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आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम होना चिंताजनक : कुलपति
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एएमयू के विधि संकाय की लॉ सोसायटी द्वारा ‘महिला सशक्तिकरण लैंगिक समानता एवं अंतर्राष्ट्रीय विधि की भूमिका‘ विषय पर अंतर्राष्ट्रीय वर्चुअल सम्मेलन हुआ कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि विश्व के अनेक देशों की प्रधानमंत्री महिलाएं हैैं। उन्होंने कोविड-19 की इस महामारी में अपने देश की परिस्थितियों को बहुत अच्छे ढंग से संभाला है। उन्होंने कहा कि विश्व की आधी जनसंख्या महिलाओं की होने के बावजूद सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अत्यंत कम है, जो कि चिंता का विषय है।
मुख्य अतिथि वफा राशिद अल अलयानी, (अध्यक्ष सटूडेंट अफेयर विभाग यूनिवर्सिटी आफ बोरैमी, ओमान) ने कहा कि लैंगिक समानता मात्र कागजों में ही नहीं होनी चाहिए, बल्कि वो सचमुच होनी चाहिए। की-नोट स्पीकर नम्रता प्रधान (विजिटिंग प्रोफेसर रॉयाल यूनिवर्सिटी आफ भूटान) ने कहा कि भूटान में महिलाएं आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों में आगे आ रही है। संघर्ष और उन्नति की दास्तान लिख रही हैं। उन्होंने कहा कि भूटान की महिला स्वास्थ मंत्री ने जिस प्रकार भूटान में कोविड-19 महामारी का सामना किया है, वह सराहनीय है। अध्यक्षता करते हुए कांफ्रेंस डायरेक्टर, प्रोफेसर शकील अहमद समदानी (डीन विधि संकाय) ने कहा कि इस्लाम विश्व का पहला ऐसा धर्म है, जिसने 1425 वर्ष पहले महिलाओं को समानता का अधिकार दिया। संपत्ति का अधिकार पूरे विश्व में 20 वीं शताब्दी में जाकर मिला। परंतु इस्लाम में यह अधिकार बहुत पहले दे दिया।
प्रोफेसर समदानी ने कहा कि युद्ध में और सशस्त्र संघर्ष में सबसे अधिक उत्पीड़न महिलाओं का होता है। इसलिए हर हाल में युद्ध रोकने का प्रयास करना चाहिए। मांद अतिथि डा. सदफ खान (प्रिंसेज नोरा यूनिवर्सिटी, सऊदी अरब) ने कहा कि पिछले कई वर्षों में सऊदी अरब में महिलाओं के मान-सम्मान में इजाफा हुआ है और वो शिक्षा एवं व्यवसाय में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। डा. शाद अहमद खान (यूनिवर्सिटी ऑफ बोरौमी, ओमान) ने कहा कि यह हर्ष की बात है कि ओमान में 42 प्रतिशत महिलाएं नौकरियों में हैं। कार्यक्रम में अंबर तनवीर, सोम्या गोयल, अलवीना रईस खान, समरा हाशिम, शुभम कुमार, पवन वार्ष्णेय, हुनैन खालिद, चंदन गुप्ता, शोएब अली, एडवोकेट, तुषार वार्ष्णेय, मुईज आदि का योगदान रहा।
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मुख्य अतिथि वफा राशिद अल अलयानी, (अध्यक्ष सटूडेंट अफेयर विभाग यूनिवर्सिटी आफ बोरैमी, ओमान) ने कहा कि लैंगिक समानता मात्र कागजों में ही नहीं होनी चाहिए, बल्कि वो सचमुच होनी चाहिए। की-नोट स्पीकर नम्रता प्रधान (विजिटिंग प्रोफेसर रॉयाल यूनिवर्सिटी आफ भूटान) ने कहा कि भूटान में महिलाएं आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों में आगे आ रही है। संघर्ष और उन्नति की दास्तान लिख रही हैं। उन्होंने कहा कि भूटान की महिला स्वास्थ मंत्री ने जिस प्रकार भूटान में कोविड-19 महामारी का सामना किया है, वह सराहनीय है। अध्यक्षता करते हुए कांफ्रेंस डायरेक्टर, प्रोफेसर शकील अहमद समदानी (डीन विधि संकाय) ने कहा कि इस्लाम विश्व का पहला ऐसा धर्म है, जिसने 1425 वर्ष पहले महिलाओं को समानता का अधिकार दिया। संपत्ति का अधिकार पूरे विश्व में 20 वीं शताब्दी में जाकर मिला। परंतु इस्लाम में यह अधिकार बहुत पहले दे दिया।
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प्रोफेसर समदानी ने कहा कि युद्ध में और सशस्त्र संघर्ष में सबसे अधिक उत्पीड़न महिलाओं का होता है। इसलिए हर हाल में युद्ध रोकने का प्रयास करना चाहिए। मांद अतिथि डा. सदफ खान (प्रिंसेज नोरा यूनिवर्सिटी, सऊदी अरब) ने कहा कि पिछले कई वर्षों में सऊदी अरब में महिलाओं के मान-सम्मान में इजाफा हुआ है और वो शिक्षा एवं व्यवसाय में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। डा. शाद अहमद खान (यूनिवर्सिटी ऑफ बोरौमी, ओमान) ने कहा कि यह हर्ष की बात है कि ओमान में 42 प्रतिशत महिलाएं नौकरियों में हैं। कार्यक्रम में अंबर तनवीर, सोम्या गोयल, अलवीना रईस खान, समरा हाशिम, शुभम कुमार, पवन वार्ष्णेय, हुनैन खालिद, चंदन गुप्ता, शोएब अली, एडवोकेट, तुषार वार्ष्णेय, मुईज आदि का योगदान रहा।
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