पूर्व चेयरमैन को मारी गोली: सड़क विवाद ने दिया चुनावी तनातनी को खूनी रंजिश का रूप, 10 दिन से चल रही प्लानिंग
मो.आरिफ ने पुलिस को बताया कि चेयरमैनी में भाजपा के टिकट पर चुनाव हारने वाला पक्ष उनसे खुन्नस रखता है। अब ताजा एक सड़क के विवाद ने यह खूनी रंजिश का रूप लिया है। दस दिन पहले भी तनातनी हुई थी। मगर उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
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अलीगढ़ जिले की इकलौती मुस्लिम बहुल पिलखना टाउन एरिया की चेयरमैनी पर तीन बार से काबिज सपा नेता मो.आरिफ पर हमले की खबर ने सभी को चौंका दिया। एक ही सवाल उछला कि आखिर निर्विवाद छवि व सभ्य व्यवहार वाले नेता पर हमला किसने व क्यों किया होगा? मगर जब खुद मो.आरिफ ने पुलिस को बताया कि चेयरमैनी में भाजपा के टिकट पर चुनाव हारने वाला पक्ष उनसे खुन्नस रखता है। अब ताजा एक सड़क के विवाद ने यह खूनी रंजिश का रूप लिया है। दस दिन पहले भी तनातनी हुई थी। मगर उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। आज इसी का परिणाम है कि उन पर हमला हुआ है।
एसपी देहात अमृत जैन के अनुसार घायल चेयरमैन पति मो.आरिफ से अब तक हुई बातचीत, परिवार से पूछताछ व घटनास्थल पर हुई जांच में काफी कुछ उजागर हुआ है। ताजा विवाद के विषय में स्पष्ट हुआ है कि जिस पक्ष पर हमले का आरोप है, उस पक्ष के पुराने घर के सामने से नगर पंचायत द्वारा सडक़ का निर्माण कराया जा रहा है। पूरी सडक़ बन गई। बस आरोपी पक्ष के घर के सामने बीस मीटर टुकड़े का निर्माण रह गया है। इसका कारण है कि आरोपी पक्ष के मकान की छजली व चबूतरे को चढऩे वाली सीढ़ी निकल रही हैं। जिसके कारण सडक़ नहीं बन पा रही। करीब दस दिन पहले मो.आरिफ ने जब आरोपी पक्ष से सडक़ न बनने देने पर ऐतराज जताया तो उनमें कुछ विवाद हुआ था। अब उसी खुन्नस में यह हमला होना स्पष्ट हो रहा है।
विवाद की एक वजह ये भी
2023 में हुए निकाय चुनाव में खुद आरिफ की पत्नी निर्दल पहले स्थान पर रहीं, जबकि उनके सामने सलमा नाम की महिला दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि भाजपा से जमीला खातून तीसरे स्थान पर रहकर जमानत भी न बचा सकीं। मगर जमीला का परिवार भाजपा से जुड़ गया। सत्ताधारी नेताओं संग रहने के चलते कस्बे में आए दिन रंगबाजी दिखाने लगा। कस्बे के एक पेशेवर अपराधी पर पिछले दिनों पुलिस ने कार्रवाई की। उसमें भी आरिफ के इशारे पर कार्रवाई होना माना गया। नगर पंचायत के कार्यों में विवाद पनपाए गए। ये भी विवाद के कुछ कारण रहे। मगर अब नए विवाद में हमला प्लान कर लिया गया।
मो.आरिफ खुद संपन्न परिवार से आते हैं। सियासत में सक्रिय रहने के चलते उन पर खुद के लाइसेंसी हथियार भी हैं। दस दिन पहले हुए विवाद के बाद उनके पास किसी न किसी खुराफात की खबरें भी आ रही थीं। मगर उनका मानना था कि इतनी हिमाकत शायद न करें। मगर आरोपी दस दिन से प्लानिंग बना रहे थे। आज जब आरिफ बिना हथियार के कस्बे में दावत खाने निकले तो आरोपियों को अवसर मिल गया। उन्होंने घटना को अंजाम दे दिया।
ठेकेदारी छोड़ सियासत में आए
आरिफ के पिता चीफ इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हुए। खुद वे पढ़े लिखे हैं। वर्ष 2012 में अचानक उन्होंने अपनी ठेकेदारी छोडक़र सियासत में कदम रखा। छर्रा विधानसभा से निर्दल चुनाव लड़े थे। मगर दस हजार वोटों पर सिमट गए। इसके बाद उन्होंने पिलखना की चेयरमैनी पर निर्दलीय दावा ठोका। तब से लगातार तीन बार से उस पर काबिज हैं। खास बात हैं कि वे सपा में सक्रिय हो गए। मगर चेयरमैनी पर लगातार तीनों बार निर्दलीय चुनाव लड़कर जीते। तीनों बार सपा का उन्हें बाहर से समर्थन रहा। एक बार खुद, एक बार मां व अब पत्नी को चेयरमैन बनाया। 2022 के चुनाव में आरिफ ने कोल से सपा से विधायकी का टिकट भी मांगा था। मगर मिल नहीं पाया।
मेडिकल कालेज पहुंची भीड़
पिलखना के पूर्व चेयरमैन पर हमले की खबर पर आनन फानन घटनास्थल पर भीड़ जमा हो गई। इस बीच भीड़ की ओर से भी भागते हमलावरों पर ईंट पत्थर बरसाए गए। मगर आरिफ को घायल देख भीड़ उनके इलाज की व्यवस्था में जुट गई। तमाम लोग घटनास्थल व बाद में मेडिकल कॉलेज पहुंचे। सपा जिला महासचिव मनोज यादव, महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोषी, खुसरो खान, आमिर आबिद, जस्सू शेरवानी आदि तमाम नेता मेडिकल कालेज पहुंच गए। घटना की जानकारी करते हुए अधिकारियों से बात की।
बताए गए ये नाम, सीसीटीवी देख रही पुलिस
एसपी देहात के अनुसार इस घटना को लेकर अब तक जो नाम खुद घायल व अन्य साथियों द्वारा बताए गए हैं। उनमें भाजपा से चेयरमैन प्रत्याशी रहीं जमीला खातून के बेटे और उनके साले हैं। उनकी तलाश में टीमें लग गई हैं। साथ में घटनास्थल के बाद से लेकर आरोपियों के घर व कस्बे से भागने वाले रास्तों पर सीसीटीवी दिखवाए जा रहे हैं।