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9 लाख रुपये रोजाना के घाटे में दौड़ रही अलीगढ़-हाथरस की रोडवेज की बसें

Sat, 06 Oct 2018 01:24 AM IST
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Updated Sat, 06 Oct 2018 01:24 AM IST
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Los autobuses de las carreteras Aligarh-Hathras operan diariamente en pérdidas de 9 rupias lakh
रोडवेज के रंग में डग्गामार बस - फोटो : अमर उजाला
रोडवेज में 120 करोड़ रुपये के फर्जी टिकट घोटाले और उसको संचालित कराने वाले माफिया राज का फिलहाल अंत हो चुका है। इस मामले में 14 अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है और 50 से अधिक ड्राइवर कंडक्टरों की संविदा समाप्त हो चुकी है। अब आप भी जानना चाहते होंगे कि आखिर फर्जी टिकट कैसे बनता था..? दरअसल, फर्जी टिकट जैसी कोई चीज थी नहीं।
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हां, इस घोटाले में शामिल लोग बस मुसाफिरों को टिकट की जगह इलेक्ट्रानिक टिकट मशीन से निकलने वाली कलैक्शन रिपोर्ट को टिकट बता कर थमा देते थे। यानी.. आप ऐसे समझ सकते हैं कि यूपी-81 जेडएक्स नंबर की बस गांधीपार्क बस स्टैंड से अलीगढ़ से बुलंदशहर के लिए चली और उसमें 50 यात्री सवार हैं। तो फर्जीवाड़ा करने वाले माफिया का गुर्गा कंडक्टर 10 मुसाफिरों को असली टिकट देता और बाकी 40 को टिकट के नाम पर ईटीएम से निकलने वाली टिकटनुमा ‘कलैक्शन रिपोर्ट’ दे देता था।
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इस तरह से रोडवेज को किराये के नाम पर 67 रुपये प्रति फुल टिकट की दर से दस मुसाफिरों के कुल 670 रुपये मिलते। बाकी 40 मुसाफिरों के 2680 रुपये माफिया की जेब में चले जाते। अलीगढ़ से मथुरा, आगरा, हाथरस आदि जगहों पर संचालित माफिया से जुड़ी 50 बसों में रोजाना यही खेल होता। अलीगढ़ परिक्षेत्र के सात बस डिपो में चलने वाली 684 बसों में रोजाना 90 हजार मुसाफिर अपनी यात्रा का टिकट कटाते हैं।
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ये मुसाफिर अपनी गाढ़ी कमाई से रोडवेज को हर दिन 66 लाख रुपये टिकट के मद में देते हैं। इसके बाद भी अलीगढ़ रोडवेज की बसें वर्तमान में रोजाना 9 लाख रुपये घाटे में चल रही हैं। क्योंकि इसका एक दिन का खर्च 75 लाख रुपये और कमाई 66 लाख रुपये है। एआरएम फायनेंस यूपी सिंह कहते हैं कि सितंबर महीने में अलीगढ़ परिक्षेत्र में डेढ़ करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। जिसकी कई वजह रही हैं। इससे पहले के महीनों में फायदा भी हुआ है।

आप भी जानिए... असली और नकली टिकट का अंतर
असली टिकट में यात्रा का पूरा ब्यौरा कुल 11 लाइनों में अंकित होता हैै। जिसमें पहली लाइन में यूपीएसआरटीसी लिखा होता है। दूसरी लाइन में अलीगढ़ या संबंधित डिपो का नाम, तीसरी लाइन में टिकट का नंबर, तारीख और समय होता है। चौथी लाइन में बस का प्रकार साधारण, एसी, स्कैनिया, जनरथ या वोल्वो लिखा होता है। इसके पास ही बस का पूरा नंबर और ईटीएम मशीन का साफ्टवेयर वर्जन नंबर होता है। पांचवीं लाइन में यात्रा शुरू करने और गंतव्य बस स्टैंड का नाम होता है। छठवीं लाइन में यात्रा का कुल किमी लिखा होता है। सातवीं लाइन में टिकट बनवाने वाले यात्री की संख्या और उनके अनुसार किराया होता है। आठवीं लाइन में ईवे बिल नंबर और ईटीएम मशीन नंबर होता है। नौंवी लाइन में लिखा होता है.. आपका अपना साथी। दसवीं लाइन में नाट ट्रांसफरेबल यानी ये टिकट किसी को दिया नहीं जा सकता है। 11वीं लाइन में हेल्पलाइन नंबर  800-180-2877 लिखा होता है। रोडवेज के असली टिकट में इतना ब्यौरा होता है जो आपको ईटीएम से दी जाती है। अगर आपने किसी कार्ड या रोडवेज में मान्यता प्राप्त किसी प्रमाण पत्र का जिक्र किया है तो आपके टिकट पर उसका भी ब्यौरा दर्ज होगा।
इससे उलट टिकट के नाम पर दी जाने वाली टिकटनुमा ‘कलैक्शन रिपोर्ट’ में दो से तीन लाइन का संक्षिप्त ब्यौरा होता है। जिसमें यात्रा शुरू करने से गंतव्य स्टेशन का जिक्र, किमी और किराया अंकित होता है। इसमें टिकट नंबर, दिनांक, समय, ईटीएम मशीन नंबर, बस नंबर, ईटीएम का वर्जन नंबर, ईवे बिल नंबर आदि कुछ नहीं होता है। मुसाफिर जल्दबाजी में टिकट में अपने किराये की रकम और स्टेशन का नाम देख कर उसे रख लेते हैं। बहस करने पर कंडक्टर दबंगई से उनको खामोश करा देते हैं।


अलीगढ़ में ईटीएम का सफर
1-वर्ष 2008-09 में इलेक्ट्रानिक टिकट देने के लिए पहली बार रोडवेज ने अलीगढ़ परिक्षेत्र में माइक्रो-एफएक्स कंपनी की 450 ईटीएम लगर्वाइं
2-05 वर्ष तक माइक्रो-एफएक्स मशीनों को चलाया गया, बहुत अधिक शिकायत होने पर इसको हटा कर मुंबई की ट्राईमैक्स ईटीएम को लाया गया
3-वर्ष 2013-14 में मुंबई की ट्राइमैक्स कंपनी की 700 ईटीएम अलीगढ़ परिक्षेत्र की कुल 574 बसों में लगाई गई, संचालन शुरू करा दिया गया
4-वर्तमान में अलीगढ़ रीजन की कुल 684 बसों में 855 ट्राईमैक्स ईटीएम ऑनलाइन मानीटरिंग के साथ कार्यरत, समय समय पर बदलती हैं मशीनें
5-वर्ष 2016 में फर्जी टिकट घोटाले के दौरान ही शिकायत मिलने पर ट्राईमैक्स कंपनी की कुल 144 ईटीएम मशीनों को बदला गया, नई मशीनें आईं
6-ट्राईमैक्स कंपनी की एक ईटीएम मशीन की कीमत 20 हजार 765 रुपये तक आती है, इसी कीमत पर अलीगढ़ परिक्षेत्र में इन मशीनों को लगाया गया

ईटीएम 28 तरह की रिपोर्ट देती है : शाहिद 
ट्राईमैक्स कंपनी के टीम लीडर शाहिद परवेज ने बताया कि जब भी किसी रूट पर किसी बस में यात्रियों की संख्या अचानक कम होती है। उसका टिकट कलैक्शन रुपयों में कम होता है तो इसकी रिपोर्ट दूसरे दिन ही विभागीय अधिकारियों को सौंप दी जाती है। इसके बाद उस मामले में कार्रवाई करना विभागीय अधिकारियों का काम है। रोडवेज अलीगढ़ परिक्षेत्र में हुए घोटाले के दौरान भी कई बार बसों की अचानक घटी आय की रिपोर्ट दी गई, लेकिन स्थानीय विभागीय अधिकारियों ने उस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। अगर अधिकारी बसवार रिपोर्ट देखना चाहत तो एक एक बस, एक एक मशीन की पूरी रिपोर्ट मौजूद रहती है। जिसके आधार पर सब कुछ सामने ही देखा जा सकता है।
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