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ओमवती होंगी एमएलसी चुनाव में सपा प्रत्याशी
अमर उजाला ब्यूरो/अलीगढ़
Updated Wed, 03 Feb 2016 01:59 AM IST
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ब्लॉक प्रमुख चुनाव की हलचल के बीच समाजवादी पार्टी ने स्थानीय निकाय प्राधिकारी क्षेत्र के एमएलसी चुनाव के लिए भी बिगुल फूंक दिया है। पार्टी ने अलीगढ़-हाथरस की संयुक्त सीट से हसायन की ब्लॉक प्रमुख ओमवती यादव (बुआ) को प्रत्याशी बनाया है।
समाजवादी पार्टी की जिलाध्यक्ष ओमवती हाल ही में सिकंदराराऊ के वार्ड से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीती हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बसपा प्रत्याशी और पूर्व ऊर्जा मंत्री के छोटे भाई विनोद उपाध्याय के मुकाबले मात्र एक वोट से हारी थीं। 25 सदस्यीय जिला पंचायत में विनोद को 13 और ओमवती को 12 वोट मिले थे।
अध्यक्ष के चुनाव में बसपा की सियासी जमीन हिलाने का ईनाम आलाकमान ने ओमवती को पहले सपा का जिलाध्यक्ष बनाकर दिया और अब उन्हें एमएलसी का प्रत्याशी घोषित कर यह साबित कर दिया है कि अध्यक्ष के चुनाव के बाद पार्टी में ओमवती का सियासी कद बढ़ गया है। जिले में पार्टी के दूसरे दिग्गजों पर ओमवती सबसे ज्यादा भारी पड़ी हैं।
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ओमवती पांच साल पहले हसायन ब्लॉक प्रमुख का चुनाव भी निर्विरोध जीती थीं। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में उन्होंने जिस तरह सपा समर्थित सिर्फ पांच सदस्यों के बूते पर बसपा को कड़ी टक्कर दी और उसकी एकतरफा जीत को भी बेहद मुश्किल बना दिया, उससे सपा आलाकमान को जिले की सियासत में उनकी पकड़ का अंदाजा अच्छी तरह लग गया है।
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समाजवादी पार्टी की जिलाध्यक्ष ओमवती हाल ही में सिकंदराराऊ के वार्ड से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीती हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बसपा प्रत्याशी और पूर्व ऊर्जा मंत्री के छोटे भाई विनोद उपाध्याय के मुकाबले मात्र एक वोट से हारी थीं। 25 सदस्यीय जिला पंचायत में विनोद को 13 और ओमवती को 12 वोट मिले थे।
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अध्यक्ष के चुनाव में बसपा की सियासी जमीन हिलाने का ईनाम आलाकमान ने ओमवती को पहले सपा का जिलाध्यक्ष बनाकर दिया और अब उन्हें एमएलसी का प्रत्याशी घोषित कर यह साबित कर दिया है कि अध्यक्ष के चुनाव के बाद पार्टी में ओमवती का सियासी कद बढ़ गया है। जिले में पार्टी के दूसरे दिग्गजों पर ओमवती सबसे ज्यादा भारी पड़ी हैं।
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ओमवती पांच साल पहले हसायन ब्लॉक प्रमुख का चुनाव भी निर्विरोध जीती थीं। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में उन्होंने जिस तरह सपा समर्थित सिर्फ पांच सदस्यों के बूते पर बसपा को कड़ी टक्कर दी और उसकी एकतरफा जीत को भी बेहद मुश्किल बना दिया, उससे सपा आलाकमान को जिले की सियासत में उनकी पकड़ का अंदाजा अच्छी तरह लग गया है।