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मानवता शर्मसार : मां का शव देने के लिए बेटे से मांगे आठ हजार, रुपये न होने के चलते तीन से काट रहा था चक्कर 

Sun, 02 May 2021 08:25 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़ Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Sun, 02 May 2021 08:25 PM IST
सार

शंकर के बयानों की खबर चलाकर एक पत्रकार ने ट्वीट किया तो डीएम प्रभारी ने उक्त मामले की जांच एसडीएम कोल को सौंप दी गई है। डीएम की आईडी की तरफ से ट्विटर पर ट्वीट करके यह जानकारी साझा की गई।

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Humanity is ashamed eight thousand asked for son to give mother dead body due to lack of money waited three days
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अलीगढ़ के दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में दिन प्रतिदिन संवेदनाओं को तांक पर रखा जा रहा है। एक दिन पहले यहां पता चला कि मृत व्यक्ति की फाइल पर कोरोना संक्रमित का इलाज चल रहा था। मौत के 14 घंटे बाद तक शव बेड पर ही पड़ा रहा। वो तो ससुर को ढूंढने निकली महिला ने खुद हर वार्ड में जाकर देखा, तब कहीं जाकर ससुर का शव दिखा। 

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मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया ही था कि रविवार को फिर से मानवता को शर्मसार करने वाला प्रकरण सामने आया। बेगमबाग निवासी महिला बीना घोष का शव तीन दिनों से बेटे शंकर को नहीं दिया जा रहा था। बेटे शंकर का आरोप है कि आठ हजार रुपयों की मांग की गई थी। रुपये न होने के चलते 30 अप्रैल से लगातार सुबह से लेकर रात 11 बजे तक खड़ा रहा। लेकिन किसी ने शव नहीं दिया। शंकर के बयानों की खबर चलाकर एक पत्रकार ने ट्वीट किया तो डीएम प्रभारी ने उक्त मामले की जांच एसडीएम कोल को सौंप दी गई है। डीएम की आईडी की तरफ से ट्विटर पर ट्वीट करके यह जानकारी साझा की गई।
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प्रकरण के अनुसार बीना घोष मूल रूप से कोलकाता की रहने वाली थीं। वह गांधी आई अस्पताल से रिटायर्ड थीं। 24 अप्रैल को उनकी कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट आई। उसी दिन उन्हें दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में बने कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया। छह दिन बाद 30 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। बेटे शंकर ने रविवार को बताया कि 30 तारीख से चक्कर लगा रहा है। लेकिन मां का शव नहीं दिया जा रहा। 
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एक कर्मचारी ने आठ हजार रुपये मांगे थे। रुपये नहीं लाया तो शव नहीं दिया गया। इस बयान की खबर जैसे ही एक पत्रकार ने सोशल मीडिया पर चलाई और ट्वीट किया। वैसे ही जिलाधिकारी प्रभारी ने मामले की जांच एसडीएम को सौंप दी। वहीं रविवार को बेटे शंकर को शव भा सौंप दिया गया है। डीएम की आई से एक ट्वीट करके प्रारंभिक जांच की जानकारी भी साझा की गई है। 

जिसके माध्यम से बताया गया कि अस्पताल प्रशासन की प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि मृतक महिला के पुत्र से किसी अंजान व्यक्ति ने शव सुपुर्द करने के बदले रुपयों की मांग की थी। महिला की मृत्यु के बाद परिवारीजनों की कोई जानकारी न मिलने पर शव सुपुर्द करने में देरी हुई है। इसके साथ ही डीएम की आईडी से बेटे शंकर को मां का शव रविवार को सुपुर्द करने की जानकारी भी साझा की गई। 


यहां सवाल उठता है कि 30 अप्रैल शुक्रवार के दिन ही जिला अस्पताल में स्ट्रेचर पर उतारते समय अतरौली निवासी रामनिवास त्यागी की मौत हुई थी। इनकी कोरोना की जांच नहीं हुई, फिर भी शव को बिना परिजनों के सूचना दिए नुमाइश श्मशान स्थल में जलाया गया। दूसरी तरफ कोरोना संक्रमित की मौत होने के बाद 30 अप्रैल से दीनदयाल अस्पताल में शव रखा रहा। ऐसे प्रकरणों से स्वास्थ्य विभाग के कामकाज पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

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