दीपू ठाकुर को रखने के लिए दे दी। मगर बाद में दीपू वह रकम लेकर गायब हो गया और आज तक नहीं लौटाई।
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हरेंद्र-वीरेश से मिला आपराधिक संरक्षण
वर्ष 2009 में अपने फुफेरे भाई जफर संग एएमयू में आए मुनीर ने यहां प्रवेश के प्रयास शुरू किए। तभी एएमयू छात्रसंघ चुनाव में आशुतोष मिश्रा से दोस्ती हो गई। आपराधिक प्रवृत्ति होने के कारण वह हथियार भी रखता था। तभी 2012 में आलमगीर से झगड़े के बाद से झगड़ों की शुरुआत हो गई। इसी बीच मंजर का चुनाव लड़ाया और झगड़ों के चलते पुलिस पीछे लगने लगी। तभी आशुतोष मिश्रा के माध्यम से इन दिनों धर्मेंद्र चौधरी हत्याकांड में जेल में निरुद्ध ताकतवर हरेंद्र सिंह व वीरेश प्रधान से मुलाकात हुई और उन्होंने हथियार व रहने के ठिकाने उपलब्ध कराना शुरू कर दिया। अपने विरोधी तल्हा पर सेंटर प्वाइंट पर हमले के बाद वह फरारी काट रहे थे, इसी दौरान हरेंद्र-वीरेश के कहने पर फहद की हत्या की। इसके बाद आशुतोष तो गिरफ्तार हो गया। मगर खुद मुनीर
भाई के सामने मारा सद्दाम को
13 फरवरी 2015 को पान दरीबा में सिपाही सुरेश बाबू की हत्याकर उससे 9 एमएम सरकारी पिस्टल लूटने के बाद उसने अपने साथी जुबैर, यासिर, फहद के भाई सद्दाम को रखने के लिए दे दी। उस समय मुनीर के हाथ में गोली भी लगी थी। जब वह इलाज कराकर लौटा तो उससे पिस्टल मांगता तो वह उसे गालियां देकर भगा देता। एक दिन वह जुबैर को लेकर उसके गांव सद्दाम से पिस्टल लेने गया। जुबैर अपने भाई सद्दाम पर दबाव डाल रहा था कि वह पिस्टल लौटा दे। मगर सद्दाम देने को तैयार नहीं था, बल्कि धमका रहा था कि ज्यादा जिद की तो वह दोनों में से किसी को गोली मार देगा। इस पर खुद मुनीर ने पीछे से सद्दाम के गोली मार दी और भाग आया। हालांकि वह 9 एमएम पिस्टल नहीं ले जा सका। यह बात सद्दाम के परिजनों को पता थी। इसलिए उन्होंने रंजिशन अपने विरोधी गुट को नामजद किया।
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सऊद जेल से लाया आलमगीर की हत्या का प्लान
फहद हत्याकांड में आशुतोष मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद सितंबर 2015 में वह फरारी काटते हुए अपने दोस्त सऊद के साथ अलीगढ़ आया। इस दौरान सऊद को उसने आशुतोष से मिलने जेल भेजा। जब वह लौटकर आया तो अंदर से आशुतोष की खबर आई कि आलमगीर को मारकर सिर फाड़ने का बदला लेना है। बस सबसे करीबी दोस्त की खबर सुनकर उसने कैंपस में ही सऊद के साथ मिलकर आलमगीर को 12 राउंड गोली मारीं और मौत के घाट उतार दिया। इस हत्याकांड में वह 50 हजार का इनामी घोषित हुआ।
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आशुतोष-मुनीर से भी दोस्त ने लूट लिए 32-35 लाख
जब महत्वाकांक्षाएं और खर्चे बढ़े तो आशुतोष-मुनीर ने कुछ बड़ा करने की प्लानिंग की। इसी प्लानिंग के तहत रामघाट रोड पर स्थित इंडस इंड बैंक के कर्मचारी वरुण पंडित निवासी प्रतिभा कॉलोनी की मुखबिरी से मीनाक्षी पुल के पास 23 जून 2014 को लूटे और ठीक एक माह बाद 22 जुलाई 2014 को रेलवे रोड पर 35 लाख रुपये लूटे। इस रकम में से वरुण को 15 लाख रुपया दिया। शेष रकम हरेंद्र-वीरेश कैंप से दोस्त बने हाथरस जनपद के सासनी क्षेत्र के गांव कौमरी निवासी अपराधी दीपू ठाकुर को रखने के लिए दे दी। मगर बाद में दीपू वह रकम लेकर गायब हो गया और आज तक नहीं लौटाई।
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हरेंद्र-वीरेश से मिला आपराधिक संरक्षण
वर्ष 2009 में अपने फुफेरे भाई जफर संग एएमयू में आए मुनीर ने यहां प्रवेश के प्रयास शुरू किए। तभी एएमयू छात्रसंघ चुनाव में आशुतोष मिश्रा से दोस्ती हो गई। आपराधिक प्रवृत्ति होने के कारण वह हथियार भी रखता था। तभी 2012 में आलमगीर से झगड़े के बाद से झगड़ों की शुरुआत हो गई। इसी बीच मंजर का चुनाव लड़ाया और झगड़ों के चलते पुलिस पीछे लगने लगी। तभी आशुतोष मिश्रा के माध्यम से इन दिनों धर्मेंद्र चौधरी हत्याकांड में जेल में निरुद्ध ताकतवर हरेंद्र सिंह व वीरेश प्रधान से मुलाकात हुई और उन्होंने हथियार व रहने के ठिकाने उपलब्ध कराना शुरू कर दिया। अपने विरोधी तल्हा पर सेंटर प्वाइंट पर हमले के बाद वह फरारी काट रहे थे, इसी दौरान हरेंद्र-वीरेश के कहने पर फहद की हत्या की। इसके बाद आशुतोष तो गिरफ्तार हो गया। मगर खुद मुनीर
भाई के सामने मारा सद्दाम को
13 फरवरी 2015 को पान दरीबा में सिपाही सुरेश बाबू की हत्याकर उससे 9 एमएम सरकारी पिस्टल लूटने के बाद उसने अपने साथी जुबैर, यासिर, फहद के भाई सद्दाम को रखने के लिए दे दी। उस समय मुनीर के हाथ में गोली भी लगी थी। जब वह इलाज कराकर लौटा तो उससे पिस्टल मांगता तो वह उसे गालियां देकर भगा देता। एक दिन वह जुबैर को लेकर उसके गांव सद्दाम से पिस्टल लेने गया। जुबैर अपने भाई सद्दाम पर दबाव डाल रहा था कि वह पिस्टल लौटा दे। मगर सद्दाम देने को तैयार नहीं था, बल्कि धमका रहा था कि ज्यादा जिद की तो वह दोनों में से किसी को गोली मार देगा। इस पर खुद मुनीर ने पीछे से सद्दाम के गोली मार दी और भाग आया। हालांकि वह 9 एमएम पिस्टल नहीं ले जा सका। यह बात सद्दाम के परिजनों को पता थी। इसलिए उन्होंने रंजिशन अपने विरोधी गुट को नामजद किया।