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होलीः रंग-गुलाल और मस्ती में डूबा शहर
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Mon, 13 Mar 2017 12:02 AM IST
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हलवाई खाने में होली खेलते दुकानदार।
- फोटो : Amar Ujala
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‘पकड़ो पकड़ो, कोई बचने न पाए, सबको रंग डालो अपने रंग में’ कुछ ऐसा ही नजारा रविवार को शहर के बाजारों में देखने को मिला। होली और भाजपा की जीत के जश्न में मस्त हुरियारों ने जमकर होली खेली। हर जगह डीजे पर यही धुन ‘एक ही नारा एक नाम, जय श्रीराम-जय श्रीराम’ सुनाई दिया। इन्हीं धुनों पर हुरियारों ने डांस भी किया।
शहर में होली से एक दिन पहले होली खेलने की परंपरा है। इस परंपरा को निभाने की जिम्मेदारी दुकानदारों पर है। वह सुबह रोजाना की तरह होलिका दहन के दिन भी दुकान खोलते हैं। पहले बाजार में दुकानदारों ने एक-दूसरे को रंग लगाया।
फिर शुरू हो गई आने-जाने वाले लोगों पर ड्रम में रातभर भीगने वाले टेशू फूल के डालने की बारी। पैदल हो या बाइक सवार। बस हो या टिर्री सवार। सभी पर हुरियारों ने रंग डाला। हुरियारों ने एक-दूसरे के कपड़े फाड़ने में भी चूक नहीं की। रास्ते से गुजरने वाला हर कोई रंग से बचता दिखा। वह एक गली में रंग से बच जाता, लेकिन दूसरी गली में उस पर कोई न कोई टेशू के फूल व हरे-गुलाबी रंग उड़ेल देता। सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील व अतिसंवदेनशील क्षेत्रों में पुलिस के अलावा पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी तैनात रहे।
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यहां खेली गई होली
रेलवे रोड, पत्थर बाजार, मानिक चौक, छिपैटी बाजार, फफाला बाजार, रामघाट रोड, महावीरगंज, कनवरीगंज, बारहद्वारी, मदारगेट, फूल चौराहा, अब्दुल करीम चौराहा, हलवाईखाना, अचल, हाथरस अड्डा, खिरनी गेट, विष्णुपुरी, नौरंगाबाद आदि बाजारों में होली खेली गई।
चौराहे पर पहुंचा फोर्स
अब्दुल करीम चौराहे पर पुलिस प्रशासन ने हुरियारों को रंग खेलने से मना किया, क्योंकि समय ज्यादा हो चुका था, लेकिन हुरियारों ने प्रशासन की बात नकार दी, कहा समय अभी है। इस बात पर इनमें नोकझोंक भी हुई। उधर, रंग खेलते-खेलते हुरियारे ऊपरकोट पहुंच रहे थे, जिन्हें वापस भेज दिया गया।
प्रशासन की हिदायत
पुलिस प्रशासन की ओर से हुरियारों व अन्य लोगों को हिदायत दी जाती है। दरअसल, यहां मिश्रित आबादी है। सो, प्रशासन कोई भी अप्रिय घटना नहीं चाहता है। इसलिए हुरियारों को हिदायत दी गई कि रंग खेलने के लिए जो जगह निर्धारित है, उसी में रहें। उधर, जिसे रंग से परहेज है। वे अपने घरों में रहें।
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शहर में होली से एक दिन पहले होली खेलने की परंपरा है। इस परंपरा को निभाने की जिम्मेदारी दुकानदारों पर है। वह सुबह रोजाना की तरह होलिका दहन के दिन भी दुकान खोलते हैं। पहले बाजार में दुकानदारों ने एक-दूसरे को रंग लगाया।
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फिर शुरू हो गई आने-जाने वाले लोगों पर ड्रम में रातभर भीगने वाले टेशू फूल के डालने की बारी। पैदल हो या बाइक सवार। बस हो या टिर्री सवार। सभी पर हुरियारों ने रंग डाला। हुरियारों ने एक-दूसरे के कपड़े फाड़ने में भी चूक नहीं की। रास्ते से गुजरने वाला हर कोई रंग से बचता दिखा। वह एक गली में रंग से बच जाता, लेकिन दूसरी गली में उस पर कोई न कोई टेशू के फूल व हरे-गुलाबी रंग उड़ेल देता। सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील व अतिसंवदेनशील क्षेत्रों में पुलिस के अलावा पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी तैनात रहे।
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यहां खेली गई होली
रेलवे रोड, पत्थर बाजार, मानिक चौक, छिपैटी बाजार, फफाला बाजार, रामघाट रोड, महावीरगंज, कनवरीगंज, बारहद्वारी, मदारगेट, फूल चौराहा, अब्दुल करीम चौराहा, हलवाईखाना, अचल, हाथरस अड्डा, खिरनी गेट, विष्णुपुरी, नौरंगाबाद आदि बाजारों में होली खेली गई।
चौराहे पर पहुंचा फोर्स
अब्दुल करीम चौराहे पर पुलिस प्रशासन ने हुरियारों को रंग खेलने से मना किया, क्योंकि समय ज्यादा हो चुका था, लेकिन हुरियारों ने प्रशासन की बात नकार दी, कहा समय अभी है। इस बात पर इनमें नोकझोंक भी हुई। उधर, रंग खेलते-खेलते हुरियारे ऊपरकोट पहुंच रहे थे, जिन्हें वापस भेज दिया गया।
प्रशासन की हिदायत
पुलिस प्रशासन की ओर से हुरियारों व अन्य लोगों को हिदायत दी जाती है। दरअसल, यहां मिश्रित आबादी है। सो, प्रशासन कोई भी अप्रिय घटना नहीं चाहता है। इसलिए हुरियारों को हिदायत दी गई कि रंग खेलने के लिए जो जगह निर्धारित है, उसी में रहें। उधर, जिसे रंग से परहेज है। वे अपने घरों में रहें।