{"_id":"5cf42e91bdec2207786ba93c","slug":"identify-your-rights-by-eliminating-mischief","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुप्रथाओं को समाप्त कर अपने अधिकार पहचानें महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुप्रथाओं को समाप्त कर अपने अधिकार पहचानें महिलाएं
Mon, 03 Jun 2019 01:46 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला,हाथरस।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला,हाथरस।
Published by: राजेश सिंह
Updated Mon, 03 Jun 2019 01:46 AM IST
विज्ञापन
गांव बरसै में आयोजित गोष्ठी में शामिल महिलाएं व अन्य।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत सासनी के गांव बरसै में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें गांव की महिलाओं को नारी सशक्तीकरण को लेकर जानकारी दी गई। रूढ़िवादी प्रथाओं को समाप्त करने का आह्वान किया गया।
गोष्ठी में युवा उत्थान अभियान की सूत्रधार छात्रा शैलजा मिश्र ने कहा कि आज हर क्षेत्र में आगे हैं। वह किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए जागरुक होने की आवश्यकता है। अभी भी महिलाओं को अपने सम्मान और अधिकार पाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। इसे मिटाने की आवश्यकता है। उन्होंने महिलाओं के हित में बने कानून व कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। समाज सेविका अखिलेश गुप्ता ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एकजुट हों और इनका खात्मा करें। उन्होंने घूंघट, पर्दा प्रथा को भी समाप्त करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि महिलाओं का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। शिक्षा से ही वह अपने अधिकार पा सकेगी। अधिवक्ता प्रेम कुमार सोलंकी एडवोकेट ने कहा कि महिलाओं को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह खुद पर होने वाले किसी भी अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करेंगी। कृष्णमुरारी वार्ष्णेय ने कहा कि बाबा साहब डॉ.अंबेडकर के नारे शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष को आत्मसात करने की जरुरत है। संचालन पर्यावरण सुरक्षा संस्थान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भवतोष मिश्र ने किया। इस मौके पर निशा सोलंकी ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में संदीप दीपक, श्रुति मिश्र, कोमल सोलंकी, यामिनी, खुशी, मीना देवी, मंजू, नीरू, शिल्पी सोलंकी, रामप्रकाश, राधेश्याम कुशवाहा, राजेश, विवेक सोलंकी, बॉबी मुख्य रूप से मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
गोष्ठी में युवा उत्थान अभियान की सूत्रधार छात्रा शैलजा मिश्र ने कहा कि आज हर क्षेत्र में आगे हैं। वह किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए जागरुक होने की आवश्यकता है। अभी भी महिलाओं को अपने सम्मान और अधिकार पाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। इसे मिटाने की आवश्यकता है। उन्होंने महिलाओं के हित में बने कानून व कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। समाज सेविका अखिलेश गुप्ता ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एकजुट हों और इनका खात्मा करें। उन्होंने घूंघट, पर्दा प्रथा को भी समाप्त करने की अपील की।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि महिलाओं का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। शिक्षा से ही वह अपने अधिकार पा सकेगी। अधिवक्ता प्रेम कुमार सोलंकी एडवोकेट ने कहा कि महिलाओं को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह खुद पर होने वाले किसी भी अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करेंगी। कृष्णमुरारी वार्ष्णेय ने कहा कि बाबा साहब डॉ.अंबेडकर के नारे शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष को आत्मसात करने की जरुरत है। संचालन पर्यावरण सुरक्षा संस्थान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भवतोष मिश्र ने किया। इस मौके पर निशा सोलंकी ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में संदीप दीपक, श्रुति मिश्र, कोमल सोलंकी, यामिनी, खुशी, मीना देवी, मंजू, नीरू, शिल्पी सोलंकी, रामप्रकाश, राधेश्याम कुशवाहा, राजेश, विवेक सोलंकी, बॉबी मुख्य रूप से मौजूद थे।
विज्ञापन