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हमारी खामोशी ने जम्मू-कश्मीर को इस हालत में पहुंचाया : पुष्पेंद्र
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राष्ट्रवादी चिंतक पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ।
- फोटो : CITY OFFICE
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राष्ट्रवादी विचारक व वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि हमारी खामोशी ने जम्मू कश्मीर को इस हालत में पहुंचा दिया है, क्योंकि अनुच्छेद 370 के चलते वहां भारत का कानून नहीं लागू था। इसलिए हालात बद से बदतर होते चले गए। बहरहाल, देश में न्याय प्रणाली का भी विश्लेषण होने की जरूरत है।
वह बुधवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के 103वें जन्मदिवस पर सामाजिक संगठन आहुति की ओर से डीएस कॉलेज के सभागार में आयोजित गोष्ठी ‘अनुच्छेद 370 व 35ए की समाप्ति के उपरांत देश की चुनौतियां व हमारे दायित्व’ विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 व 35ए हटने से अब चुनौतियां और बढ़ गई हैं। इसलिए लंबी लड़ाई लड़नी है।
राष्ट्र के लिए जो काम होते हैं, वह बिना किसी पद की लालसा के के होते हैं। इस देश के लोग बहुत जज्बाती हैं, क्योंकि डेनमार्क, फ्रांस में कुछ होता है तो उसकी प्रतिक्रियाएं यहां होती हैं। मगर देश में सच कहने में की हिम्मत बड़ी देर में आती है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 का हटाना इस बात का उदाहरण है कि अगर राजनीतिक इच्छा शक्ति इस बात की परवाह नहीं करती कि सरकार का बहुमत है कि नहीं, तभी ऐसे कड़े फैसले लिए जाते हैं। पुष्पेंद्र ने जेएनयू की पूर्व शिक्षिका व इतिहासकार रोमिला थापर द्वारा भारतीय इतिहास में की गई मिलावट पर भी टिप्पणी की। कहा, जिस समय संसद में अनुच्छेद 370 पर चर्चा हो रही थी, उस समय डॉ. बीआर आंबेडकर संसद से उठकर चले गए थे। उन्होंने कहा कि 24 फरवरी 1994 को भारतीय संसद में एक प्रस्ताव पारित किया कि कश्मीर में केवल जो पाक अधिकृत कश्मीर में वही समस्या है। अब हमें उसी प्रस्ताव को सिर्फ लागू करना है। पुष्पेंद्र ने कहा कि दुनिया में आपको नोबल पुरस्कार मिल जाए, लेकिन घर का सम्मान सबसे बड़ा है।
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उन्होंने समान नागरिक संहिता की भी वकालत की। उधर, अनुच्छेद 370 के बाद एएमयू में विरोध होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिस संस्था में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के सूत्रधार जिन्ना की तस्वीर लगी हो, वहां विरोध के सुर उठ सकते हैं। यह उनकी मानसिकता दर्शाती है। देश में जम्मू-कश्मीर की तरह 500 जम्मू कश्मीर हैं। पुष्पेंद्र को अलीगढृ गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। एएमयू के छात्र विक्रांत जौहरी, सोनवीर सिंह, डॉ. निशित शर्मा, राजेश्वर सिंह, मोहन उपाध्याय आदि ने 11 पुराण भेंट किए।
गोष्ठी की अध्यक्षता समाजसेवी व निर्यातक आरके जिंदल ने की व संचालन आहुति के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने किया। गोष्ठी में सांसद सतीश गौतम, देवेन्द्र सक्सेना, चंद्र प्रकाश गुप्ता, ज्ञानेंद्र मिश्रा, रवींन्द्र वार्ष्णेय, जयप्रकाश सारस्वत, प्रभातदास गुप्ता, प्रो. केसी सिंघल, देवेंद्र सक्सेना, चंद्रप्रकाश गुप्ता, नीरव अरोड़ा, डॉ. विशन बहादुर सक्सेना, ज्ञानेंद्र मिश्रा, कुलदीप आर्य आदि मौजूद रहे।
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वह बुधवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के 103वें जन्मदिवस पर सामाजिक संगठन आहुति की ओर से डीएस कॉलेज के सभागार में आयोजित गोष्ठी ‘अनुच्छेद 370 व 35ए की समाप्ति के उपरांत देश की चुनौतियां व हमारे दायित्व’ विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 व 35ए हटने से अब चुनौतियां और बढ़ गई हैं। इसलिए लंबी लड़ाई लड़नी है।
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राष्ट्र के लिए जो काम होते हैं, वह बिना किसी पद की लालसा के के होते हैं। इस देश के लोग बहुत जज्बाती हैं, क्योंकि डेनमार्क, फ्रांस में कुछ होता है तो उसकी प्रतिक्रियाएं यहां होती हैं। मगर देश में सच कहने में की हिम्मत बड़ी देर में आती है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 का हटाना इस बात का उदाहरण है कि अगर राजनीतिक इच्छा शक्ति इस बात की परवाह नहीं करती कि सरकार का बहुमत है कि नहीं, तभी ऐसे कड़े फैसले लिए जाते हैं। पुष्पेंद्र ने जेएनयू की पूर्व शिक्षिका व इतिहासकार रोमिला थापर द्वारा भारतीय इतिहास में की गई मिलावट पर भी टिप्पणी की। कहा, जिस समय संसद में अनुच्छेद 370 पर चर्चा हो रही थी, उस समय डॉ. बीआर आंबेडकर संसद से उठकर चले गए थे। उन्होंने कहा कि 24 फरवरी 1994 को भारतीय संसद में एक प्रस्ताव पारित किया कि कश्मीर में केवल जो पाक अधिकृत कश्मीर में वही समस्या है। अब हमें उसी प्रस्ताव को सिर्फ लागू करना है। पुष्पेंद्र ने कहा कि दुनिया में आपको नोबल पुरस्कार मिल जाए, लेकिन घर का सम्मान सबसे बड़ा है।
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उन्होंने समान नागरिक संहिता की भी वकालत की। उधर, अनुच्छेद 370 के बाद एएमयू में विरोध होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिस संस्था में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के सूत्रधार जिन्ना की तस्वीर लगी हो, वहां विरोध के सुर उठ सकते हैं। यह उनकी मानसिकता दर्शाती है। देश में जम्मू-कश्मीर की तरह 500 जम्मू कश्मीर हैं। पुष्पेंद्र को अलीगढृ गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। एएमयू के छात्र विक्रांत जौहरी, सोनवीर सिंह, डॉ. निशित शर्मा, राजेश्वर सिंह, मोहन उपाध्याय आदि ने 11 पुराण भेंट किए।
गोष्ठी की अध्यक्षता समाजसेवी व निर्यातक आरके जिंदल ने की व संचालन आहुति के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने किया। गोष्ठी में सांसद सतीश गौतम, देवेन्द्र सक्सेना, चंद्र प्रकाश गुप्ता, ज्ञानेंद्र मिश्रा, रवींन्द्र वार्ष्णेय, जयप्रकाश सारस्वत, प्रभातदास गुप्ता, प्रो. केसी सिंघल, देवेंद्र सक्सेना, चंद्रप्रकाश गुप्ता, नीरव अरोड़ा, डॉ. विशन बहादुर सक्सेना, ज्ञानेंद्र मिश्रा, कुलदीप आर्य आदि मौजूद रहे।