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बकरीद आज...सोमवार तक होगी कुर्बानी, सामूहिक नमाज पर रोक

Sat, 01 Aug 2020 03:19 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Sat, 01 Aug 2020 03:19 AM IST
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बकरीद को लेकर ऊपरकोट बाजार में खरीदारी करती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

बकरीद या ईद-उल-अजहा का तीन दिन का त्योहार शनिवार से शुरू हो रहा है। इस्लामिक कैलेंडर की दसवीं तारीख से 12वीं तारीख तक ये त्योहार मनाया जाएगा। शनिवार, रविवार और सोमवार तक कुर्बानियां होती रहेंगी। ईद की तरह ही इस बार भी सामूहिक नमाज और सामूहिक कुर्बानी पर रोक लगी है।

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शुक्रवार रात से लॉकडाउन भी हो जाएगा। ऐसे में ये त्योहार घरों में ही मनेगा। घरों पर ही नमाज पढ़ कर परिवार के साथ कुर्बानी देनी होगी। शहर मुफ्ती खालिद हमीद ने कहा है कि कुर्बानी देने वाले इसका ख्याल रखें कि उनके किसी पड़ोसी को कोई परेशानी न हो। कुर्बानी कराने में मदद करने वाले लोग अपने पास एक दो जोड़ी कपड़े अलग से रखें, जिससे खून आदि के निशान लगने पर वह कपड़े बदल कर घरों से निकले। कुर्बानी के अवशेष केवल नगर निगम की कूड़े वाली गाड़ी में ही डालें। इसको इधर उधर न फेंके। समाजसेवी गुलजार अहमद ने कहा है कि बकरीद और रक्षाबंधन दोनों बड़े त्योहार हैं। हम सब इस कोरोना काल में एक दूसरे का पूरा ख्याल रखें और मिलकर त्योहारों की खुशियां बांटे।
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नहीं हुई जुमे की नमाज
अनलॉक के दिशा निर्देश के अनुसार जुमे की नमाज मस्जिदों में नहीं पढ़ी गई। लोगों ने घरों पर ही जुमे की नमाज अदा की। कोरोना से बचाव के ठोस कदम उठाए जाने के कारण सामूहिक नमाज नहीं हो रही है। शहर मुफ्ती ने कहा है कि शासन प्रशासन के दिशा निर्देशों का सौ फीसदी अमल करना जरूरी है जिससे हम सभी इस जानलेवा कोरोना बीमारी से बच सके।
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सुन्नते इब्राहिम है बकरीद
हजरत पैगंबर मोहम्मद साहब के पूर्वज हजरत इब्राहिम ने एक बार ख्वाब में देखा कि अल्लाह अपने बंदों से अपनी पसंदीदा चीजों की कुर्बानी मांग रहे हैं। दूसरे दिन इब्राहिम ने सौ ऊंट कुर्बान कर दिए। उन्होंने दूसरे और तीसरे दिन भी ऐसे ही ख्वाब देखने के बाद सौ सौ ऊंटों की कुर्बानी दी। चौथे दिन उन्हें ख्वाब की बातों की कुछ और समझ हुई। उन्होंने सोचा कि उनके सबसे पसंदीदा तो उनके बेटे इस्माइल हैं। इसलिए अल्लाह के इम्तिहान की इस घड़ी में वह अपने बेटे की कुर्बानी देंगे। कुछ ही देर में घर में ये बात इस्माइल की मां और खुद इस्माइल को पता चल गई, लेकिन कोई अल्लाह की राह में चलने से डिगा नहीं।

जब इब्राहिम कुर्बानी देने के लिए चलने लगे तो खुद इस्माइल ने उनसे कहा कि वह अपनी आंखों में पट्टी बांध लें तो उन्हें कुछ दिखेगा नहीं और कुर्बानी देने में उनको कष्ट नहीं होगा। जब इस्माइल की कुर्बानी होने लगी तो अचानक वहां अल्लाह के फरिश्ते जिबरायल आ गए और इस्माइल को हटा कर एक दुंबा (भेड़) खड़ा कर दिया और इसी भेड़ की कुर्बानी हो गई। अल्लाह ने इस नेकनीयती और कुर्बानी की राह पर सच्चाई से चलने वाले इब्राहिम को उनका बेटा वापस लौटा दिया। इसके बाद से ही कुर्बानी को सुन्नते इब्राहिम फरमाते हैं।

बकरे अकेले और ऊंट-भैंस में सात हिस्सेदार
कुर्बानी की रस्मों के मुताबिक भेड़ और बकरे की कुर्बानी अकेले ही देनी पड़ती है। भैंस और ऊंट की कुर्बानी में सात हिस्सेदार हो सकते हैं। कुर्बानी देने के बाद या कुर्बानी में हिस्सा डालने वाले को जितना मांस मिलता है, उसके तीन हिस्से होते हैं। पहला हिस्सा अपने घर के लिए, दूसरा रिश्तेदारों के लिए और तीसरा गरीब या यतीम में बांटा जाता है। जरूरतमंदों, गरीबों और यतीमों में ये मांस इसलिए दिया जाता है कि वह भी बकरीद का त्योहार मना सके।

सोमवार तक होगी कुर्बानियां
शनिवार को इस्लामिक कैलेंडर में हिजरी की दस तारीख है, रस्मन इसी दिन बकरीद होती है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार अगर कोई शख्स व्यस्त या सफर में है तो वह अगले दो दिन तक भी कु़र्बानी कर सकता है। इस तरह से हर साल की तरह इस साल भी शनिवार, रविवार और सोमवार को कुर्बानी दी जाएगी। जो कुर्बानी करने के लायक है़ उनको जरूर करना है। ये उन पर एक फर्ज है। अगर संपन्न लोग बकरीद में कुर्बानी नहीं करते तो ईदगाह में ईद की नमाज में शामिल नहीं हो सकते हैं। इसलिए हर हाल में इस अमल को पूरा करे।

नमाज ए चाश्त होगी

ईदगाह और अन्य मस्जिदों में सामूहिक नमाज नहीं होने के कारण इस बार भी ईद की तर्ज पर बकरीद की नमाज ए चाश्त होगी। जिसमें घरों पर चार-पांच लोग एक साथ नमाज ए चाश्त पढ़ सकेंगे। मस्जिदों में भी चार या पांच से अधिक लोग एकत्र नहीं होंगे।

खाल कहां जाएंगी आज तय होगा
अभी तक हर वर्ष कुर्बानी के बाद जानवरों की खालों को मदरसों या ऊपरकोट स्थित नेशनल चैरिटेबिल हास्पिटल को दिया जाता रहा है। ये मदरसे और हास्पिटल इन खालों को लैदर फैक्ट्री को बेच कर कुछ पैसे जुटा लेते थे, लेकिन बीते दो वर्ष से इसमें कोई डिमांड नहीं रह गई है। इस बार कुर्बानी की खालों को कहां दिया जाएगा। अभी तक ऐसा कुछ भी तय नहीं हुआ है। लेकिन अधिकांश खालें मदरसों को ही दिया जाना तय है। ऊपरकोट स्थित नेशनल चैरिटेबिल हास्पिटल प्रबंधन ने खाल लेने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

यातयात एहतियातन बदला गया : एसपी यातायात
अलीगढ़। बकरीद के मद्देनजर पुराने शहर, शाहजमाल ईदगाह, गोंडा रोड, खैर रोड, देहलीगेट, ऊपरकोट सहित कई इलाकों में यातायात परिवर्तन किया गया है। ये परिवर्तन एहतियातन किया गया है, जिससे बकरीद पर इन मोहल्लों में भारी वाहनों या अन्य किसी वाहन से कहीं कोई जाम की समस्या न हो। हालांकि इस बार की बकरीद लॉकडाउन में हो रही है। इससे पहले ईद भी लॉकडाउन में ही मनाई गई थी। एसपी यातायात ने बताया कि यातायात व्यवस्था में पूर्व की भांति ही रूट डायवर्ट किया गया है।

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