Aligarh News: ब्रह्मांडीय कवि प्रो नीहार की प्रथम पुण्यतिथि, बाल कवियों ने मासूम कविताओं से दी श्रद्धांजली
एएमयू के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर रहे अलीगढ़ के गकमात्र ब्रह्मांडीय कवि डॉ बीएस नीहार की प्रथम पुण्यतिथि पर बाल कवियों ने उनकी रचित कविताएं सुनाकर अपनी श्रद्धांजली दी। प्रो बीएस नीहार मानवीय ब्रह्मण्डवाद के सिद्धांत को प्रतिपादित किया, जो उनकी प्रसिद्ध पुस्तक मानवीय ब्रह्मण्डवाद और नदी की मौत के रूप में है।
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नीहार मीरा नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के संस्थापक और ब्रह्मांडीय कवि, दार्शनिक, लेखक और पर्यावरणविद् स्व प्रो बीएस नीहार की प्रथम पुण्यतिथि पर स्कूल प्रांगण में बाल कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का शुभारम्भ प्रधानाचार्या कल्पलता चंद्रहास, सोसाइटी प्रबंधक अमिताभ नीहार, स्कूल मैनेजर आकाश नीहार, उप प्रधानाचार्य संतोष शर्मा, गार्गी शर्मा, झरना नीहार ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। सर्वप्रथम कवि प्रो बीएस नीहार के चित्र पर आगंतुक गणमान्य शिक्षक, स्टाफ और छात्र-छात्राओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
प्रधानाचार्या कल्पलता चंद्रहास ने बताया कि प्रो बीएस नीहार 1970 से पहले भी पर्यावरण पर कविताएँ लिखते रहे थे। उन्होंने पर्यावरण के मुद्दों को बहुत पहले ही भाँप लिया था और जागरूकता पैदा करने के लिए पर्यावरण के मुद्दों पर कविताएँ लिखना शुरू कर दिया था। उनकी कविताएँ बिगड़ते पर्यावरण, रासायनिक और परमाणु हथियारों के उपयोग के प्रति चिंता और चेतावनी दोनों को दर्शाती हैं। प्रो नीहार ने एएमयू में हिन्दी प्रोफेसर रहते हुए "मानवीय ब्रह्मण्डवाद" के सिद्धांत को प्रतिपादित किया, जो उनकी प्रसिद्ध पुस्तक "मानवीय ब्रह्मण्डवाद और नदी की मौत" के रूप में है।
बाल कवि सम्मेलन में वर्षा, नंदिनी, उमा शंकर, निशांत, भारत, प्रिंस, चेतन्य, अंशिका, जय, रीशू, हर्षिता, दक्ष, कुनाल, रमाकांत, मीना, सगुन, सरोवर समेत 34 बाल कवियों ने ब्रह्माण्ड कवि प्रो बीएस नीहार की रचित कविताओं का वाचन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बाल कवियों ने प्रो बीएस नीहार द्वारा रचित कविताऐं धरती प्यासी मरी और यह रेत हो गई सारी,अन्न उगाए गी कैसे हमको यह बेचारी...; खोल दो खिड़कियाँ,हवाओं को आने दो ! फूल की भाँति खिलो, समय को रूक जाने दो....; शब्द एक शक्ति है, बात है, विचार है, व्यक्ति है। शब्द जीवित संसार है, प्रकृति का प्यार है.....; अणुबम के विस्फोट से, लगी वनों में आग। नदियाँ सारी जल गई, रेत हुए पहाड़.....; प्यार की गंध, ब्रह्माण्ड में फैलाएगी। मेरी कविता मुझे, तुम तक ले जाएगी....; क्यों आती कविता में, तुम्हारे प्यार की गंध ! क्यों आ जाती हो तुम, मेरी कविता में प्रिये... पढ़कर अपना नमन प्रस्तुत किया।
अंत में प्रो नीहार द्वारा रचित झण्डा गान सारे विश्व को दिखा रहा है सत्य, अहिंसा का सपना प्रस्तुत किया गया। प्रधानाचार्या कल्पलता चंद्रहास ने धन्यावाद ज्ञापित किया। बाल कवि सम्मेलन का संचालन शिक्षिका डॉ ममता भारद्वाज और छात्रा सगुन ने किया। इस दौरान रीता शर्मा, डीके गौड़, पूनम कुलश्रेष्ठ, जीतेश वार्ष्णेय, रूचि वार्ष्णेय, कंचन आदि मौजूद थे।