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साक्षरता दिवस : अक्षर ज्ञान से गरीबों के अंधेरे जीवन में कर रहे उजियारा
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इकराम वारिस
तालीम, जिंदगी जीने का सलीका सिखाती है। तालीम एक ऐसी कुंजी है, जिससे हर कामयाबी का ताला खोला जा सकता है। जिले ने 67.5 प्रतिशत साक्षरता होने पर पहला स्थान हासिल कर लिया है। अलीगढ़ की साक्षरता दर बढ़ाने में ऐसे भी शिक्षा वीर लगे हैं, जो बिना किसी इमदाद के अक्षर ज्ञान से ड्रॉप आउट और मलिन बस्तियों के बच्चों के जीवन में उजियारा करने में जुटे हैं।
मलिन बस्ती के बच्चों को पढ़ा रहा आजाद फाउंडेशन
महानगर के हसन मंजिल आमिर निशां में गरीब और ड्रॉप आउट बच्चों को सामाजिक संस्था आजाद फाउंडेशन मुफ्त में अक्षर ज्ञान करा रहा है। कोरोना महामारी से आर्थिक तंगी की मार सबसे ज्यादा इन बच्चों की माताओं ने झेली। क्योंकि वह दूसरों के घरों में झाड़ू - पोछा का काम करती थीं। इस फाउंडेशन ने वर्ष 2018 में आमिर निशा स्थित मलिन बस्ती को गोद लिया और बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। पहले आईजी हॉल के पास मलिन बस्ती के बच्चों को पढ़ाया जाता था। अब उनकी झुग्गी झोंपड़ी हट गई है। इन दिनों हसन मंजिल में इन बच्चों के लिए पाठशाला लग रही है। फाउंडेशन की अध्यक्ष शाहनीला व सचिव शाजिया सिद्दीकी बताती हैं कि हसन मंजिल में 20-25 बच्चे हैं, जिन्हें पढ़ाया जा रहा है। जब बच्चों को अक्षर ज्ञान हो जाता है, तब उन्हें निजी विद्यालय में प्रवेश दिला दिया जाता है।
ड्रॉप आउट बच्चों में भर रहे ज्ञान का सागर
रेलवे स्टेशन के पास स्काउट हट में घुमंतू परिवार के बच्चों को निशुल्क अक्षर ज्ञान कराया जा रहा है। राग ड्रीम्स वेवर्स एसोसिएशन के सह संस्थापक सागर सिसौदिया अपनी टीम के साथ इन बच्चों में ज्ञान का सागर भर रहे हैं। सागर बताते हैं कि वर्ष 2017 में उन्होंने ऐसे बच्चों के बारे में जाना, जो किसी अपराध में सजा पा चुके हैं या सड़कों पर खेल रहे हैं। यह देखकर वह आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने तय किया कि शिक्षित करके उन्हें आत्म निर्भर बनाया जा सकता है। अब रेलवे स्टेशन के पास 80-90 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, जो ड्रॉप आउट या मलिन बस्ती से संबंध रखते हैं। वह पहले बच्चों के अभिभावकों से मिलते हैं और उन्हें पढ़ाई का महत्व बताते हैं। जब वह तैयार हो जाते हैं, तभी बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। कोरोना काल के दो साल बाद अब अब फिर से पढ़ाई शुरू हो गई है।
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तालीम, जिंदगी जीने का सलीका सिखाती है। तालीम एक ऐसी कुंजी है, जिससे हर कामयाबी का ताला खोला जा सकता है। जिले ने 67.5 प्रतिशत साक्षरता होने पर पहला स्थान हासिल कर लिया है। अलीगढ़ की साक्षरता दर बढ़ाने में ऐसे भी शिक्षा वीर लगे हैं, जो बिना किसी इमदाद के अक्षर ज्ञान से ड्रॉप आउट और मलिन बस्तियों के बच्चों के जीवन में उजियारा करने में जुटे हैं।
मलिन बस्ती के बच्चों को पढ़ा रहा आजाद फाउंडेशन
महानगर के हसन मंजिल आमिर निशां में गरीब और ड्रॉप आउट बच्चों को सामाजिक संस्था आजाद फाउंडेशन मुफ्त में अक्षर ज्ञान करा रहा है। कोरोना महामारी से आर्थिक तंगी की मार सबसे ज्यादा इन बच्चों की माताओं ने झेली। क्योंकि वह दूसरों के घरों में झाड़ू - पोछा का काम करती थीं। इस फाउंडेशन ने वर्ष 2018 में आमिर निशा स्थित मलिन बस्ती को गोद लिया और बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। पहले आईजी हॉल के पास मलिन बस्ती के बच्चों को पढ़ाया जाता था। अब उनकी झुग्गी झोंपड़ी हट गई है। इन दिनों हसन मंजिल में इन बच्चों के लिए पाठशाला लग रही है। फाउंडेशन की अध्यक्ष शाहनीला व सचिव शाजिया सिद्दीकी बताती हैं कि हसन मंजिल में 20-25 बच्चे हैं, जिन्हें पढ़ाया जा रहा है। जब बच्चों को अक्षर ज्ञान हो जाता है, तब उन्हें निजी विद्यालय में प्रवेश दिला दिया जाता है।
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ड्रॉप आउट बच्चों में भर रहे ज्ञान का सागर
रेलवे स्टेशन के पास स्काउट हट में घुमंतू परिवार के बच्चों को निशुल्क अक्षर ज्ञान कराया जा रहा है। राग ड्रीम्स वेवर्स एसोसिएशन के सह संस्थापक सागर सिसौदिया अपनी टीम के साथ इन बच्चों में ज्ञान का सागर भर रहे हैं। सागर बताते हैं कि वर्ष 2017 में उन्होंने ऐसे बच्चों के बारे में जाना, जो किसी अपराध में सजा पा चुके हैं या सड़कों पर खेल रहे हैं। यह देखकर वह आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने तय किया कि शिक्षित करके उन्हें आत्म निर्भर बनाया जा सकता है। अब रेलवे स्टेशन के पास 80-90 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, जो ड्रॉप आउट या मलिन बस्ती से संबंध रखते हैं। वह पहले बच्चों के अभिभावकों से मिलते हैं और उन्हें पढ़ाई का महत्व बताते हैं। जब वह तैयार हो जाते हैं, तभी बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। कोरोना काल के दो साल बाद अब अब फिर से पढ़ाई शुरू हो गई है।
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