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डीएम साहब, श्रमिकों के लिए प्लान अच्छा है, बस रोजगार जल्दी दिला दो
Thu, 28 May 2020 08:18 PM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Thu, 28 May 2020 08:18 PM IST
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प्रवासी श्रमिकों को अपनी माटी में रोजगार दिलाने के लिए जिलाधिकारी की ओर से बनाए प्लान की खबर अमर उजाला अखबार में पढ़ने के बाद बाहर से लौटे श्रमिकों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। श्रमिकों ने प्लान की सराहना की है। मगर, उनकी मांग है कि इसे कागजों ने निकाल जल्द धरातल पर लागू किया जाए। इससे की उनको रोजगार मिले और वह दो वक्त की रोटी की तलाश में परदेस लौटने का ख्याल भी अपने मन से निकाल दें।
श्रमिकों ने बताया कि उन्हें अपने गांव में रहकर पहले ही रोजगार मिल जाता तो परदेस जाने की जरूरत नहीं होती। मगर, रोजगार दिलाने में अक्षम शासन-प्रशासन की नीतियों के चलते परदेस का रुख करना पड़ा। कोरोना महामारी के दौर में इतने डरे-सहमें घर लौटे हैं कि अब वापस लौटने का दिल नहीं करता।
वर्जन फोटो सहित
अपने गांव में कोई रोजगार नहीं मिला तो पांच साल पहले केरल जाकर मजदूरी करने की ठानी। वहां इतने लंबे समय काम करने के बाद भी कुछ हाथ नहीं लगा। प्रशासन ने गांव-देहात में ही मजदूरी दिलाने का प्लान बनाया है। यह सराहनीय है। अब बस जल्द से रोजगार मिल जाए।
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- प्रवासी श्रमिक रामकुमार, निवासी जलाली
नोएडा में मजदूरी करके अपना और परिवार का पेट पाला। मगर, कोरोना ने अब भय व्याप्त कर दिया है। अब वापस लौटने का मन नहीं है। गांव में ही कोई रोजगार मिल जाएगा तो जीवन उससे पैसे कमाकर काट देंगे।
- प्रवासी श्रमिक महेश चंद्र प्रभाकर, हरदुआगंज
- गांव से लेकर शहर तक रोजगार की तलाश की। हारकर मुंबई जाना पड़ा। वहां तीन साल तक काम किया। सारी कमाई लॉक डाउन में गंवा दी। अब वापस लौटने का दिल नहीं है। परिवार वाले भी नहीं जाने दे रहे। डीएम साहब ने हमारे लिए प्लान बनाया है। बस उसे जल्द लागू कराकर हमें रोजगार दिला दें।
प्रवासी श्रमिक सुनील नायक, निवासी जलोखरी, पिसावा
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श्रमिकों ने बताया कि उन्हें अपने गांव में रहकर पहले ही रोजगार मिल जाता तो परदेस जाने की जरूरत नहीं होती। मगर, रोजगार दिलाने में अक्षम शासन-प्रशासन की नीतियों के चलते परदेस का रुख करना पड़ा। कोरोना महामारी के दौर में इतने डरे-सहमें घर लौटे हैं कि अब वापस लौटने का दिल नहीं करता।
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अपने गांव में कोई रोजगार नहीं मिला तो पांच साल पहले केरल जाकर मजदूरी करने की ठानी। वहां इतने लंबे समय काम करने के बाद भी कुछ हाथ नहीं लगा। प्रशासन ने गांव-देहात में ही मजदूरी दिलाने का प्लान बनाया है। यह सराहनीय है। अब बस जल्द से रोजगार मिल जाए।
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- प्रवासी श्रमिक रामकुमार, निवासी जलाली
नोएडा में मजदूरी करके अपना और परिवार का पेट पाला। मगर, कोरोना ने अब भय व्याप्त कर दिया है। अब वापस लौटने का मन नहीं है। गांव में ही कोई रोजगार मिल जाएगा तो जीवन उससे पैसे कमाकर काट देंगे।
- प्रवासी श्रमिक महेश चंद्र प्रभाकर, हरदुआगंज
- गांव से लेकर शहर तक रोजगार की तलाश की। हारकर मुंबई जाना पड़ा। वहां तीन साल तक काम किया। सारी कमाई लॉक डाउन में गंवा दी। अब वापस लौटने का दिल नहीं है। परिवार वाले भी नहीं जाने दे रहे। डीएम साहब ने हमारे लिए प्लान बनाया है। बस उसे जल्द लागू कराकर हमें रोजगार दिला दें।
प्रवासी श्रमिक सुनील नायक, निवासी जलोखरी, पिसावा