AMU: मथुरा के भूजल में भारी धातुओं की अधिकता, बढ़ा कैंसर का खतरा, अध्ययन में हुआ खुलासा
मथुरा क्षेत्र के 98 अलग-अलग स्थानों से प्री-मानसून (पहले) और पोस्ट-मानसून (बाद) सीजन में भूजल के एकत्र नमूने का अध्ययन किया गया। यह अध्ययन रिपोर्ट इंटरनेशनल जर्नल स्प्रिंगर नेचर में भी छप चुकी है।
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मथुरा के भूजल में सीसा, लोहा, क्रोमियम, निकेल, जिंक, मैंगनीज, कैडमियम और कॉपर जैसी भारी धातुओं की मौजूदगी पाई गई। इसको लेकर वैज्ञानिकों ने कैंसर जोखिम की चेतावनी दी है। इसका खुलासा एएमयू, किंग फहद यूनिवर्सिटी सऊदी अरब, शारदा यूनिवर्सिटी, आईआईटी रुड़की, जल संसाधन विभाग अहमदाबाद के वैज्ञानिकों के अध्ययन में हुआ है। वैज्ञानिकों ने यमुना नदी के जल का ट्रीटमेंट करके खेतों में सिंचाई करने की सलाह दी है।
एएमयू के रिमोट सेंसिंग विभाग के डॉ. सलमान अहमद, डॉ. शादाब खुर्शीद, इनवायरमेंट साइंस विभाग शारदा यूनिवर्सिटी के डॉ. शहजाद अली, सिविल एंड इनवायरमेंट इंजीनियरिंग विभाग किंग फहद यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड मिनरल्स दहरन सऊदी अरब के डॉ. माज अब्दुल्लाह, पृथ्वी विज्ञान आईआईटी रुड़की की डॉ. अख्तर जहां ने मथुरा क्षेत्र में किए गए अध्ययन में भूजल में भारी धातुओं (हेवी मेटल्स) के बढ़ते प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
पिछले एक दशक में औद्योगिक गतिविधियों और पुराने अपशिष्ट निस्तारण तरीकों के कारण भूजल की गुणवत्ता लगातार खराब हुई है, जिससे मानव स्वास्थ्य, पशु-पक्षियों और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। मथुरा क्षेत्र के 98 अलग-अलग स्थानों से प्री-मानसून (पहले) और पोस्ट-मानसून (बाद) सीजन में भूजल के एकत्र नमूने का अध्ययन किया गया। यह अध्ययन रिपोर्ट इंटरनेशनल जर्नल स्प्रिंगर नेचर में भी छप चुकी है।
यमुना नदी का पानी सिंचाई के लायक नहीं है। पानी का उपचार करके ही सिंचाई की जाए। प्रभावित क्षेत्रों की जियोस्पेशियल मैपिंग कर उच्च जोखिम वाले स्थानों की पहचान की जाए, जिससे कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सके।-डॉ. सलमान अहमद, रिमोट सेंसिंग विभाग, एएमयू
बारिश के बाद भूजल में बढ़ा प्रदूषण
अध्ययन में पाया गया कि प्री-मानसून सीजन में भारी धातुओं की मात्रा का क्रम पीबी, एफई, सीआर, एनआई, जेएडएन, एमएन, सीडी, सीयू रहा, जबकि पोस्ट-मानसून सीजन में पीबी, एनआई, सीआर, जेडएन, एफई, एमएन, सीडी, सीयू पाया गया।
बारिश के बाद भूजल में भारी धातुओं का प्रदूषण और अधिक बढ़ गया। वैज्ञानिकों ने मोंटे कार्लो सिमुलेशन सांख्यिकीय परीक्षणों और विभिन्न प्रदूषण सूचकांकों की मदद से अलग-अलग आयु और लिंग समूहों पर इसके स्वास्थ्य प्रभावों का विश्लेषण किया। रिपोर्ट में कई स्थानों पर कैंसर जोखिम बढ़ने की आशंका व्यक्त की गई है।
अपर्याप्त अपशिष्ट उपचार प्रणाली भूजल प्रदूषण का प्रमुख कारण
- औद्योगिक क्षेत्रों में पुराने और अपर्याप्त अपशिष्ट उपचार प्रणाली भूजल प्रदूषण का प्रमुख कारण हैं। यह स्थिति विशेष रूप से उन इलाकों के लिए खतरनाक है जहां लोग सीधे भूजल का उपयोग पीने और घरेलू कार्यों में करते हैं।
- भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमाओं की तुलना में कई स्थानों पर भारी धातुओं की मात्रा अधिक पाई जाने की बात कही है। वैज्ञानिकों ने भूजल के उपयोग से पहले बेहतर शुद्धिकरण व्यवस्था लागू करने और औद्योगिक अपशिष्ट निस्तारण प्रणाली को मजबूत करने की सिफारिश की गई है।