अलीगढ़: प्रशासन ने 100 करोड़ की 106 बीघा सरकारी जमीन कराई कब्जामुक्त, जद में आए स्कूल की दीवारें भी ध्वस्त
स्कूल का प्रबंधन संभाल रही हिंदुस्तानी एजुकेशन सोसाइटी का दावा था कि यह जमीन किसानों से खरीदी गई थी, लेकिन राजस्व अभिलेखों की पड़ताल करने पर पता चला कि जिन किसानों के नाम का हवाला दिया जा रहा था, रिकॉर्ड में वह जमीन उनके नाम दर्ज ही नहीं थी।
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अलीगढ़ के कोल तहसील प्रशासन ने मिर्जापुर सिया इलाके में सरकारी भूमि पर हुए अवैध कब्जों पर बुलडोजर चला दिया। शहर से सटी इस बहुमूल्य जमीन की बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इस दौरान जाकिर हुसैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल का परिसर भी कार्रवाई की जद में आ गया। स्कूल की दीवारों को भी टीम ने ध्वस्त करा दिया।
राजस्व विभाग की टीम ने पुलिस बल के साथ सोमवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे कार्रवाई की शुरुआत की, जो शाम सात बजे तक चली। इस दौरान कुल 14 गाटों की लगभग 106 बीघा यानी 8.1 हेक्टेयर से अधिक जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया। सबसे बड़ा हिस्सा जाकिर हुसैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल के कब्जे से खाली कराया गया। प्रशासन के अनुसार करीब 75 बीघा जमीन पर स्कूल प्रबंधन का कब्जा था। इसके अलावा गाटा संख्या 395, 396, 371 और 194 की जमीन पर अन्य लोगों द्वारा किए गए अवैध कब्जों को भी चार बुलडोजर लगाकर हटाया गया।
स्कूल का प्रबंधन संभाल रही हिंदुस्तानी एजुकेशन सोसाइटी का दावा था कि यह जमीन किसानों से खरीदी गई थी, लेकिन राजस्व अभिलेखों की पड़ताल करने पर पता चला कि जिन किसानों के नाम का हवाला दिया जा रहा था, रिकॉर्ड में वह जमीन उनके नाम दर्ज ही नहीं थी। इसी आधार पर तहसील प्रशासन ने इसे सरकारी भूमि मानते हुए यह बड़ी कार्रवाई की। मिर्जापुर सिया क्षेत्र में जमीन का भाव 90 लाख से एक करोड़ रुपये प्रति बीघा होने के कारण कुल मुक्त कराई गई भूमि की कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
मिर्जापुर सिया में सरकारी जमीन पर 1990 के दशक में कुछ पट्टे दिए गए थे। इनको प्रशासन ने 2022 में निरस्त कर दिया था। दूसरा पक्ष निगरानी में चला गया। बाद में राजस्व बोर्ड ने प्रशासन के फैसले को सही ठहराया। सोमवार को 106 बीघा भूमि को कब्जा मुक्त करा लिया गया है।- गजेंद्रपाल सिंह, एसडीएम कोल
स्कूल प्रबंधन की आपत्ति, नहीं दिया कोई नोटिस
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद जाकिर हुसैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल प्रबंधन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। प्रबंधन का कहना है कि प्रशासन ने कार्रवाई से पहले उन्हें किसी भी प्रकार का नोटिस या पूर्व सूचना नहीं दी, सीधे आकर स्कूल की दीवारों को तोड़ दिया। प्रबंधन का यह भी कहना है कि यह जमीन हिंदुस्तानी एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष व एएमयू के प्रोफेसर आलिम हुसैन नकवी द्वारा खरीदी गई थी। स्कूल प्रबंधन ने इस मामले में कानूनी रूप से अपना पक्ष रखने की बात कही है।