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जिला स्तरीय एंटी रैगिंग समिति: मीडिया-छात्र प्रतिनिधियों को नहीं दी जगह, इनके स्थान पर रखा अधिकारियों को
Tue, 28 May 2024 05:36 AM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Tue, 28 May 2024 05:36 AM IST
सार
जिला स्तरीय एंटी रैगिंग समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष होंगे और इसमें विश्वविद्यालय, कॉलेज या संस्थान के प्रमुख, एसएसपी, एडीएम सचिव, स्थानीय मीडिया के प्रतिनिधि, युवा विकास कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से जुड़े एनजीओ के प्रतिनिधि, छात्र संगठनों के प्रतिनिधि को रखना था।
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यूजीसी सचिव के पत्र में जिला स्तरीय रैगिंग समिति
- फोटो : यूजीसी सचिव पत्र
विस्तार
रैगिंग की रोकथाम के लिए अलीगढ़ की जिला स्तरीय एंटी रैगिंग समिति का गठन कर दिया है। इस समिति में मीडिया और छात्र प्रतिनिधयों को स्थान नहीं मिला है। इनके स्थान पर समिति में जिला क्रीड़ा अधिकारी, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक को सदस्य बनाया गया है, जबकि यूजीसी के सचिव की ओर से जारी पत्र में इनका जिक्र नहीं है।
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गत 18 अप्रैल को यूजीसी के सचिव मनीष आर जोशी ने सभी प्रदेशों के मुख्य सचिव, जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों को एक पत्र जारी किया था। इसमें स्कूल, कॉलेज, डिग्री कॉलेजों में होने वाली रैगिंग की रोकथाम के लिए जिला स्तरीय एंटी रैगिंग समिति गठित करने को कहा था। जिलाधिकारी समिति के अध्यक्ष होंगे और इसमें विश्वविद्यालय, कॉलेज या संस्थान के प्रमुख, एसएसपी, एडीएम सचिव, स्थानीय मीडिया के प्रतिनिधि, युवा विकास कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से जुड़े एनजीओ के प्रतिनिधि, छात्र संगठनों के प्रतिनिधि को रखना था।
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सूचना विभाग ने 27 मई को जिला स्तरीय एंटी रैगिंग समिति के गठन की सूचना जारी की है। इसमें जिला मजिस्ट्रेट को अध्यक्ष, एसएसपी, विश्वविद्यालय, कॉलेज या संस्थान के प्रमुख और युवा विकास कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से जुड़े एनजीओ के प्रतिनिधि, डीओ पीआरडी, जिला क्रीड़ा अधिकारी, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, अपर जिला नगर मजिस्ट्रेट को सदस्य सचिव नामित किया गया है। इसमें छात्र संगठनों और स्थानीय मीडिया के प्रतिनिधियों को नहीं रखा गया है।
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डीएम विशाख जी ने बताया कि रैगिंग एक दंडनीय अपराध है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा रैगिंग के संकट को रोकने व खत्म करने के लिए नियम बनाए गए हैं। सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में इन नियमों को लागू करना अनिवार्य किया गया है। उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार जिला स्तरीय एंटी रैगिंग समिति का गठन किया गया है।