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कारगिल: योगेंद्र सिंह लड़ते-लड़ते हुए थे वीरगति को प्राप्त, पाकिस्तान सेना को कर दिया था पीछे हटने पर मजबूर
Fri, 26 Jul 2024 04:05 AM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Fri, 26 Jul 2024 04:05 AM IST
सार
जांबाज योगेंद्र 9 जून 1999 को युद्ध लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गए। गांव में बने उनके स्मारक के पास युवा रोजाना एकत्रित होते हैं और उनके बलिदान को याद करते हैं।
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वीर सपूत योगेंद्र सिंह चौहान
- फोटो : संवाद
विस्तार
चंडौस थाना क्षेत्र के गांव एलमपुरा के मजरा जौहरा निवासी योगेंद्र सिंह चौहान ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान की सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। जांबाज योगेंद्र 9 जून 1999 को युद्ध लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गए। गांव में बने उनके स्मारक के पास युवा रोजाना एकत्रित होते हैं और उनके बलिदान को याद करते हैं। सेना में भर्ती होने की तैयारी करते हैं, ताकि उनकी तरह देश की सेवा कर सकें।
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उनके भाई कृष्णकुमार कहते हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व.कल्याण सिंह ने जो घोषणा की थी, वो पूरी कर दी गईं थीं। सरकार ने स्मारक स्थल तक सड़क बनवाई, स्मारक का सुंदरीकरण कराया। उन्हें रेलवे में नौकरी व माता जी को पेंशन दिलाई। योगेंद्र छह भाई-बहनों में चौथे नंबर के थे। उनके बलिदान पर भाई कृष्णकुमार चौहान व मां मूर्ति देवी सहित पूरे क्षेत्र को भी नाज है।
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स्मारक स्थल की सफाई करते हैं परिवार वाले
योगेंद्र सिंह चौहान के स्मारक स्थल पर ग्राम पंचायत स्तर से कोई सफाई नहीं कराई जाती है। परिवार के लोग ही यहां सफाई करते है। एलमपुरा जौहारा के पंचायत सचिव ओमप्रकाश सिंह कहते हैं कि शुक्रवार को शहीद स्मारक की सफाई कराई जाएगी।