{"_id":"6632d12726c35c4fa009de06","slug":"mou-signed-between-ccrum-and-amu-aligarh-news-c-2-ali1009-381911-2024-05-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"AMU: अनुसंधान, दवा मानकीकरण आदि जानकारी आदान-प्रदान करेंगें सीसीआरयूएम-एमयू, समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
AMU: अनुसंधान, दवा मानकीकरण आदि जानकारी आदान-प्रदान करेंगें सीसीआरयूएम-एमयू, समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर
Thu, 02 May 2024 05:02 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 02 May 2024 05:02 AM IST
सार
सीसीआरयूएम भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संगठन है। 1978 में अपनी स्थापना के बाद से, यूनानी चिकित्सा में अनुसंधान के लिए शीर्ष सरकारी संगठन के रूप में सीसीआरयूएम यूनानी चिकित्सा प्रणाली के व्यावहारिक और बुनियादी पहलुओं पर वैज्ञानिक अनुसंधान करने में लगा हुआ है।
विज्ञापन
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरयूएम) और एएमयू के बीच अनुसंधान, दवा मानकीकरण सहित अन्य जानकारी आदान-प्रदान करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। सीसीआरयूएम के महानिदेशक डॉ. एन. जहीर अहमद और एएमयू के कुलसचिव मोहम्मद इमरान ने हस्ताक्षर किए।
विज्ञापन
डॉ. अहमद ने एएमयू के अजमल खान तिब्बिया कॉलेज से सार्थक सहयोग की उम्मीद जताई है। उन्होंने वर्ष 1985 से एएमयू से जुड़ाव का भी उल्लेख किया। डॉ. अहमद ने हर समय एएमयू द्वारा प्रदान किए गए समर्थन की सराहना की। उन्होंने जगह की कमी का उल्लेख करते हुए अलीगढ़ को मॉड्यूलर संस्थान बनाने के लिए पर्याप्त जगह के लिए कुलपति प्रो. नईमा खातून से अनुरोध किया। इस अवसर पर तिब्बिया कॉलेज के प्राचार्य, डीन, सहायक निदेशक डॉ. गजाला जावेद, डॉ. अमान उल्लाह, डॉ. मुख्तार आलम, डॉ. शीरीन अफ्जा, डॉ. परवेज खान आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
सीसीआरयूएम की स्थापना
केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरयूएम) भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संगठन है। 1978 में अपनी स्थापना के बाद से, यूनानी चिकित्सा में अनुसंधान के लिए शीर्ष सरकारी संगठन के रूप में सीसीआरयूएम यूनानी चिकित्सा प्रणाली के व्यावहारिक और बुनियादी पहलुओं पर वैज्ञानिक अनुसंधान करने में लगा हुआ है। अपने अस्तित्व के पिछले चार दशकों में, परिषद ने नैदानिक अनुसंधान, दवा मानकीकरण, सर्वेक्षण और औषधीय खेती में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
विज्ञापन