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कोविड की हायतौबा में नहीं दिया बच्ची पर ध्यान, चली गई जान
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कोविड की हायतौबा के बीच अन्य मरीजों को उपचार न मिलने की शिकायतें भी लगातार बढ़ रही हैं। ऐसा ही एक वाकया शुक्रवार को हुआ। गरम पानी से झुलसी बच्ची की जिला अस्पताल से लेकर जेएन मेडिकल कॉलेज तक में इलाज न मिलने पर मौत हो गई। परिवार ने बच्ची के शव को दफन कर दिया।
देहली गेट तालसपुर निवासी ताज मोहम्मद की सास उसके घर आ हुई हैं। शुक्रवार सुबह ताज मोहम्मद की पत्नी रानी ने अपनी मां को नहाने के लिए गर्म पानी करने करने के लिए बाथरूम में रख दिया। इसके बाद दंपती कमरे के बाहर बैठकर बातें कर रहे थे। तभी ताज मोहम्मद की 9 साल की बच्ची साहिबा बाथरूम में चली गई और उसने खोलता हुआ पानी अपने ऊपर डाल दिया, जिससे बच्ची गंभीर रूप से झुलस गई।
बेटी की चीख-पुकार सुनकर परिवार हरकत में आया। पड़ोसियों की मदद से तत्काल उसे जिला अस्पताल लाया गया। जहां से उसे प्राथमिक उपचार के बाद जेएन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मगर मेडिकल कॉलेज में बच्ची का इलाज नहीं हो सका। वहां से वह बच्ची को लेकर किसी अन्य अस्पताल जाने की सोच रहे थे कि बच्ची ने दम तोड़ दिया। ताज मोहम्मद के अनुसार बच्ची के शव को बिना पुलिस या अन्य किसी को सूचना दिए दफन कर दिया गया। उसका आरोप है कि जिला अस्पताल में बेटी को डॉक्टर ने हाथ तक नहीं लगाया था। बस देखते ही मेडिकल ले जाने की कह दी थी, जबकि मैं और मेरी पत्नी कहते रहे कि साहब कुछ दवा दो दे दो।
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देहली गेट तालसपुर निवासी ताज मोहम्मद की सास उसके घर आ हुई हैं। शुक्रवार सुबह ताज मोहम्मद की पत्नी रानी ने अपनी मां को नहाने के लिए गर्म पानी करने करने के लिए बाथरूम में रख दिया। इसके बाद दंपती कमरे के बाहर बैठकर बातें कर रहे थे। तभी ताज मोहम्मद की 9 साल की बच्ची साहिबा बाथरूम में चली गई और उसने खोलता हुआ पानी अपने ऊपर डाल दिया, जिससे बच्ची गंभीर रूप से झुलस गई।
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बेटी की चीख-पुकार सुनकर परिवार हरकत में आया। पड़ोसियों की मदद से तत्काल उसे जिला अस्पताल लाया गया। जहां से उसे प्राथमिक उपचार के बाद जेएन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मगर मेडिकल कॉलेज में बच्ची का इलाज नहीं हो सका। वहां से वह बच्ची को लेकर किसी अन्य अस्पताल जाने की सोच रहे थे कि बच्ची ने दम तोड़ दिया। ताज मोहम्मद के अनुसार बच्ची के शव को बिना पुलिस या अन्य किसी को सूचना दिए दफन कर दिया गया। उसका आरोप है कि जिला अस्पताल में बेटी को डॉक्टर ने हाथ तक नहीं लगाया था। बस देखते ही मेडिकल ले जाने की कह दी थी, जबकि मैं और मेरी पत्नी कहते रहे कि साहब कुछ दवा दो दे दो।
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