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बेटी होकर बेटे का फर्ज निभाया, सिपाही बन पिता का मान बढ़ाया

Tue, 09 Mar 2021 01:41 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Mar 2021 01:41 AM IST
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kajal make success his father dream
आरपीएफ की महिला सिपाही काजल निवासी रोहतक, हरियाणा - फोटो : CITY OFFICE
हरियाणा के रोहतक जिले की काजल महिला सशक्तीकरण की मिसाल है। काजल ने न सिर्फ अपने फौजी पिता की अंतिम इच्छा को पूरा किया। बल्कि, परिवार को कभी बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी। 2012 में पिता की मौत के बाद आर्थिक स्थिति गड़बड़ाई तो मां के साथ मिलकर किराना की दुकान खोली, उसकी आमदनी से खुद और अपनी पांच बहनों की पढ़ाई का खर्च उठाया। काजल की मेहनत रंग लाई और वह आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) में भर्ती हो गईं। सिपाही काजल अलीगढ़ जंक्शन पर तैनात हैं। मेरी सहेली टीम का हिस्सा बनकर महिला यात्रियों की सुरक्षा कर रही हैं।
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21 वर्षीय काजल रोहतक जिले के लाखन माजरा गांव की रहने वाली हैं। काजल ने बताया, वह छह बहनें हैं। परिवार में कोई भाई नहीं है। पिता सुरेंद्र सिंह फौज में थे। पिता का सपना था कि उनका बेटा भी फौज में भर्ती होकर परिवार का मान बढ़ाए। मगर, बेटा न होने पर उन्होंने हम बहनों से फौज में शामिल होने की इच्छा जाहिर की।
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सेवानिवृत्त होने के बाद 2012 में उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई। पिता की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट आ गया। काजल ने बताया, उस समय वह 10वीं की पढ़ाई कर रही थी। बड़ी बहन ज्योति पुलिस में भर्ती होने की तैयारी कर रही थी। मां शीला देवी के कंधों बेटियों को पालने की जिम्मेदारी आ गई। ऐसे में मां के साथ मिलकर किराना की दुकान खोली।
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उससे होने वाली कमाई से ज्योति की पढ़ाई व पुलिस ट्रेनिंग का खर्च निकाला। साथ ही अपनी व छोटी बहनों सुशील, शीतल, सरिना, तमन्ना की पढ़ाई को जारी रखा। 2016 में ज्योति हरियाणा पुलिस में चयनित हो गईं। इससे पांचों बहनों का उत्साह बढ़ा। काजल ने बताया, 2017 में बीएससी की पढ़ाई पूरी की। 2019-20 में उनका चयन आरपीएफ में सिपाही पद पर हो गया।

महिला यात्रियों की हैं सहेली
आरपीएफ अलीगढ़ पोस्ट कमांडर चमन सिंह तोमर ने बताया कि काजल आरपीएफ की मेरी सहेली टीम का हिस्सा हैं। उनके पास अलीगढ़ जंक्शन पर ठहराव वाली ट्रेनों में अकेले यात्रा करने वाली प्रत्येक महिला यात्री का डाटा रहता है। यात्रा शुरू होने से लेकर खत्म होने तक वह लगातार उनका फॉलोअप लेती हैं। जब भी स्टेशन पर कोई अकेली महिला यात्री दिखती है, तो उसे घर तक पहुंचाने में भी मदद करती हैं।
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