फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Mumbai daughter also took charge of the city counted her work from America

Aligarh News: मुंबई की बेटी ने भी संभाली शहर की कमान, अमेरिका से गिनाए अपने काम

Tue, 02 May 2023 12:56 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Tue, 02 May 2023 12:56 AM IST
सार

भावुक होकर बोलीं कि मुंबई की इस बेटी को अलीगढ़ ने बहुत प्यार दिया। अनगिनत काम बिना किसी भेदभाव के कराए। हां, एक मलाल आज तक है कि वे नालों से निकलने वाली सिल्ट को सीधे मशीन के जरिये शहर के बाहर फिंकवाने की व्यवस्था नहीं कर सकीं।

विज्ञापन
Mumbai daughter also took charge of the city counted her work from America
पूर्व अलीगढ़ मेयर सावित्री वार्ष्णेय - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अपने कार्यकाल में लगातार पांच वर्ष तक उत्तर प्रदेश मेयर काउंसिल की अध्यक्ष रहीं नगर निगम की प्रथम महिला मेयर सावित्री वार्ष्णेय इन दिनों चर्चा में हैं। हालांकि वे अलीगढ़ में नही हैं, मगर अमेरिका में रहते हुए नगर निगम चुनाव की एक-एक गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं।

विज्ञापन


अमर उजाला ने जब निकाय चुनाव के उनके अनुभवों को लेकर उनसे बात की तो वे भावुक होकर बोलीं कि मुंबई की इस बेटी को अलीगढ़ ने बहुत प्यार दिया। अनगिनत काम बिना किसी भेदभाव के कराए। हां, एक मलाल आज तक है कि वे नालों से निकलने वाली सिल्ट को सीधे मशीन के जरिये शहर के बाहर फिंकवाने की व्यवस्था नहीं कर सकीं। उस समय नौ करोड़ की मशीन खरीदी जानी थी। मगर पैसों की कमी की वजह से संभव नहीं हो पाया था।
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि चूंकि ससुराल पक्ष सामाजिक व राजनीतिक रूप से संघ व भाजपा से जुड़ा था। इसलिए वह दोनों क्षेत्रों में सक्रिय हो गईं। इसी बीच नगर निगम अलीगढ़ का दूसरा चुनाव शुरू हो गया। मेयर पद का आरक्षण सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ तो वह भी चुनाव में आ गईं। पूर्व विधायक एवं उस समय भाजपा महानगर अध्यक्ष स्व.संजीव राजा ने उनका नाम प्रदेश स्तर तक पहुंचाया। पार्टी ने भी साथ दिया। संजीव राजा ने फोन पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि आपका टिकट हो गया है। तैयारी करो। बस फिर क्या था शहर के सर्व समाज ने प्यार दिया और उन्हें मेयर जिताया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


मेयर बनने के बाद नगर निगम के लिए धनराशि जुटाने पर बहुत काम किया। सेवा भवन स्थापित हो पाया। रेलवे रोड पर समर्पण कांप्लेक्स शुरू हुआ। सड़कों का जाल, कूड़ा, गंदगी, सफाई, पेयजल आदि पर बहुत से काम हुए। मेडिकल कचरे के निस्तारण के लिए इंसीनरेटर लगवाया गया। मगर सहयोग न मिलने के कारण वह ज्यादा दिन नहीं चल सका और बंद कर दिया गया। वे कहती हैं कि उन्हें कभी महसूस नहीं हुआ कि महिला होने के नाते वे कहीं कमजोर हैं। सभी 70 वार्डों को एक समान मानते हुए सभी दल व वर्ग के पार्षदों के सहयोग से शहर में काम कराए।

यूपी मेयर काउंसिल की लगातार पांच वर्ष अध्यक्ष रहने के चलते अनगिनत सेमिनारों में जाने का मौका मिला। हैदराबाद में रात को 12 से 4 बजे तक की सफाई व्यवस्था पर अपने शहर में काम कराने का प्रयास किया। मगर यहां यह कहकर उसे लागू नहीं किया कि यहां के नालों में सांप-बिच्छू रहते हैं और रात में अंधेरा रहता है। इसलिए ठीक नहीं है। वह अब भी अलीगढ़ को याद करती हैं। अभी चुनाव किस तरफ जा रहा है, यह कहना बहुत जल्दबाजी है। कुछ विषय ऐसे हैं, जिन पर सभी को सोचना होगा।
 

वापस खींचने पड़े थे गूलर रोड पोखर पर कदम

अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहती हैं कि गूलर रोड पोखरों के स्वरूप की वापसी पर भी बहुत काम किया। किसी पर भी बिना टिप्पणी किए बोलीं कि उस पर मुझे अपने कदम वापस खींचने पड़े। आज भी उसकी पूरी पत्रावली उनके पास रखी है।

अब सहयोग नहीं सामान्य रूप से चल रहा निगम
सावित्री वार्ष्णेय कहती हैं कि अब नगर निगम सामान्य रूप से चल रहा है। सहयोगात्मक रूप से नहीं चल रहा है। यह साफ परिलक्षित होता है।

उपलब्धि
सेवा भवन व समर्पण कांप्लेक्स का शुभारंभ बड़ी उपलब्धि

पांच सुझाव
  • गीली सिल्ट सड़क पर न डालकर मशीन से सीधे उठकर शहर के बाहर जाए
  • जनसंख्या और क्षेत्रफल बढ़ने के अनुसार सभी संवर्ग में स्टाफ बढ़ाया जाए
  • हैदराबाद की तर्ज पर रात में 12 बजे से 4 बजे तक शहर की सफाई की जाए
  • जलभराव से निजात को शहर की विलुप्त पोखरों का स्वरूप वापस किया जाए
  • मेयर को बिना किसी भेदभाव व दल के पार्षदों के समान काम करने चाहिए

राजनीतिक परिचय
सावित्री वार्ष्णेय का मायका मुंबई है। उनकी शादी अतरौली के संघ व भाजपा से जुड़े परिवार के इंजीनियर स्व.राघवेंद्र वार्ष्णेय से हुई। 1994 में परिवार के साथ वह मैरिस रोड पर आकर बस गईं। सामाजिक रूप से सक्रिय सावित्री वार्ष्णेय समाज, भारत विकास परिषद, महिला संगठनों व भाजपा से जुड़कर काम करने लगीं। उनके पति श्री वार्ष्णेय महाविद्यालय की प्रबंध समिति में शीर्ष पदों पर रहे। पति के देहांत के बाद उनके बेटे अमेरिका जाकर बस गए। इसलिए उनका अब ज्यादातर समय विदेश में बेटे के पास ही बीतता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed