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मनरेगा : 55 दिन से 17 हजार मजदूरों को नहीं मिला भुगतान
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जिले के 12 ब्लॉकों के 17133 मनरेगा मजदूरों की 55 दिन की 2.42 करोड़ रुपये की मजदूरी शासन स्तर पर बकाया है। 28 मार्च के बाद से मजदूरों के खाते में पैसा ट्रांसफर नहीं हुआ है। सबसे ज्यादा टप्पल ब्लॉक के 3673 मजदूर हैं, जिनके 53 लाख रुपये बकाया है। मजदूरों को 213 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है।
ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत काम कराए जा रहे हैं। मनरेगा में मजदूरों को साल में कम से कम 100 दिन का काम देना अनिवार्य है। गांवों के विकास के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाएं मनरेगा श्रमिकों के बलबूते ही परवान चढ़ रही हैं। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अमृत सरोवर, नदियों-तालाबों का सौंदर्यीकरण हो या चकमार्ग हों, सब मनरेगा श्रमिकों के फावड़े से ही पूरी की जा रही हैं। सरकार द्वारा सात दिन की मजदूरी की रकम सीधे उनके खाते में ट्रांसफर की जाती है। लेकिन 28 मार्च के बाद से मजदूरों के खाते में रकम नहीं भेजी गई, जबकि ब्लॉक स्तर से डिमांड की वेज लिस्ट शासन को भेजी जा चुकी है। मजदूर भुगतान के लिए ग्राम प्रधानों और सचिवों से रोज कहासुनी कर रहे हैं।
ब्लॉक वार श्रमिक और उनकी बकाया मजदूरी
ब्लॉक श्रमिक बकाया मजदूरी
टप्पल 3673 53 लाख रुपये
खैर 2383 29.74 लाख रुपये
गंगीरी 1658 24.05 लाख रुपये
इगलास 1177 22.42 लाख रुपये
लोधा 1402 20.15 लाख रुपये
बिजौली 1009 16.55 लाख रुपये
अकराबाद 1205 15.56 लाख रुपये
अतरौली 1121 14.46 लाख रुपये
जवां 1349 14.42 लाख रुपये
गोंडा 940 13.48 लाख रुपये
चंडौस 979 12.29 लाख रुपये
धनीपुर 790 6.27 लाख रुपये
- श्रमिक का परिवार मजदूरी से मिलने वाली रकम से चलता है। ये बात सही है कि मनरेगा मजदूरी लेट हो सकती है लेकिन मिलेगी जरूर, तब तक मजदूर आखिर परिवार का खर्च कैसे चलाए। - जितेंद्र, अतरौली
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- मनरेगा से गांव में ही काम मिल रहा है, योजना बेहद अच्छी है। लेकिन मजदूरी लेट मिलती है, इससे बेहद परेशानी होती है। श्रमिक को काम के बदले तत्काल मजदूरी मिलनी चाहिए। - अशोक, अतरौली
- सात दिन की मजदूरी एक साथ मस्टर रोल में भरकर ब्लॉक में जाती है। इसके बाद शासन स्तर पर या बैंक स्तर पर भुगतान में लेटलतीफी होती है। फिर भी श्रमिक भीषण गर्मी या सर्दी में भी काम को समय से पूरा करते हैं। - रवेंद्र, अतरौली
- मनरेगा मजदूरों का 24 मार्च तक का पूरा भुगतान किया जा चुका है। कुछ मजदूरों का तकनीकी कारणों से भुगतान वापस आ गया है। शासन से बजट मिल गया है। सभी मजदूरों के बकाये का भुगतान जल्द कराया जा रहा है। - भालचंद्र त्रिपाठी, उपायुक्त मनरेगा
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ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत काम कराए जा रहे हैं। मनरेगा में मजदूरों को साल में कम से कम 100 दिन का काम देना अनिवार्य है। गांवों के विकास के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाएं मनरेगा श्रमिकों के बलबूते ही परवान चढ़ रही हैं। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अमृत सरोवर, नदियों-तालाबों का सौंदर्यीकरण हो या चकमार्ग हों, सब मनरेगा श्रमिकों के फावड़े से ही पूरी की जा रही हैं। सरकार द्वारा सात दिन की मजदूरी की रकम सीधे उनके खाते में ट्रांसफर की जाती है। लेकिन 28 मार्च के बाद से मजदूरों के खाते में रकम नहीं भेजी गई, जबकि ब्लॉक स्तर से डिमांड की वेज लिस्ट शासन को भेजी जा चुकी है। मजदूर भुगतान के लिए ग्राम प्रधानों और सचिवों से रोज कहासुनी कर रहे हैं।
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ब्लॉक वार श्रमिक और उनकी बकाया मजदूरी
ब्लॉक श्रमिक बकाया मजदूरी
टप्पल 3673 53 लाख रुपये
खैर 2383 29.74 लाख रुपये
गंगीरी 1658 24.05 लाख रुपये
इगलास 1177 22.42 लाख रुपये
लोधा 1402 20.15 लाख रुपये
बिजौली 1009 16.55 लाख रुपये
अकराबाद 1205 15.56 लाख रुपये
अतरौली 1121 14.46 लाख रुपये
जवां 1349 14.42 लाख रुपये
गोंडा 940 13.48 लाख रुपये
चंडौस 979 12.29 लाख रुपये
धनीपुर 790 6.27 लाख रुपये
- श्रमिक का परिवार मजदूरी से मिलने वाली रकम से चलता है। ये बात सही है कि मनरेगा मजदूरी लेट हो सकती है लेकिन मिलेगी जरूर, तब तक मजदूर आखिर परिवार का खर्च कैसे चलाए। - जितेंद्र, अतरौली
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- मनरेगा से गांव में ही काम मिल रहा है, योजना बेहद अच्छी है। लेकिन मजदूरी लेट मिलती है, इससे बेहद परेशानी होती है। श्रमिक को काम के बदले तत्काल मजदूरी मिलनी चाहिए। - अशोक, अतरौली
- सात दिन की मजदूरी एक साथ मस्टर रोल में भरकर ब्लॉक में जाती है। इसके बाद शासन स्तर पर या बैंक स्तर पर भुगतान में लेटलतीफी होती है। फिर भी श्रमिक भीषण गर्मी या सर्दी में भी काम को समय से पूरा करते हैं। - रवेंद्र, अतरौली
- मनरेगा मजदूरों का 24 मार्च तक का पूरा भुगतान किया जा चुका है। कुछ मजदूरों का तकनीकी कारणों से भुगतान वापस आ गया है। शासन से बजट मिल गया है। सभी मजदूरों के बकाये का भुगतान जल्द कराया जा रहा है। - भालचंद्र त्रिपाठी, उपायुक्त मनरेगा