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Aligarh News: आई मतदान की बेला...मतदाता खामोश, उम्मीदवार बेचैन
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धनीपुर मंडी में पोलिंग पार्टियों की रवानगी के दौरान ईवीएम लेकर जाते कर्मचारी। संवाद
- फोटो : samvad
शहर की सरकार के लिए आज बृहस्पतिवार को मतदान होने जा रहा है। एक पखवाड़े से चुनाव प्रचार जोर पकड़े हुए रहा। मगर, पहली बार देखने को मिला कि यह चुनाव बेहद शांत रहा। न किसी तरह का शोरगुल न कहीं कोई हायतौबा। मतदाता खामोश है, लेकिन उम्मीदवार बेचैन है। पहली बार इस चुनाव में न शराब पकड़े जाने या बंटने को लेकर शोर मचा और न नोटों की आवाजाही सामने आई।
पिछले चुनावों के अनुभवों व किस्सों पर गौर करें तो हर बार तकरार और टकराव होती रही है। किसी न किसी मुद्दे पर प्रत्याशी या समर्थक आमने-सामने आते रहे हैं। हालांकि इसे कानून व्यवस्था की सख्ती कहें या प्रत्याशियों का खुद का चुनाव प्रबंधन। इस बार पूरे चुनाव प्रचार में किसी तरह का विवाद सामने नहीं आया है।
अगर पुलिस की गतिविधियों की बात करें तो पूरे चुनाव में कहीं भी न तो शराब बंटने का शोर मचा और न कहीं पकड़ी गई। इसी तरह नोटों को लेकर भी कोई जानकारी नहीं आई, अन्यथा पूर्व में हमेशा कहीं न कहीं नोट पकड़े जाते रहे हैं। भले ही नोट प्रत्याशी या दल के नहीं होते थे। व्यापारी तक को नोट लेकर आवाजाही भारी पड़ती रही है। मगर इस बार कहीं भी ऐसा कुछ नहीं हुआ। मगर रात भर वोट रखाने का काम जरूर हर खेमे में चलता रहा।
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शराब बांटने का भी तरीका बदला...ठेकों को दिया ठेका
इस चुनाव में पहली बार देखने को मिला कि शराब पिलाने का ट्रेंड बदल गया। कस्बा खैर से मिली जानकारी के अनुसार, वहां शराब ठेकों से पहले से एक सौदा किया गया। इस सौदे के तहत चुनाव लड़ रहे खेमों ने नए नोटों की सीरीज की गड्डी खरीदी है और उसी सीरीज के नंबर ठेकों पर बता रखे गए हैं। अगर किसी को 20 रुपये का नोट देकर भेजा गया तो उस पर क्वार्टर, 50 रुपये के नोट पर हाफ व 100 रुपये के नोट पर पूरी बोतल मिल रही है। मतलब समर्थक को सिर्फ वह नोट लेकर ठेके पर देना है और बदले में शराब लेनी है। ठेके पर उस नोट के अनुसार एंट्री होगी और वही नोट वापस घूमकर चुनाव लड़ा रहे खेमे तक पहुंच जाएगा। इससे दोनों तरफ लिखा-पढ़ी में हिसाब रहेगा कि कितनी शराब खपत हुई। बाद में उसका भुगतान किया जाएगा। हालांकि अब ठेके बंद हैं। कल तक यह व्यवस्था लागू रही।
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पिछले चुनावों के अनुभवों व किस्सों पर गौर करें तो हर बार तकरार और टकराव होती रही है। किसी न किसी मुद्दे पर प्रत्याशी या समर्थक आमने-सामने आते रहे हैं। हालांकि इसे कानून व्यवस्था की सख्ती कहें या प्रत्याशियों का खुद का चुनाव प्रबंधन। इस बार पूरे चुनाव प्रचार में किसी तरह का विवाद सामने नहीं आया है।
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अगर पुलिस की गतिविधियों की बात करें तो पूरे चुनाव में कहीं भी न तो शराब बंटने का शोर मचा और न कहीं पकड़ी गई। इसी तरह नोटों को लेकर भी कोई जानकारी नहीं आई, अन्यथा पूर्व में हमेशा कहीं न कहीं नोट पकड़े जाते रहे हैं। भले ही नोट प्रत्याशी या दल के नहीं होते थे। व्यापारी तक को नोट लेकर आवाजाही भारी पड़ती रही है। मगर इस बार कहीं भी ऐसा कुछ नहीं हुआ। मगर रात भर वोट रखाने का काम जरूर हर खेमे में चलता रहा।
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शराब बांटने का भी तरीका बदला...ठेकों को दिया ठेका
इस चुनाव में पहली बार देखने को मिला कि शराब पिलाने का ट्रेंड बदल गया। कस्बा खैर से मिली जानकारी के अनुसार, वहां शराब ठेकों से पहले से एक सौदा किया गया। इस सौदे के तहत चुनाव लड़ रहे खेमों ने नए नोटों की सीरीज की गड्डी खरीदी है और उसी सीरीज के नंबर ठेकों पर बता रखे गए हैं। अगर किसी को 20 रुपये का नोट देकर भेजा गया तो उस पर क्वार्टर, 50 रुपये के नोट पर हाफ व 100 रुपये के नोट पर पूरी बोतल मिल रही है। मतलब समर्थक को सिर्फ वह नोट लेकर ठेके पर देना है और बदले में शराब लेनी है। ठेके पर उस नोट के अनुसार एंट्री होगी और वही नोट वापस घूमकर चुनाव लड़ा रहे खेमे तक पहुंच जाएगा। इससे दोनों तरफ लिखा-पढ़ी में हिसाब रहेगा कि कितनी शराब खपत हुई। बाद में उसका भुगतान किया जाएगा। हालांकि अब ठेके बंद हैं। कल तक यह व्यवस्था लागू रही।