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हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में खैर के नौ गांव की जमीन जाएगी
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नई दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में जिले की खैर तहसील के 9 गांव की 34 हेक्टेयर जमीन जाएगी। इस जमीन को हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) अधिग्रहण करेगा। इसकी एवज में किसानों को सर्किल रेट के हिसाब से चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। इसको लेकर बृहस्पतिवार को जिला प्रशासन के साथ सामाजिक, पर्यावरण हितों को लेकर बैठक भी हुई।
कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में एनएचएसआरसीएल के सीनियर मैनेजर अनुराग ने पूरे प्रोजेक्ट की रूपरेखा रखी। उन्होंने बताया कि 945 किलो मीटर के इस प्रोजेक्ट से दो राज्यों के 23 जिले प्रभावित होंगे। नई दिल्ली से लेकर वाराणसी-लखनऊ-अयोध्या तक कुल 13 स्टेशनों पर हाई स्पीड ट्रेन का का ठहराव होगा। इसको लेकर लाइट डिटेक्शन एंड रेजिंग सर्वे (लिडार) तकनीक से नई दिल्ली-वाराणसी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। अब टेंडर सहित अन्य प्रक्रियाओं की तैयारियों में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के अधिकारियों की टीम जुटी है। भूमि अधिग्रहण को लेकर जिला प्रशासन के संग समन्वय स्थापित कर योजना पर काम हो रहा है।
इन गांवों से ली जाएगी 34 हेक्टेयर जमीन
नई दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड कॉरिडोर के तहत अलीगढ़ जनपद के खैर तहसील के 9 गांव से 34 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। इसमें सियारोल, टप्पल, कृपालपुर, जिकरपुर, सिमरोठी, मरोरगढ़ी, देवाका, गोरोला, घाघोली गांव की जमीन प्रस्तावित है। इसकी एवज में जमीन मालिक को सर्किल रेट के हिसाब से चार गुना मुआवजा देना तय हुआ है। नोएडा के जेवर एयरपोर्ट पर इस परियोजना के तहत जेवर पर स्टेशन बनेगा। कॉरिडोर के तहत जेवर में स्टेशन बनेगा। यहां भी ट्रेन का ठहराव होगा। इसके बाद मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही, वाराणसी और अयोध्या जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ा जाना है।
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पर्यावरण और सामाजिक हितों का रखा जाएगा ध्यान
कलेक्ट्रेट परिसर में हुई बैठक में पर्यावरणीय तथा सामाजिक विचारों का भी प्रस्तुतीकरण किया गया। बैठक में डीएम चंद्रभूषण सिंह ने कहा कि जेवर स्टेशन बनने से अलीगढ़ के लोगों को इसका लाभ अवश्य मिलेगा। अलीगढ़ के लोगों ने विकास के कार्यों में सदैव सहयोग किया है। इसमें भी सहयोग करेंगे। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस परियोजना में सामाजिक और पर्यावरण के हितों का ध्यान रखा जाएगा। बैठक में एडीएम प्रशासन डीपी पाल, एसपी आरए शुभम पटेल, सीनियर मैनेजर अनुराग, पर्यावरण सलाहकार विजय शर्मा, सामाजिक सलाहकार सनोबर, पर्यावरण सलाहकार ऋषभ सहगल आदि मौजूद रहे।
प्रोजेक्ट पर एक निगाह
परियोजना की लंबाई 945 किमी, इसमें एलिवेटेड, अंडरग्राउंड और एट ग्रेड का ट्रैक जरूरत के हिसाब से बनाया जाएगा। इस ट्रैक पर चलने वाली ट्रेन की अधिकतम गति सीमा 350 किमी प्रतिघंटा होगा। संचालन की गति 320 किमी प्रतिघंटा रखी गई है। वहीं औसत गति 250 किमी प्रतिघंटा रहेगी। यह परियोजना 23 जिलों की 46 तहसीलों से गुजरेगी, इसमें 794 गांव प्रभावित होंगे। इस ट्रेन की क्षमता 750 यात्रियों की होगी।
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कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में एनएचएसआरसीएल के सीनियर मैनेजर अनुराग ने पूरे प्रोजेक्ट की रूपरेखा रखी। उन्होंने बताया कि 945 किलो मीटर के इस प्रोजेक्ट से दो राज्यों के 23 जिले प्रभावित होंगे। नई दिल्ली से लेकर वाराणसी-लखनऊ-अयोध्या तक कुल 13 स्टेशनों पर हाई स्पीड ट्रेन का का ठहराव होगा। इसको लेकर लाइट डिटेक्शन एंड रेजिंग सर्वे (लिडार) तकनीक से नई दिल्ली-वाराणसी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। अब टेंडर सहित अन्य प्रक्रियाओं की तैयारियों में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के अधिकारियों की टीम जुटी है। भूमि अधिग्रहण को लेकर जिला प्रशासन के संग समन्वय स्थापित कर योजना पर काम हो रहा है।
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इन गांवों से ली जाएगी 34 हेक्टेयर जमीन
नई दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड कॉरिडोर के तहत अलीगढ़ जनपद के खैर तहसील के 9 गांव से 34 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। इसमें सियारोल, टप्पल, कृपालपुर, जिकरपुर, सिमरोठी, मरोरगढ़ी, देवाका, गोरोला, घाघोली गांव की जमीन प्रस्तावित है। इसकी एवज में जमीन मालिक को सर्किल रेट के हिसाब से चार गुना मुआवजा देना तय हुआ है। नोएडा के जेवर एयरपोर्ट पर इस परियोजना के तहत जेवर पर स्टेशन बनेगा। कॉरिडोर के तहत जेवर में स्टेशन बनेगा। यहां भी ट्रेन का ठहराव होगा। इसके बाद मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही, वाराणसी और अयोध्या जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ा जाना है।
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पर्यावरण और सामाजिक हितों का रखा जाएगा ध्यान
कलेक्ट्रेट परिसर में हुई बैठक में पर्यावरणीय तथा सामाजिक विचारों का भी प्रस्तुतीकरण किया गया। बैठक में डीएम चंद्रभूषण सिंह ने कहा कि जेवर स्टेशन बनने से अलीगढ़ के लोगों को इसका लाभ अवश्य मिलेगा। अलीगढ़ के लोगों ने विकास के कार्यों में सदैव सहयोग किया है। इसमें भी सहयोग करेंगे। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस परियोजना में सामाजिक और पर्यावरण के हितों का ध्यान रखा जाएगा। बैठक में एडीएम प्रशासन डीपी पाल, एसपी आरए शुभम पटेल, सीनियर मैनेजर अनुराग, पर्यावरण सलाहकार विजय शर्मा, सामाजिक सलाहकार सनोबर, पर्यावरण सलाहकार ऋषभ सहगल आदि मौजूद रहे।
प्रोजेक्ट पर एक निगाह
परियोजना की लंबाई 945 किमी, इसमें एलिवेटेड, अंडरग्राउंड और एट ग्रेड का ट्रैक जरूरत के हिसाब से बनाया जाएगा। इस ट्रैक पर चलने वाली ट्रेन की अधिकतम गति सीमा 350 किमी प्रतिघंटा होगा। संचालन की गति 320 किमी प्रतिघंटा रखी गई है। वहीं औसत गति 250 किमी प्रतिघंटा रहेगी। यह परियोजना 23 जिलों की 46 तहसीलों से गुजरेगी, इसमें 794 गांव प्रभावित होंगे। इस ट्रेन की क्षमता 750 यात्रियों की होगी।