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मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा पर झूमे श्रोता
अमर उजाला ब्यूरो/अलीगढ़
Updated Tue, 02 Feb 2016 01:08 AM IST
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अध्यात्म की संगीतमय प्रस्तुति को भजन कहते हैं। भजन के स्वर सोमवार को राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी का कोहिनूर सभागार में मंत्रों की तरह गूंजे। प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अनुराधा पौड़वाल कीं बेटी कविता पौडवाल ने एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किए जिससे देर रात तक श्रोता भक्ति के सागर में गोते लगाते रहे।
कार्यक्रम का उद्घाटन विधिवत रूप से दीप प्रज्जवलित करके किया। सबसे पहले कविता पौडवाल ने प्रसिद्ध भजन ‘मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूूजा’ प्रस्तुत कर सुुनने वालों का दिल जीत लिया। करीब दो दशक पहले यह भजन उनकी मां अनुराधा पौडवाल ने गाया था। इसके बाद ‘सत्यमं शिवम सुंदरम’ और ‘तूने मुझे बुलाया शेरावालिए’ जैसी भक्तिमय प्रस्तुति के साथ समां बांध दिया। हालांकि भजन के श्रोता कम ही थे।
लेकिन जितने भी श्रोता थे वह देर रात तक भजन सुनने के लिए जमे रहे। श्रोताओं की ही बेहद मांग पर कविता पौडवाल ने ‘आ मां आ तुझे दिल ने पुकारा’ प्रस्तुत किया। इसे सुनकर सुनने वाले झूम उठे।
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आज की जरूरत है भजन: कविता पौडवाल
पिछले करीब 22 वर्षों से भजन गायिकी के क्षेत्र में सक्रिय कविता पौडवाल कहती हैं कि आज के समय भजन की जरूरत ज्यादा है। पहले बहुत अच्छाई थी। लेकिन आज बझुराई का प्रकोप बढ़ गया है। संगीत में बहुत ताकत है। यह केवल तीन मिनट में ही व्यक्ति को बदलने की ताकत रखता है। कोहिनूर मंच पर प्रस्तुुति से पहले पत्रकारों से बातचीत में कविता पौडवाल ने कहा कि उन्होंने 14 वर्ष की उम्र में फिल्म चुनमुन में पूजा भट्ट के लिए गीत गाया था।
लेकिन फिल्मों की अपेक्षा लाइव शो में नाम ज्यादा होता है।कविता करीब सात वर्ष अमेरिका में रहीं। यूनाइटेड नेशन के शांति मिशन से भी जुड़ी रहीं। स्टेज शो पर भजनों की प्रस्तुति देकर सकून मिलता है। संगीत की शिक्षा उन्होंने प्रसिद्ध गायक सुरेश वाडकर से ली। बचपन से ही घर में गायिकी का माहौल था। इसलिए गायकी के क्षेत्र में कोई असहजता नहीं लगी।
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कार्यक्रम का उद्घाटन विधिवत रूप से दीप प्रज्जवलित करके किया। सबसे पहले कविता पौडवाल ने प्रसिद्ध भजन ‘मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूूजा’ प्रस्तुत कर सुुनने वालों का दिल जीत लिया। करीब दो दशक पहले यह भजन उनकी मां अनुराधा पौडवाल ने गाया था। इसके बाद ‘सत्यमं शिवम सुंदरम’ और ‘तूने मुझे बुलाया शेरावालिए’ जैसी भक्तिमय प्रस्तुति के साथ समां बांध दिया। हालांकि भजन के श्रोता कम ही थे।
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लेकिन जितने भी श्रोता थे वह देर रात तक भजन सुनने के लिए जमे रहे। श्रोताओं की ही बेहद मांग पर कविता पौडवाल ने ‘आ मां आ तुझे दिल ने पुकारा’ प्रस्तुत किया। इसे सुनकर सुनने वाले झूम उठे।
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आज की जरूरत है भजन: कविता पौडवाल
पिछले करीब 22 वर्षों से भजन गायिकी के क्षेत्र में सक्रिय कविता पौडवाल कहती हैं कि आज के समय भजन की जरूरत ज्यादा है। पहले बहुत अच्छाई थी। लेकिन आज बझुराई का प्रकोप बढ़ गया है। संगीत में बहुत ताकत है। यह केवल तीन मिनट में ही व्यक्ति को बदलने की ताकत रखता है। कोहिनूर मंच पर प्रस्तुुति से पहले पत्रकारों से बातचीत में कविता पौडवाल ने कहा कि उन्होंने 14 वर्ष की उम्र में फिल्म चुनमुन में पूजा भट्ट के लिए गीत गाया था।
लेकिन फिल्मों की अपेक्षा लाइव शो में नाम ज्यादा होता है।कविता करीब सात वर्ष अमेरिका में रहीं। यूनाइटेड नेशन के शांति मिशन से भी जुड़ी रहीं। स्टेज शो पर भजनों की प्रस्तुति देकर सकून मिलता है। संगीत की शिक्षा उन्होंने प्रसिद्ध गायक सुरेश वाडकर से ली। बचपन से ही घर में गायिकी का माहौल था। इसलिए गायकी के क्षेत्र में कोई असहजता नहीं लगी।