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सांसद गांव न चुना जाता तो ज्यादा होता विकास
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Wed, 24 May 2017 02:19 AM IST
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सांसद सतीश गौतम ने तीन साल पहले गांव बहरावद को गोद लेते वक्त वायदा किया था कि हर साल गांव का जन्मदिन धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि सांसद इतनी जल्दी इस गांव को सौतेला बनाकर छोड़ देंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सांसद ने यह गांव नहीं चुना होता तो ग्राम पंचायत से काफी विकास हो गया होता। सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच को पलीता लगाने का काम किया है।
गांववालों ने बताया कि जन्मदिन मनाना और विकास कराना तो दूर ग्रामीणों को दुख बस इसी बात का है कि सांसद दो साल से गांव में झांकने तक नहीं आए। पलट कर यह भी नहीं देखा कि कौन मरा कौन बीमार है? किस पर क्या दुखों के पहाड़ टूटे? कितनी ही जवान मौतें हो गईं लेकिन सांसद किसी का दुख दर्द बांटने तक नहीं आए। विकास की बात करें तो गांव के हालात उससे भी बदतर हो गए हैं, जो गोद लेने से पहले थे क्योंकि तब से विकास तो दूर नाली खड़ंजों की मरम्मत तक नहीं हुई। संपर्क मार्ग उखड़े पड़े हैं। बाईपास मार्ग पर कूड़े के ढेर पड़े हैं। तालाब गंदगी से अट गए हैं। बिजली की लाइनें जर्जर हैं। सिर्फ 10 सौर ऊर्जा लाइटें ही लगी हैं। ग्रामीणों का दर्द इतना है कि विकास तो दूर की बात है कम से कम सांसद इस गांव के लोगों से जुड़े तो रहते।
बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों से अपील की थी कि एक साल में एक गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित करें। बहरावद को गोद लेते वक्त वादा किया गया था कि गांव में अस्पताल होगा, कॉलेज होगा, तालाब खुदवाए जाएंगे। सीसी रोड बनेंगे। बिजली की लाइन खिंचेगी। पशु अस्पताल बनेगा। लेकिन कोई काम नहीं हुआ। सांसद ने तो महिलाओं को गुजरात के मॉडल गांवों में घुमाकर लाने का भी वादा किया था लेकिन यह भी पूरा नहीं हुआ।
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गांव को सांसद आदर्श गांव के रूप में चुना गया था। लेकिन सांसद निधि या किसी सरकारी योजना से गांव में कोई विकास नहीं हुआ।- राजन सिंह, ग्राम प्रधान
केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार है। सांसद ने गांव को आदर्श बनाने का वादा किया था जो पूरी तरह से झूठा साबित हुआ।- नेम सिंह, ग्रामीण
सांसद ने हर घर को तुलसी के पौधे देने का वादा किया था। उस वादे को भी पूरा नहीं कर सके। विकास क्या खाक कराएंगे?- ज्ञान सिंह, ग्रामीण
किसानों पर नोटबंदी से लेकर ओलावृष्टि तक तमाम संकट आए। लेकिन दो साल से सांसद ने गांव में झांककर भी नहीं देखा।- शेर सिंह, ग्रामीण
सांसद ने वादा किया था कि वह यहां की महिलाओं को गुजराज के मॉडल गांव दिखाकर लाएंगे। लगता है सांसद खुद गुजरात जाकर बस गए हैं।- गुड़िया देवी
गांव में तमाम लोगों की मौत हो चुकी हैं। तमाम बेटियों की शादियां हो गईं। लेकिन सांसद न खुशी, न गम में गांव में घूमने नहीं आए।- नेमवती देवी
वृद्ध और विधवा महिलाओं को पेंशन तक नहीं मिल रही। सांसद ने किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता महिलाओं को नहीं दिलाई।- रामवती देवी
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गांववालों ने बताया कि जन्मदिन मनाना और विकास कराना तो दूर ग्रामीणों को दुख बस इसी बात का है कि सांसद दो साल से गांव में झांकने तक नहीं आए। पलट कर यह भी नहीं देखा कि कौन मरा कौन बीमार है? किस पर क्या दुखों के पहाड़ टूटे? कितनी ही जवान मौतें हो गईं लेकिन सांसद किसी का दुख दर्द बांटने तक नहीं आए। विकास की बात करें तो गांव के हालात उससे भी बदतर हो गए हैं, जो गोद लेने से पहले थे क्योंकि तब से विकास तो दूर नाली खड़ंजों की मरम्मत तक नहीं हुई। संपर्क मार्ग उखड़े पड़े हैं। बाईपास मार्ग पर कूड़े के ढेर पड़े हैं। तालाब गंदगी से अट गए हैं। बिजली की लाइनें जर्जर हैं। सिर्फ 10 सौर ऊर्जा लाइटें ही लगी हैं। ग्रामीणों का दर्द इतना है कि विकास तो दूर की बात है कम से कम सांसद इस गांव के लोगों से जुड़े तो रहते।
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बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों से अपील की थी कि एक साल में एक गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित करें। बहरावद को गोद लेते वक्त वादा किया गया था कि गांव में अस्पताल होगा, कॉलेज होगा, तालाब खुदवाए जाएंगे। सीसी रोड बनेंगे। बिजली की लाइन खिंचेगी। पशु अस्पताल बनेगा। लेकिन कोई काम नहीं हुआ। सांसद ने तो महिलाओं को गुजरात के मॉडल गांवों में घुमाकर लाने का भी वादा किया था लेकिन यह भी पूरा नहीं हुआ।
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गांव को सांसद आदर्श गांव के रूप में चुना गया था। लेकिन सांसद निधि या किसी सरकारी योजना से गांव में कोई विकास नहीं हुआ।- राजन सिंह, ग्राम प्रधान
केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार है। सांसद ने गांव को आदर्श बनाने का वादा किया था जो पूरी तरह से झूठा साबित हुआ।- नेम सिंह, ग्रामीण
सांसद ने हर घर को तुलसी के पौधे देने का वादा किया था। उस वादे को भी पूरा नहीं कर सके। विकास क्या खाक कराएंगे?- ज्ञान सिंह, ग्रामीण
किसानों पर नोटबंदी से लेकर ओलावृष्टि तक तमाम संकट आए। लेकिन दो साल से सांसद ने गांव में झांककर भी नहीं देखा।- शेर सिंह, ग्रामीण
सांसद ने वादा किया था कि वह यहां की महिलाओं को गुजराज के मॉडल गांव दिखाकर लाएंगे। लगता है सांसद खुद गुजरात जाकर बस गए हैं।- गुड़िया देवी
गांव में तमाम लोगों की मौत हो चुकी हैं। तमाम बेटियों की शादियां हो गईं। लेकिन सांसद न खुशी, न गम में गांव में घूमने नहीं आए।- नेमवती देवी
वृद्ध और विधवा महिलाओं को पेंशन तक नहीं मिल रही। सांसद ने किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता महिलाओं को नहीं दिलाई।- रामवती देवी