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हर आंख हुई नम: सैन्य सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुए शहीद जितेंद्र शर्मा, सभी ने दी लाडले को अंतिम विदाई

Mon, 15 Jun 2026 09:55 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 15 Jun 2026 09:55 PM IST
सार

शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिवार के सदस्यों और महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था। शाम करीब साढ़े छह बजे भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। करीब सात बजे बड़े भाई रमाकांत ने नम आंखों से बलिदानी को मुखाग्नि दी।

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Martyr Jitendra Sharma cremated with military honours
शहीद जितेंद्र शर्मा पंचतत्व में विलीन - फोटो : संवाद

विस्तार

असम के जोरहाट में विमान हादसे में बलिदान हुए वायुसेना के सार्जेंट जितेंद्र शर्मा का पार्थिव शरीर सोमवार की शाम करीब पांच बजे पैतृक गांव सालपुर पहुंचा। देश सेवा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े। सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। 

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भारत माता के जयघोष और "जितेंद्र शर्मा अमर रहें के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। पार्थिव शरीर सोमवार दोपहर करीब एक बजे गाजियाबाद के हिंडन वायुसेना स्टेशन पहुंचा। इसके बाद वाहन से शरीर को सालपुर के लिए रवाना किया गया। शाम करीब चार बजे पार्थिव शरीर यमुना एक्सप्रेस मार्ग के टप्पल कट पर पहुंचा। वहां का नजारा बेहद भावुक और देशभक्ति से ओतप्रोत था। बलिदानी की अगवानी के लिए हजारों युवा हाथों में तिरंगा लेकर टप्पल कट पर मुस्तैद थे। वहां से युवा बाइक, ट्रैक्टर और अन्य वाहनों से जयघोष जयघोष करते हुए पार्थिव शरीर के साथ चल पड़े। शव यात्रा टप्पल, जट्टारी और हजियापुर होते हुए शाम करीब साढ़े पांच बजे सालपुर पहुंची। रास्ते में लोगों ने अपने घरों की छतों और सड़कों के किनारे खड़े होकर पुष्प वर्षा की।
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बड़े भाई रमाकांत ने दी मुखाग्नि
शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिवार के सदस्यों और महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था। शाम करीब साढ़े छह बजे भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। हिंडन वायुसेना गाजियाबाद से आए विंग कमांडर अतीश बरुआ के नेतृत्व में करीब 60 अधिकारियों ने सलामी दी। वायुसेना अधिकारियों ने जितेंद्र शर्मा का पदक और तिरंगा उनके बड़े भाई रमाकांत को सौंपा। करीब सात बजे बड़े भाई रमाकांत ने नम आंखों से बलिदानी को मुखाग्नि दी।

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Martyr Jitendra Sharma cremated with military honours
राजस्व राज्य मंत्री सुरेंद्र दिलेर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए - फोटो : संवाद

चार बहनों में सबसे छोटे और लाडले थे जितेंद्र
जितेंद्र शर्मा चार बड़ी बहनों (सभी विवाहित) और तीन भाइयों में सबसे छोटे (अविवाहित) थे। वह अपने माता-पिता और पूरे परिवार के लाडले थे। असम के जोरहाट में हुए इस दर्दनाक विमान हादसे में जितेंद्र शर्मा समेत वायुसेना के चार जवान बलिदान हो गए थे।
शहीद जितेंद्र शर्मा अंतिम विदाईशासन-प्रशासन और क्षेत्र के दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि
अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम, डीएम अविनाश कुमार, एसएसपी नीरज कुमार जादौन समेत  अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। सांसद सतीश गौतम ने शहादत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जितेंद्र शर्मा एक युवा और होनहार जवान थे। उनके जाने से क्षेत्र को एक ऐसी क्षति हुई है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। 

Martyr Jitendra Sharma cremated with military honours
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई अंतिम सलामी - फोटो : संवाद

52 घंटे बाद मिली मौत की खबर तो दहाड़ मारकर रोई मां
दो दिन से अपने बेटे की मौत की खबर से अनजान मां को उसे वक्त खबर मिल गई कि जब गांव सैकड़ों की संख्या में लोग पार्थिव शरीर लेने के लिए टप्पल की ओर निकल गए और एक दूर घर में विलाप कर रही महिलाएं घर पहुंच गईं। इसके बाद 72 वर्षीय मां राधेश्वरी खूब दहाड़े मार मार कर रोई और बोली मैं तेरे फोन का इंतजार करती रही और तेरा फोन नहीं आया। पार्थिव शरीर जैसे ही गांव में उनके घर पहुंचा, वहां का दृश्य देखकर हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया। जैसे ही बेटे के पार्थिव शरीर का ताबूत वृद्ध मां के सामने लाकर रखा गया, तो मां सहित परिवार की अन्य महिलाएं और बहनें दहाड़ मारकर रोने लगीं। इस हृदयविदारक क्षण को देखकर वहां मौजूद हर आंख छलक उठीं। लाडले बेटे के खोने के गम में माताजी की तबीयत अचानक बेहद बिगड़ गई, जिसके बाद परिवार के लोग और ग्रामीण अंतिम विदाई की रस्मों के बीच लगातार उनका स्वास्थ्य संभालने और उन्हें ढांढस बंधाने में जुटे रहे।
शहीद जितेंद्र शर्मा के अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाबगांव के दोस्तों की यादों में रह गए जीतू
गांव के लोग और उनके दोस्त जितेंद्र और उनकी बातों को याद कर करके व्यथित हैं। गांव के दोस्त पीके शर्मा बताते हैं हम लोग उसे जीतू कहते थे इस बार की छुट्टियों में खूब उसके साथ मस्ती की। उसने कहा था अब तो मेरा ब्याह है, सबको रहना है मेरे ब्याह में। जीतू का बहुत मजाकिया अंदाज था। रामकुमार डागुर कहते हैं कि वह मेरा शिष्य था वह मुझे गुरुजी कहता था इस बार छुट्टी में मिला तो उसने कहा कि गुरुजी मैंने आपकी बात मान ली है और अब मैं शादी करने जा रहा हूं। राजेंद्र सिंह मास्टर ने बताया है कि 3 तारीख को वह मंदिर पर बैठा हुआ था तभी उससे आखिरी मुलाकात हुई थी। बुजुर्ग कांति प्रसाद शर्मा ने बताया है कि उसवे गांव का नाम रोशन किया है। 

Martyr Jitendra Sharma cremated with military honours
सालपुर पहुंचे राजस्व राज्य मंत्री, सांसद, डीएम एसएसपी व अन्य - फोटो : संवाद

बड़ी ने छोटी बहन से कहा था आज नहीं कल रोएंगे
पूरे गांव में मातम पसरा हुआ था। भाई के पार्थिव शरीर के इंतजार में घर से करीब 300 मी दूर रास्ते में खड़ी होकर जितेंद्र शर्मा की दो बड़ी बहन आपस में गले लग कर रो रही थीं। छोटी बहन रोते हुए कहती है कि जब मैं कल भाई की याद में रो रही थी तो मुझे मना कर दिया था कि बहन आज मत रो कल रोएंगे नहीं तो मां की तबीयत बिगड़ जाएगी। बड़ी बहन समता देवी बार-बार रोते हुए सिर्फ एक ही बात कहती है जब भी भाई की का मां चेहरा देखेगी पता नहीं वह जिंदा रहेगी भी कि नहीं। बस मुझे यही चिंता है। वह बताती हैं कि घर में दो भाभी रहती हैं लेकिन दोनों मां के साथ काम करती रहती हैं उनको पता है कि उनका देवर इस दुनिया में नहीं रहा लेकिन उन्होंने दो दिन से अपनी सासू मां को महसूस भी नहीं होने दिया। 
शहीद जितेंद्र शर्मा

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