फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   " Future " is recorded in Bhagat Singh 's execution environment

‘भविष्य’ में दर्ज है भगत सिंह को फांसी का माहौल

Wed, 10 Aug 2016 01:41 AM IST
दीपक शर्मा
दीपक शर्मा Updated Wed, 10 Aug 2016 01:41 AM IST
विज्ञापन
" Future " is recorded in Bhagat Singh 's execution environment
‘भविष्य’ में दर्ज है भगत सिंह को फांसी का माहौल - फोटो : रुपेश
 कुछ दिनों बाद आ रहे स्वतंत्रता दिवस पर एक बार फिर से अपने शहर के उन लोगों की यादें ताजा हो चली हैं जिन्होंने आजादी के महासंग्राम में अपनी भी आहुति डाली।
विज्ञापन

अलीगढ़ के इंडस्ट्रियल इस्टेट में रहने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्याम बिहारी लाल भी राष्ट्रीय आंदोलन के योद्धा थे। श्याम बिहारी लाल के बेटे निरंजन लाल (73 वर्ष) कहते हैं कि सन 2005 में उनके पिता का निधन हो गया।
विज्ञापन

उनके पिता के  पास 1931 के इलाहाबाद से प्रकाशित अखबार ‘भविष्य’ के वह अंक सुरक्षित थे, जिनमें शहीद ए  आजम भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी की सजा का समाचार था। उस अखबार को श्याम बिहारी लाल किसी तरह इलाहाबाद से अलीगढ़ बचा कर ला पाए थे क्योंकि अंग्रेजों ने उस समय पत्र पत्रिकाओं पर सेंसरशिप लागू कर दी थी। श्याम बिहारी लाल अपनी जान पर खेलकर उस अखबार के एक बंडल को यहां ले आए और अखबार की खबर से पता चलता है कि लोगों को कुछ इस अंदाज में भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी की खबर मिली होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

तीनों विप्लवकारी फांसी पर लटका दिए गए
लाहौर डेटलाइन से शुरू होने वाले इस समाचार की हेडलाइन थी। ‘पंजाब के तीनों विप्लवकारी फांसी पर लटका दिए गए’। 23 वीं मार्च का समाचार है कि संध्या के साढ़े सात बजे लाहौर सेंट्रल जेल में सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी पर लटका दिए गए। सेंट्रल जेल के भीतर कैदियों द्वारा लगभग 7 बजे बड़ी देर तक ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगते रहे, जिससे आसपास के लोगों को इस बात का पता लग गया कि सरदार भगत सिंह आदि फांसी पर लटकाए जा रहे हैं। स्वर्गीय भगत सिंह के पिता सरदार किशन सिंह ने तार द्वारा अधिकारियों से इस बात की प्रार्थना की कि भगत सिंह और उनके साथियों के मृतक शरीर अंत्योष्टि क्रिया के लिए उन्हें दे दिए जाएं, परंतु शरीर उन्हें नहीं दिए गए और आधी रात को सतलज नदी के किनारे जला दिए गए।
 भगत सिंह की फांसी पर महात्मा गांधी ने यह कहा
 आवेश में आकर हमें पथ भ्रष्ट नहीं होना चाहिए। हमें यह समझ कर संतोष कर लेना चाहिए, कि फांसी की सजा रद करना संधि के प्रस्तावों में निहित न था। गवर्नमेंट पर हम गुंडापन का दोष आरोपित कर सकते हैं, परंतु हमें उस पर संधि भंग करने का दोष न मढ़ना चाहिए। मेरी व्यक्तिगत राय से भगत सिंह और उसके साथियों की फांसी से हमारी शक्ति और बढ़ गई है। (नई दिल्ली से कराची कांग्रेस के लिए रवाना होने से पहले एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित होने के लिए जारी किया गया बयान)
 सरदार पटेल ने कहा
‘अंग्रेजी कानून इस बात पर अभिमान से झूमता था कि वह गवाही में जिरह के द्वारा प्रमाणित किए बिना किसी अभियुक्त को सजा नहीं देता, परंतु उसी कानून ने ऐसी गवाही के विश्वास पर, जो घटना के बहुत देर बाद प्राप्त हुई थी और जिसमें जिरह का नाम न था, भारत के एक श्रेष्ठ युवक की हत्या कर डाली। किसी व्यक्ति को ढीढता और उच्श्रृंखलता के अपराध में सजा दी जा सकती है, परंतु उसे फांसी देना कहां का न्याय है?’

सरदार भगत सिंह के आखिरी शब्द
‘अंत में हम केवल यह कहना चाहते हैं कि आपकी अदालत के फैसले के अनुसार हम पर सम्राट के विरुद्ध युद्ध करने का अभियोग लगाया गया है और इस प्रकार हम युद्ध के शाही कैदी हैं। अतएव हमें फांसी पर न लटका कर गोली से उड़ाया जाना चाहिए। इसका निर्णय अब आपके ही ऊपर है, कि जो कुछ अदालत ने निर्णय किया है, उसके अनुसार आप कार्य करेंगे या नहीं। हमारी आपसे विनम्र प्रार्थना है और हमें पूर्ण आशा है कि आप कृपा कर फौजी महकमे को आज्ञा देकर हमारे प्राण दंड के लिए एक फौज या पल्टन के कुछ जवान बुलवा लेंगे’

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed