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मैं रहूं या ना रहूं भारत रहना चाहिए...
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कोहिनूर मंच पर एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार ।
- फोटो : CITY OFFICE
राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी में रविवार की रात कोहिनूर मंच पर देशभक्ति से ओतप्रोत गीत, संगीत और नृत्य की त्रिवेणी ने समा बांध दिया।
एक शाम शहीदों के नाम से हुए इस कार्यक्त्रस्म में बुलंदशहर के गौरव किशोर शर्मा और उनके ग्रुप के द्वारा एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी गई। जिसको देखकर लोग देश भक्ति के समुंदर में डूब गए।
कार्यक्त्रस्म में 1971 के भारत-पाक युद्ध और करगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को सम्मानित भी किया गया ।
कार्यक्रम की शुरुआत अगम अग्रवाल ने मैं रहूं या न रहूं, भारत रहना चाहिए गीत प्रस्तुत करके की। अगम अग्रवाल ए आर रहमान के समूह के साथ जुड़कर लंबे समय तक काम कर चुके हैं। वह अपने आध्यात्मिक गायन के लिए बेहद प्रसिद्ध हैं।
इसके बाद कपिल तिवारी ने फिल्म कर्मा का प्रसिद्ध गीत मेरा कर्मा तू मेरा धर्मा तू प्रस्तुत करके सुनने वालों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद कार्यक्रम में ओम सागर ने फिल्म बॉर्डर के प्रसिद्ध गीत संदेशे आते हैं संदेशे जाते हैं पेश किया तो कोहिनूर पंडाल में बैठे कुछ लोगों की आंखें नम हो गईं। इसी श्रंखला में भूमिका मलिक ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का लिखा गीत वंदे मातरम प्रस्तुत किया जिससे पूरे पंडाल में वातावरण ओजस्वी हो गया। देर रात तक कोहिनूर पंडाल में देश भक्ति की बयार बहती रही।
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1971 के भारत-पाक युद्ध और करगिल युद्ध में शहीद के परिजनों को सम्मानित किया
एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्त्रस्म में 1971 और कारगिल युद्ध के वीर शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया गया।
इनमें 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए महार रेजीमेंट के स्वर्गीय पूरन सिंह की पत्नी अनोखी देवी, जाट रेजीमेंट के स्वर्गीय राजेंद्र सिंह की पत्नी अंगूरी देवी, जाट रेजीमेंट के स्वर्गीय हरि सिंह की पत्नी माया देवी, इंडियन नेवी के स्वर्गीय एस बी एस चौहान की पत्नी नरबड़ा देवी और जाट रेजिमेंट के स्वर्गीय राजपाल सिंह की पत्नी रेशम को सम्मानित किया गया।
इसके अलावा कारगिल युद्ध में शहीद हुए जाट रेजीमेंट के नरेश सिंह के माता पिता राजेंद्र सिंह और रूपमती देवी का भी अभिनंदन किया गया। इस दौरान शहीदों के परिजनों के साथ-साथ पंडाल में मौजूद लोगों की भी आंखें नम हो गई।
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एक शाम शहीदों के नाम से हुए इस कार्यक्त्रस्म में बुलंदशहर के गौरव किशोर शर्मा और उनके ग्रुप के द्वारा एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी गई। जिसको देखकर लोग देश भक्ति के समुंदर में डूब गए।
कार्यक्त्रस्म में 1971 के भारत-पाक युद्ध और करगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को सम्मानित भी किया गया ।
कार्यक्रम की शुरुआत अगम अग्रवाल ने मैं रहूं या न रहूं, भारत रहना चाहिए गीत प्रस्तुत करके की। अगम अग्रवाल ए आर रहमान के समूह के साथ जुड़कर लंबे समय तक काम कर चुके हैं। वह अपने आध्यात्मिक गायन के लिए बेहद प्रसिद्ध हैं।
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इसके बाद कपिल तिवारी ने फिल्म कर्मा का प्रसिद्ध गीत मेरा कर्मा तू मेरा धर्मा तू प्रस्तुत करके सुनने वालों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद कार्यक्रम में ओम सागर ने फिल्म बॉर्डर के प्रसिद्ध गीत संदेशे आते हैं संदेशे जाते हैं पेश किया तो कोहिनूर पंडाल में बैठे कुछ लोगों की आंखें नम हो गईं। इसी श्रंखला में भूमिका मलिक ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का लिखा गीत वंदे मातरम प्रस्तुत किया जिससे पूरे पंडाल में वातावरण ओजस्वी हो गया। देर रात तक कोहिनूर पंडाल में देश भक्ति की बयार बहती रही।
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1971 के भारत-पाक युद्ध और करगिल युद्ध में शहीद के परिजनों को सम्मानित किया
एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्त्रस्म में 1971 और कारगिल युद्ध के वीर शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया गया।
इनमें 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए महार रेजीमेंट के स्वर्गीय पूरन सिंह की पत्नी अनोखी देवी, जाट रेजीमेंट के स्वर्गीय राजेंद्र सिंह की पत्नी अंगूरी देवी, जाट रेजीमेंट के स्वर्गीय हरि सिंह की पत्नी माया देवी, इंडियन नेवी के स्वर्गीय एस बी एस चौहान की पत्नी नरबड़ा देवी और जाट रेजिमेंट के स्वर्गीय राजपाल सिंह की पत्नी रेशम को सम्मानित किया गया।
इसके अलावा कारगिल युद्ध में शहीद हुए जाट रेजीमेंट के नरेश सिंह के माता पिता राजेंद्र सिंह और रूपमती देवी का भी अभिनंदन किया गया। इस दौरान शहीदों के परिजनों के साथ-साथ पंडाल में मौजूद लोगों की भी आंखें नम हो गई।