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नगर निगम नाकाम: ऐसे तो अलीगढ़ के चारों कोनों पर खड़े हो जाएंगे कूड़े के पहाड़, खुले में फिंक रहा 80 फीसदी कचरा

Tue, 24 Dec 2024 01:29 PM IST
चमन शर्मा बृजेश चौहान, अमर उजाला, अलीगढ़
बृजेश चौहान, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Tue, 24 Dec 2024 01:29 PM IST
सार

अलीगढ़ शहर से लगभग साढ़े सात किलोमीटर दूर आगरा रोड पर पला साहिबाबाद में 7.5 एकड़ भूमि की लैंडफिल है, लेकिन इसमें प्रतिदिन मात्र 28 टन कूड़ा ही निपटान स्थल पर पहुंचाया जाता है। यहां भी कूड़ा निस्तारण की कोई वैज्ञानिक विधि नहीं है, वहां बस कूड़े को डंप किया जा रहा है। यही स्थिति मथुरा रोड लैंडफिल की भी है, जहां कूड़े का पहाड़ बन गया है।

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Garbage heaps in Aligarh
मथुरा रोड स्थित एटूजेड प्लांट में पड़ा कूड़े का ढेर - फोटो : संवाद

विस्तार

आबादी बढ़ी, शहर बढ़ा, घरों से निकलने वाला कूड़ा भी बढ़ रहा है। हालात यह हैं कि अलीगढ़ शहर से 130 मीट्रिक टन कूड़ा तो उठ ही नहीं रहा है। 80 फीसदी कूड़ा खुले में फेंका जा रहा है। अभी नहीं चेते तो भविष्य में शहर से निकलने वाले कूड़े को डालने के लिए जगह ही नहीं होगी। शहर के चारों कोनों पर कूड़े के पहाड़ बनते चले जाएंगे। यह खुलासा एएमयू अलीगढ़ मुस्लिम विवि के एक शोध में हुआ है। नगर निगम के अधिकारी भले ही कुछ भी दावे करें, सरकार भी अगले साल अलीगढ़ को स्मार्ट सिटी घोषित करने जा रही है, लेकिन शहर से निकलने वाला कूड़ा इसकी तस्वीर को बदरंग कर रहा है। 

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एएमयू के वास्तुकला विभाग के फराज अली, संजीव माहेश्वरी और वरिशा इक्तिदार के निर्देशन में हुआ यह शोध गत नौ अक्तूबर को प्रकाशित हुआ। इसमें पाया गया कि शहर से 560 मीट्रिक टन कूड़ा प्रतिदिन निकलता है, इसमें से 430 मीट्रिक टन कूड़ा उठ भी रहा है तो उसका निस्तारण नहीं हो रहा है। मथुरा रोड पर तो डंपिंग यार्ड कूड़े का पहाड़ बन गया है। इसमें पाया गया कि नगर निगम के पास बायोमेडिकल अपशिष्ट के निपटान के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
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शहर से लगभग साढ़े सात किलोमीटर दूर आगरा रोड पर पला साहिबाबाद में 7.5 एकड़ भूमि की लैंडफिल है, लेकिन इसमें प्रतिदिन मात्र 28 टन कूड़ा ही निपटान स्थल पर पहुंचाया जाता है। यहां भी कूड़ा निस्तारण की कोई वैज्ञानिक विधि नहीं है, वहां बस कूड़े को डंप किया जा रहा है। यही स्थिति मथुरा रोड लैंडफिल की भी है, जहां कूड़े का पहाड़ बन गया है। एएमयू वास्तुकला विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजीव माहेश्वरी ने बताया कि उनके निर्देशन में शोध छात्रों ने यह अध्ययन किया और आकलन किया गया। मौजूदा और भविष्य की स्थिति चिंताजनक है।

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कूड़े से बिजली बनाकर कर किया जा सकता है समाधानःडॉ. संजीव माहेश्वरी

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वास्तुकला विभाग के प्रोफेसर डॉ संजीव माहेश्वरी ने बताया कि एक कूड़े के उठान की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, उसमें भी कुप्रबंधन बड़ी समस्या है। डंपिंग साइट बहुत कम है ऊपर से कूड़े का निस्तारण नहीं हो रहा है, आखिर कूड़ा जाएगा कहां। एक डंपिंग स्थल को सही करने में छह साल लग जाते हैं, यहां तो अभी दूसरे स्थल का चयन तक नहीं किया गया। भविष्य की चुनौतियां बढ़ रही हैं। इंदौर की तरह यहां भी इंसिरेटर प्लांट लगाया जाना चाहिए। कूड़े से बिजली बनाकर काफी हद तक कूड़े का निस्तारण किया जा सकता है। 

नियम 2000 के अनुरूप नहीं है व्यवस्था
ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन एवं हैंडलिंग) नियम 2000 सभी नगर पालिकाओं और नगर निगमों पर लागू होता है। इन्हें इसके संग्रहण, पृथक्कीकरण, भंडारण, परिवहन और निस्तारण की व्यवस्था करनी है। अध्ययन में पाया गया है कि उपयोग की जाने वाली निपटान तकनीकें अवैज्ञानिक हैं और अगले 30 वर्षों के लिए एमएसडब्ल्यू नियम 2000 का अनुपालन नहीं करती हैं।

सिफारिशें

1- नए कचरा निपटान स्थलों का अधिग्रहण किया जाना जरूरी हो गया है।
2- घरों पर एक डिब्बा बायोडिग्रेडेबल और दूसरा गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे के लिए हो।
3-हर सौ मीटर पर घरेलू कचरे और पांच सौ मीटर पर सामुदायिक कचरा डिब्बे रखे जाएं।
4- कचरो डिब्बों को टिपर या ट्रैक्टर से सीधे कचरा निपटान स्थल तक ले जाया जा सके।
5- कचरा प्रबंधन में कदाचार रोकने के लिए ट्रैकिंग, और कुशल निगरानी सुनिश्चित की जाए।
6-डोर-टू-डोर कचरा संग्रह वाहनों को आरएफआईडी और जीपीएस सिस्टम से लैस करें।
7-कचरा डिब्बे में सेंसर लगा हो और 70% तक पहुंचने पर सेंसर नियंत्रण कक्ष को सचेत करेगा।

संसाधन

  • नगर निगम के पास 264 कचरा संग्रहण वाहन हैं, जो प्रतिदिन लगभग 430 टन नगर निगम के ठोस कचरे का परिवहन करते हैं। प्रतिदिन तीन से चार चक्कर लगाते हैं।
  • डंप प्वाइंटों की संख्या 198 हैं। जीवीपी (कचरा संवेदनशील प्वाइंट) की संख्या 266 हैं। कूड़े का संग्रहण ए-2 जेड और नगर निगम दोनों के द्वारा किया जाता है।
  • एमएसडब्ल्यू का डोर टू डोर संग्रह ए2जेड और एएमसी दोनों द्वारा किया जाता है। ठोस कचरे का निपटान मथुरा रोड पर ए2जेड कार्यालय में किया जाता है।


समस्या

  • कचरे को उसके स्रोत पर संग्रहित करने की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। कचरे को तुरंत वहीं फेंक देते हैं, जहां से वह उत्पन्न होता है।
  • कचरे को अलग-अलग करने की प्रक्रिया को नहीं व्यापक तौर पर नहीं अपनाया जाता, निपटान स्थलों पर पुनर्चक्रणीय कचरे को सामान्य कचरे में मिला दिया जाता है।
  • बढ़ती आबादी के अनुरूप कर्मचारियों की संख्या बढ़ नहीं रही। सीमित संसाधनों के चलते अलीगढ़ में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की स्थिति सही नहीं है।
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