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कारतूस चल गए खोखे ‘मिस’

Tue, 03 Mar 2020 01:36 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Mar 2020 01:36 AM IST
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In aligarh gun dealers are not following rules in selling bullets.
राहुल दक्ष
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शहर में उपद्रव के दौरान हुई फायरिंग से प्रशासन सकते में है। इसलिए देरी से सही, लेकिन आखिर शस्त्र दुकानों की सुध इन्हें आ ही गई। अब जब शहर में कारतूस बिक्री की स्थिति जानने के लिए छानबीन शुरु हुई तो खुद अधिकारी भी हैरान रह गए। अधिकतर शस्त्र दुकानदार कारतूस बिक्री के मानक पूरे नहीं कर रहे। कारतूस तो धड़ाधड़ बेचे जा रहे हैं, लेकिन उनके खोखों का हिसाब नहीं रख रहे। यह नियम है कि कारतूस बेचने से पुराने कारतूसों का हिसाब लेते हुए उनके खोल जमा कराए जाएं।

शहर में एक के बाद एक 20 ऐसे शस्त्र विक्रेता मिले हैं, जिनके पास कारतूस बिक्री का रिकार्ड पूरा नहीं है। सिटी मजिस्ट्रेट विनीत कुमार ने बताया कि नियमानुसार कारतूस लेते वक्त पुराने खोखे जमा कराने होते हैं। अगर किसी ने पूरे साल में 200 कारतूस लिए हैं तो उसको कम से कम 160 खाली खोखे जमा कराने पड़ेंगे। इसके बाद ही उसे नए कारतूस मिलेंगे। वापसी में 80 फीसदी खोखे का नियम इसलिए लागू है, क्योंकि 20 फीसदी के खो जाने की संभावना रहती है। किसी भी परिस्थिति में इससे कम संख्या नहीं होनी चाहिए। अलीगढ़ में अब तक 20 दुकानदार ऐसे मिले हैं, जिनके रिकार्ड में खाली खोखे का हिसाब गड़बड़ है। किसी को बिना खोखे तो किसी को 50 और 25 फीसदी खाली खोखे वापस करने पर ही कारतूस दे दिए गए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि इन सभी का रिकार्ड गहनता से जांचा जा रहा है। इस लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही बरतने वालों में देहली गेट, कोतवाली ऊपरकोट व क्वार्सी के कई दुकानदार शामिल हैं।
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कारतूस-हथियारों की स्थिति
-अलीगढ़ में 37 हजार लाइसेंस। सालाना बिक रहे 72 लाख कारतूस।
-एक शस्त्र लाइसेंस पर एक साल में 200 कारतूस खरीदने की सीमा।
-एक शस्त्र लाइसेंस पर एक दिन में ले सकते हैं अधिकतम 100 कारतूस।
-कारतूस लेने पर पुराने कारतूस के खोके भी जमा करने होते हैं।
-प्रदेश में अलीगढ़ और एटा में सर्वाधिक शस्त्र लाइसेंस बनवाए गए।
-इसी वजह से हाईकोर्ट पहुंचा मामला, लाइसेंस बनने पर लगी रोक।
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