{"_id":"56fae4db4f1c1b6f55f00587","slug":"mbbs-entrance-test","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा का जिन्न फिर आया बाहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा का जिन्न फिर आया बाहर
अलीगढ़/ब्यूरो
Updated Wed, 30 Mar 2016 02:06 AM IST
विज्ञापन
अमुटा के धरना स्थल पर एमबीबीएस और बीडीएस टेस्ट की सीबीआई जांच के प्रकरण से संबंधित बैनर।
- फोटो : AMUTA
अलीगढ़। एएमयू एमबीबीएस/बीडीएस संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2015-16 में कथित गड़बड़ी का जिन्न फिर बाहर आ गया है। अब एएमयू कंट्रोलर पर एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा के परिणामों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय कमेटी को गुमराह करने का आरोप लगाया जा रहा है। इसके साथ ही एक वर्ग इस मामले को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक पहुंचने की तैयारी में है।
बताते हैं कि जांच के क्रम में कमेटी के सदस्यों ने कंट्रोलर प्रो. जावेद अख्तर से प्रवेश परीक्षा से संबंधित नियम एवं गाइड लाइन की जानकारी मांगी थी। आरोप है कि उन्होंने जवाब में कई गलत जानकारी उपलब्ध कराई। इस दौरान उन्हाेंने दाखिला नियम में किसी तरह के नियम एवं गाइड लाइन नहीं होने की बात भी कही थी। जांच कमेटी के अध्ययन में अब कई नई बातों का पता चला है। एएमयू प्रवेश परीक्षा कराने से संबंधित स्पष्ट गाइड लाइन एवं नियम हैं। यह भी आरोप है कि दाखिले में गाइड लाइन एवं नियमों का पालन नहीं किया गया।
कंट्रोलर पर आरोप लगाने वालों का कहना है कि 14 जनवरी 2010 को तत्कालीन कुलपति प्रो. पीके अब्दुल अजीज की अध्यक्षता में एडमिशन कमेटी की बैठक हुई थी, जिसमें प्रवेश परीक्षा से संबंधित नियम एवं गाइड लाइन तय किए गए थे। यह गाइड लाइन केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश पर बनाए गए थे। जिसमें प्रवेश परीक्षा का पेपर सेट करने, मोडरेटर द्वारा सलेक्ट प्रश्नों एवं उत्तर को अलग-अलग बंद लिफाफे में रखने, प्रश्न पत्र वाला बंद लिफाफा गोपनीय प्रेस को प्रिटिंग के लिए भेजने के बारे में स्पष्ट निर्देश हैं। अब सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर किन नियमों एवं गाइड लाइन के तहत कंट्रोलर ने प्रश्न पत्र खोले और टाइप कराया। यही नहीं, सच्चाई छुपाने के लिए जांच कमेटी को गुमराह भी किया गया। मंगलवार को स्टाफ क्लब में शुरू अमुटा के अनिश्चितकालीन धरना सभा में एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा की सीबीआई जांच कराने से संबंधित पोस्टर लगाए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
बताते हैं कि जांच के क्रम में कमेटी के सदस्यों ने कंट्रोलर प्रो. जावेद अख्तर से प्रवेश परीक्षा से संबंधित नियम एवं गाइड लाइन की जानकारी मांगी थी। आरोप है कि उन्होंने जवाब में कई गलत जानकारी उपलब्ध कराई। इस दौरान उन्हाेंने दाखिला नियम में किसी तरह के नियम एवं गाइड लाइन नहीं होने की बात भी कही थी। जांच कमेटी के अध्ययन में अब कई नई बातों का पता चला है। एएमयू प्रवेश परीक्षा कराने से संबंधित स्पष्ट गाइड लाइन एवं नियम हैं। यह भी आरोप है कि दाखिले में गाइड लाइन एवं नियमों का पालन नहीं किया गया।
विज्ञापन
कंट्रोलर पर आरोप लगाने वालों का कहना है कि 14 जनवरी 2010 को तत्कालीन कुलपति प्रो. पीके अब्दुल अजीज की अध्यक्षता में एडमिशन कमेटी की बैठक हुई थी, जिसमें प्रवेश परीक्षा से संबंधित नियम एवं गाइड लाइन तय किए गए थे। यह गाइड लाइन केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश पर बनाए गए थे। जिसमें प्रवेश परीक्षा का पेपर सेट करने, मोडरेटर द्वारा सलेक्ट प्रश्नों एवं उत्तर को अलग-अलग बंद लिफाफे में रखने, प्रश्न पत्र वाला बंद लिफाफा गोपनीय प्रेस को प्रिटिंग के लिए भेजने के बारे में स्पष्ट निर्देश हैं। अब सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर किन नियमों एवं गाइड लाइन के तहत कंट्रोलर ने प्रश्न पत्र खोले और टाइप कराया। यही नहीं, सच्चाई छुपाने के लिए जांच कमेटी को गुमराह भी किया गया। मंगलवार को स्टाफ क्लब में शुरू अमुटा के अनिश्चितकालीन धरना सभा में एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा की सीबीआई जांच कराने से संबंधित पोस्टर लगाए गए।
विज्ञापन