Aligarh: एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए अधिग्रहीत होगी निजी भूमि, जेवर मॉडल पर होगा अधिग्रहण, शासन की मुहर
अलीगढ़ एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए कुल 275 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। इसमें 31 हेक्टेयर सरकारी और 244 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल है, जिसे करीब एक हजार किसानों से अधिग्रहीत किया जाना है।
विस्तार
बहुप्रतीक्षित अलीगढ़ एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए भूमि खरीद में आ रहीं जटिलताओं को देखते हुए प्रदेश सरकार ने अब शेष 59 हेक्टेयर निजी भूमि के सीधे अधिग्रहण (डायरेक्ट एक्विजिशिन) की प्रक्रिया को अपनाने की अनुमति दे दी है। इस पूरी परियोजना पर 738 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिससे जिले की हवाई कनेक्टिविटी का सपना जल्द पूरा हो सकेगा।
विस्तारीकरण की इस 275 हेक्टेयर की परियोजना में 59 हेक्टेयर पर पेच फंसा हुआ था। अलीगढ़ एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए कुल 275 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। इसमें 31 हेक्टेयर सरकारी और 244 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल है, जिसे करीब एक हजार किसानों से अधिग्रहीत किया जाना है। प्रशासन ने दो साल पहले सहमति आधारित खरीद के चरण में जमीन को खरीदना शुरू किया था, जहां किसानों को सर्किल रेट से चार गुना ज्यादा मुआवजा दिया गया। इस पहल से अब तक 185 हेक्टेयर भूमि कामयाब तरीके से खरीदी जा चुकी है।
एयरपोर्ट में खरीद से शेष जमीन के अधिग्रहण की अनुमति मिल गई है। अब स्थानीय स्तर पर इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसमें सामाजिक समाघात निर्धारण (एसआईए) के सर्वे के लिए एसडीएम कोल महिमा राजपूत को सर्वे अधिकारी नामित किया गया है।-प्रमोद कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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समस्या यहां पर थी
समस्या शेष 59 हेक्टेयर निजी जमीन के अधिग्रहण में आ रही थी, जिसके कारण सीधे खरीद संभव नहीं हो पा रही थी। यह समस्या इसलिए आ रही थी कि कई मामलों पर न्यायालयों में सुनवाई चल रही है। बताया गया है कि लगभग 15 हेक्टेयर में ऐसे प्लॉट हैं, जिनके बैनामे तो हो चुके हैं, लेकिन मालिकाना हक अभी भी खतौनी (राजस्व रिकॉर्ड) में दर्ज नहीं है। इसके अलावा कुछ जमीनें कृषि श्रेणी की हैं, लेकिन उनके स्वामी आवासीय दर से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। कुछ भूखंडों पर मकान बने हुए हैं, जिससे मामला और जटिल हो गया है।
जेवर मॉडल पर होगा अधिग्रहण, शासन की मुहर
इन जटिलताओं को पार करने के लिए जिला प्रशासन ने जेवर एयरपोर्ट मॉडल को आधार बनाते हुए सीधे अधिग्रहण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था इसको अब शासन स्तर से अनुमति मिल गई है।