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सड़क किनारे मिला सरकारी दवाओं का जखीरा, बैठाई जांच
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जीटी रोड निकट दुबे का पड़ाव सड़क किनारे सरकारी अस्पतालों को सप्लाई होने वाली दवाओं का ढेर। अमर उ?
- फोटो : CITY OFFICE
दुबे का पड़ाव जीटी रोड स्थित ऑटो मोबाइल मार्केट के बाहर एक दुकान के चबूतरे पर बुधवार सुबह सरकारी दवाओं का जखीरा पड़ा मिला। ये दवाएं यहां कैसे आईं और किसने फेंकी? यह जांच में साफ होगा। मगर इतना जरूर साफ हो रहा है कि ये दवाएं स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्तमान में चलाए जा रहे पोषण सप्ताह में वितरित की जाने वाली थीं। खुले में इनके मिलने पर सीएमओ ने जांच बैठा दी है।
बुधवार सुबह टहलने निकले स्थानीय व्यक्ति जीतू ठाकुर व राणा प्रताप सिंह की नजर जीटी रोड के सहारे ऑटो मोबाइल मार्केट की एक दुकान के चबूतरे पर गई। वहां काफी संख्या में दवाओं के पत्ते बिखरे पड़े थे। इन सभी पत्तों पर उत्तर प्रदेश सरकार, नॉट फॉर सेल लिखा हुआ था।
इलाके में ही रहने वाले एक प्राइवेट डॉक्टर को उन दवाओं को दिखाया गया तो उन्होंने इन्हें सरकारी दवा करार दिया। कुछ ही देर में यह खबर मीडिया और स्वास्थ्य अधिकारियों तक पहुंच गई और इन दवाओं को संकलित कर लिया गया। जांच में पाया गया कि इनमें से अधिकांश दवाएं दिसंबर 2023 की एक्सपायरी डेट की हैं।
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जिनमें अधिकांश दवाएं खाज, खुजली व पोषण माह में वितरित की जाने वाली हैं। जिनमें आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड या एल्बेंडाजोल आदि गोलियां हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि या तो दवाएं पास के ही एक बेसिक स्कूल में वितरण के लिए आई हों।
या फिर इन्हें कहीं अन्य जगह से लाकर यहां फेंका गया हो। अब ये इलाके के सीसीटीवी देखने से और स्वास्थ्य विभाग से उनके बैच नंबर के आधार पर आवंटन सूची देखने से उजागर होगा। बुधवार को ऑटो मोबाइल मार्केट बंद रहता है। इसलिए स्वास्थ्य टीम सीसीटीवी नहीं देख पाई है। सीएमओ ने मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है।
- दुबे पड़ाव इलाके में सरकारी दवाएं सड़क सहारे पड़े मिलने के मामले में दो डॉक्टर व एक चीफ फार्मासिस्ट की जांच टीम बनाई गई है। यह टीम सीसीटीवी व विभागीय भंडार से तथ्यों की जांच के बाद तय करेगी कि दवाएं यहां तक कैसे पहुंचीं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। उसी अनुसार कार्रवाई तय की जाएगी। - डॉ. नीरज त्यागी, सीएमओ
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बुधवार सुबह टहलने निकले स्थानीय व्यक्ति जीतू ठाकुर व राणा प्रताप सिंह की नजर जीटी रोड के सहारे ऑटो मोबाइल मार्केट की एक दुकान के चबूतरे पर गई। वहां काफी संख्या में दवाओं के पत्ते बिखरे पड़े थे। इन सभी पत्तों पर उत्तर प्रदेश सरकार, नॉट फॉर सेल लिखा हुआ था।
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इलाके में ही रहने वाले एक प्राइवेट डॉक्टर को उन दवाओं को दिखाया गया तो उन्होंने इन्हें सरकारी दवा करार दिया। कुछ ही देर में यह खबर मीडिया और स्वास्थ्य अधिकारियों तक पहुंच गई और इन दवाओं को संकलित कर लिया गया। जांच में पाया गया कि इनमें से अधिकांश दवाएं दिसंबर 2023 की एक्सपायरी डेट की हैं।
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जिनमें अधिकांश दवाएं खाज, खुजली व पोषण माह में वितरित की जाने वाली हैं। जिनमें आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड या एल्बेंडाजोल आदि गोलियां हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि या तो दवाएं पास के ही एक बेसिक स्कूल में वितरण के लिए आई हों।
या फिर इन्हें कहीं अन्य जगह से लाकर यहां फेंका गया हो। अब ये इलाके के सीसीटीवी देखने से और स्वास्थ्य विभाग से उनके बैच नंबर के आधार पर आवंटन सूची देखने से उजागर होगा। बुधवार को ऑटो मोबाइल मार्केट बंद रहता है। इसलिए स्वास्थ्य टीम सीसीटीवी नहीं देख पाई है। सीएमओ ने मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है।
- दुबे पड़ाव इलाके में सरकारी दवाएं सड़क सहारे पड़े मिलने के मामले में दो डॉक्टर व एक चीफ फार्मासिस्ट की जांच टीम बनाई गई है। यह टीम सीसीटीवी व विभागीय भंडार से तथ्यों की जांच के बाद तय करेगी कि दवाएं यहां तक कैसे पहुंचीं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। उसी अनुसार कार्रवाई तय की जाएगी। - डॉ. नीरज त्यागी, सीएमओ