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AMU: हिंदी और हिंदी के अखबार युवाओं के लिए कितने लाभप्रद, रोजगार में उनकी भूमिका पर हुई परिचर्चा

Tue, 30 Jan 2024 01:54 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Tue, 30 Jan 2024 01:54 AM IST
सार

एएमयू के हिंदी विभाग में हिंदी और हिंदी के अखबार युवाओं के लिए कितने लाभप्रद, रोजगार में उनकी भूमिका विषय पर कार्यशाला हुई। अमर उजाला अलीगढ़ के स्थानीय संपादक कुमार अतुल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों और शोधार्थियों से कहा कि उन्हें अपने विषय पर महारत हासिल करने के साथ ही आसपास होने वाली घटनाओं के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए।

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How beneficial are Hindi and Hindi newspapers for the youth
एएमयू हिंदी विभाग में कार्यशाला - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग के सभागार में 29 जनवरी को हिंदी और हिंदी के अखबार युवाओं के लिए कितने लाभप्रद, रोजगार में उनकी भूमिका विषय पर कार्यशाला हुई। कार्यशाला में वक्ताओं ने अन्य भाषाओं के साथ हिंदी भाषा का भी भविष्य उज्ज्वल है। हिंदी भाषा के जरिये रोजगार के दरवाजे खोले जा सकते हैं। हिंदी व्याकरण को बेहतर बनाने में समाचारपत्र अहम भूमिका निभा रहा है। 

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छात्र छात्रा
अमर उजाला अलीगढ़ के स्थानीय संपादक कुमार अतुल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों और शोधार्थियों से कहा कि उन्हें अपने विषय पर महारत हासिल करने के साथ ही आसपास होने वाली घटनाओं के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। यह जानकारी अमर उजाला के जरिये मिलती है। इतिहास से लेकर वर्तमान की घटनाओं के बारे में सही जानकारी पाने का स्रोत समाचारपत्र ही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में अखबार के संपादकीय लेखों का महत्व होता है। लेखों से ज्ञानवर्धन होता है और किसी भी मुद्दे पर सटीक जानकारी मिल जाती है। यह जानकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का द्वार खोलती है। सोशल मीडिया पर प्रसारित खबर पर किसी को एतबार नहीं होता है, लेकिन समाचारपत्र में छपी खबर पर पाठकों को भरोसा होता है। 
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संचालन हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शहबाज अली खान ने किया। अमर उजाला अलीगढ़ के यूनिट हेड समीर कुमार ने अतिथियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद आशिक अली, अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. आसिम सिद्दीकी, अजय बिसारिया, डॉ. दीपशिखा सिंह, डॉ. गुलाम फरीद साबरी, डॉ. सायमा बानो, मोहम्मद जीशान अहमद, डॉ. कुंवर अहमद, विदेशी भाषा, संस्कृत, अंग्रेजी और हिंदी विभाग के विद्यार्थी और शोधार्थी मौजूद रहे।

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दूसरी भाषाएं जानकार हिंदी में अच्छा कर सकते हैं : प्रो. शंभुनाथ

एएमयू के हिंदी विभाग के प्रोफेसर शंभुनाथ तिवारी ने कहा कि उन्हें कई भाषाएं जानना चाहिए। मनोवैज्ञानिक भी यह बात सिद्ध कर चुके हैं कि जो जितनी भाषाएं जानता है, उसके सोचने की क्षमता उतनी ही ज्यादा होती है। उनकी कल्पनाशीलता, कार्य करने की क्षमता ज्यादा होती है। डॉ. आरएम लोहिया 16 भाषाएं जानते थे। उन्होंने हिंदी छोड़कर किसी भी भाषा में अपना वक्तव्य नहीं दिया। भाषाएं समृद्ध करती हैं। यह जानकार अचरज होगा कि देश में जितने भी हिंदी के बड़े समर्थक थे, वह सभी हिंदीभाषी नहीं थे। वह चाहे गांधीजी हों या राजा राममोहन राय हों, या बालगंगाधर तिलक हों या सरस्वती दयानंद हों। दूसरी भाषाएं जानकार हिंदी में अच्छा कर सकते हैं। हिंदी को लेकर हीनता का बोध नहीं होना चाहिए, क्योंकि हिंदी साहित्य है और साहित्य को उर्दू में अदब कहते हैं। अदब की जिंदगी में क्या हैसियत होती है, यह हम सब जानते हैं। साहित्य ही अदब सिखाता है। हिंदी व्याकरण को बेहतर करने में अमर उजाला अहम भूमिका निभा रहा है। 

अब कुशलता का दौर है : साद 
प्रशिक्षण एवं नियोजन अधिकारी एएमयू साद हमीद ने कहा कि आने वाला दौर कुशलता का है, क्योंकि डिग्री से काम नहीं चलने वाला है, जो भी कॅरिअर चुनने जा रहे हैं, उसके बारे में शोध करिए। कॅरिअर को निर्धारित करें, नौकरी झक मारकर पीछे आएगी। उन्होंने कहा कि सभी भाषाओं के लिए नौकरी है। हिंदी को बढ़ावे की जरूरत नहीं है, क्योंकि हिंदी स्वयं एक मजबूत भाषा है। उन्होंने कहा कि जो भी पढ़ाई करें, उसमें उत्कृष्ट बनना पड़ेगा। अपने विषय से प्रेम होना चाहिए। मसलन, हिंदी को खाना है, हिंदी को पीना है, हिंदी को सोना है। हिंदी को लेकर दीवानगी होनी चाहिए। पढ़ाई में आनंद लीजिए। औसत दर्जे का विद्यार्थी बनने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उत्कृष्टता ही सफलता दिलाएगी। अपने विषय के अलावा आसपास घटने वाली घटनाओं की जानकारी होनी चाहिए। सरकारी नौकरी हो निजी संस्थाओं में नौकरी या अपना व्यवसाय करना चाहते हैं, तो अच्छा बोलना और अच्छी लेखनी जरूरी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी से सीखने की जरूरत है। जहां ज्ञान मिल रहा है, वहां ले लें। हम चाहते हैं कि आप सभी जिंदगी में कामयाब हों, क्षेत्र चाहे जो भी हो। 

खेल के जरिये बना सकते हैं कॅरिअर : मजहर 
जिम्नेजियम के वरिष्ठ प्रशिक्षक मजहर उल कमर ने कहा कि खेल के जरिये ही अपना कॅरिअर बना सकते हैं। एएमयू में बिहार और यूपी बोर्ड से विद्यार्थी आते हैं। हिंदी की दिल की भाषा है। संस्कृति की भाषा है। संवेदना की भाषा है। जीने की भाषा है। समाज को जोड़ने की भाषा है। एक अच्छा खिलाड़ी होने के लिए इन्हीं गुणों का होना आवश्यक है। एक अच्छा और स्वस्थ समाज बनाना है तो उसकी मातृभाषा को यह जिम्मेदारी उठानी होगी। सरकार की भी जिम्मेदारी है कि मातृ भाषा को तवज्जो दे, क्योंकि जब मातृ भाषा को रोजगार नहीं जोड़ते तो उससे लोग दूरी बनाने लगते हैं। उन्होंने कहा कि दर्जनों ऐसे खेल प्रबंधन के पाठ्यक्रम संचालित हैं, जिसमें रोजगार बना सकते हैं। खेल प्रबंधन की किताबें ज्यादातर अंग्रेजी में हैं, जो खिलाड़ियों को पढ़ने में दिक्कतें होती है, क्योंकि वह ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं। इसलिए इन किताबों को हिंदी में अनुवाद कर दिया जाए, तो बेहतर है। यह कार्य हिंदी के शोधार्थी कर सकते हैं। प्रशिक्षण के लिए सबसे ज्यादा जरूरी भाषा की होती है और मातृभाषा आसानी से समझ में आती है। 

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