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जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल..
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Mon, 16 Jan 2017 02:11 AM IST
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Jo Bole So Nihal, Sat Sri Akal ..
- फोटो : Dig Vishal
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खालसा पंथ की स्थापना करने वाले सिखों के दसवें गुरु श्रीगुरु गोविंद सिंह का 350 वां प्रकाशोत्सव रविवार को हर्ष, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देहली गेट स्थित प्राचीन गुरुद्वारा से एक भव्य नगर कीर्तन निकाला गया, जो कि शहर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ बैकुंठ नगर स्थित गुरुद्वारे पर संपन्न हुआ।
करतब बाजों ने अपने करतब दिखाए, जिसे देखकर लोगों ने दांतों तले अंगुली दबा ली। इस दौरान भंगड़ा आकर्षण का केंद्र रहा। इस नगर कीर्तन के दौरान जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल का जयघोष होता रहा। पंज प्यारों का दर्शन विशेष श्रद्धा का केंद्र रहा। दिल्ली से बुलाई गई विशेष मिनी बस में सवार ‘बाबा की पालकी’ के दर्शनों के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े।
रविवार को सुबह 10 बजे नगर कीर्तन का शुभारंभ सिख मिशन हापुड़ के सनी हरपाल सिंह ने फीता काटकर किया। इसके बाद नगर कीर्तन बैकुंठ नगर स्थित गुरुद्वारे के लिए रवाना हुआ। देहली गेट पर ही महापौर शकुंतला भारती ने नगर कीर्तन में शिरकत की। नगर कीर्तन देहली गेट से शुरू होकर घुड़ियाबाग, उदय सिंह जैन रोड, बारहद्वारी,पत्थर बाजार, सेठ मीरीलाल प्याऊ, रेलवे रोड, कंपनी बाग, गांधी पार्क बस स्टेंड, पड़वा दुबे, मीनाक्षी पुल, सुदामापुरी होते हुए बैकुंठ नगर स्थित गुरुद्वारे पहुंचा।
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नगर कीर्तन में चल रहे कमेटी के पदाधिकारियों का विभिन्न स्थानों पर विभिन्न संगठनों के द्वारा स्वागत किया गया। नगर कीर्तन में शामिल लोगों को जलपान और फलाहार भी कराया। कीर्तन यात्रा में समाज की महिलाएं कीर्तन करते हुई चल रही थीं। ‘देहि शिवा वर मोहि इहे, शुभ करमन ते कबहूं न टरों’ भजन प्रस्तुत किए गए। लगभग एक दर्जन से अधिक स्कूलों के बच्चे अपने बैंड पर प्रस्तुतियां दे रहे थे। स्कूली की बच्चियां डांडिया नृत्य करती हुई चल रही थी। ढोल नगाड़ों की धुन पर पंजाब का मशहूर भंगड़ा नृत्य भी प्रस्तुत किया गया। धार्मिक धुन के साथ शबद कीर्तन के स्वर भी गूंजे। बच्चों द्वारा यात्रा में दी गई प्रस्तुतियां सभी के आकर्षण का केंद्र रहीं। इसके साथ ही युवाओं द्वारा की गई आतिशबाजी को भी लोगों ने काफी सराहा।
विशाल नगर कीर्तन में वार्षिक नगर कीर्तन कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरविंदर सिंह होरा, सचिव सरदार अजीत सिंह, कोषाध्यक्ष सरदार कमलजीत सिंह टुटेजा, सरप्रस्थ सरदार गुरुदयाल सिंह जुनेजा, गुरुपक्ष सिंह, इंद्रजीत सिंह बिल्ला, रमेश चंद सिंघल, सुशील चौधरी, हरभजन सिंह सचदेव (बिरजू भाई), हरदयाल सिंह खालसा, संदीप, सरदार मक्खन सिंह अरोड़ा, सरदार प्यारा सिंह, सरदार बलवंत सिंह, सरदार महेंद्र सिंह गुलाटी, सरदार अमर सिंह, भगवान सिंह भीलवाड़ा, अतर सिंह, सरदार इंद्रजीत सिंह आदि साथ चल रहे थे।
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करतब बाजों ने अपने करतब दिखाए, जिसे देखकर लोगों ने दांतों तले अंगुली दबा ली। इस दौरान भंगड़ा आकर्षण का केंद्र रहा। इस नगर कीर्तन के दौरान जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल का जयघोष होता रहा। पंज प्यारों का दर्शन विशेष श्रद्धा का केंद्र रहा। दिल्ली से बुलाई गई विशेष मिनी बस में सवार ‘बाबा की पालकी’ के दर्शनों के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े।
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रविवार को सुबह 10 बजे नगर कीर्तन का शुभारंभ सिख मिशन हापुड़ के सनी हरपाल सिंह ने फीता काटकर किया। इसके बाद नगर कीर्तन बैकुंठ नगर स्थित गुरुद्वारे के लिए रवाना हुआ। देहली गेट पर ही महापौर शकुंतला भारती ने नगर कीर्तन में शिरकत की। नगर कीर्तन देहली गेट से शुरू होकर घुड़ियाबाग, उदय सिंह जैन रोड, बारहद्वारी,पत्थर बाजार, सेठ मीरीलाल प्याऊ, रेलवे रोड, कंपनी बाग, गांधी पार्क बस स्टेंड, पड़वा दुबे, मीनाक्षी पुल, सुदामापुरी होते हुए बैकुंठ नगर स्थित गुरुद्वारे पहुंचा।
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नगर कीर्तन में चल रहे कमेटी के पदाधिकारियों का विभिन्न स्थानों पर विभिन्न संगठनों के द्वारा स्वागत किया गया। नगर कीर्तन में शामिल लोगों को जलपान और फलाहार भी कराया। कीर्तन यात्रा में समाज की महिलाएं कीर्तन करते हुई चल रही थीं। ‘देहि शिवा वर मोहि इहे, शुभ करमन ते कबहूं न टरों’ भजन प्रस्तुत किए गए। लगभग एक दर्जन से अधिक स्कूलों के बच्चे अपने बैंड पर प्रस्तुतियां दे रहे थे। स्कूली की बच्चियां डांडिया नृत्य करती हुई चल रही थी। ढोल नगाड़ों की धुन पर पंजाब का मशहूर भंगड़ा नृत्य भी प्रस्तुत किया गया। धार्मिक धुन के साथ शबद कीर्तन के स्वर भी गूंजे। बच्चों द्वारा यात्रा में दी गई प्रस्तुतियां सभी के आकर्षण का केंद्र रहीं। इसके साथ ही युवाओं द्वारा की गई आतिशबाजी को भी लोगों ने काफी सराहा।
विशाल नगर कीर्तन में वार्षिक नगर कीर्तन कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरविंदर सिंह होरा, सचिव सरदार अजीत सिंह, कोषाध्यक्ष सरदार कमलजीत सिंह टुटेजा, सरप्रस्थ सरदार गुरुदयाल सिंह जुनेजा, गुरुपक्ष सिंह, इंद्रजीत सिंह बिल्ला, रमेश चंद सिंघल, सुशील चौधरी, हरभजन सिंह सचदेव (बिरजू भाई), हरदयाल सिंह खालसा, संदीप, सरदार मक्खन सिंह अरोड़ा, सरदार प्यारा सिंह, सरदार बलवंत सिंह, सरदार महेंद्र सिंह गुलाटी, सरदार अमर सिंह, भगवान सिंह भीलवाड़ा, अतर सिंह, सरदार इंद्रजीत सिंह आदि साथ चल रहे थे।